समस्तीपुर में जीविका की बड़ी पहल, 703 लोगों ने ली नशामुक्ति की शपथ

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समस्तीपुर में जीविका की बड़ी पहल, 703 लोगों ने ली नशामुक्ति की शपथ

समस्तीपुर में नशामुक्त समाज बनाने के लिए जीविका ने जागरूकता अभियान चलाया। रविवार को दलसिंहसराय, विभूतिपुर और बिथान प्रखंडों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान कुल 703 लोगों ने नशे से दूर रहने की शपथ ली। समस्तीपुर में जीविका के इस नशामुक्ति अभियान का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों, खासकर महिलाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और सामूहिक भागीदारी से स्वस्थ समाज का निर्माण करना रहा।

कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने लोगों को नशे से होने वाले नुकसान की जानकारी दी। प्रतिभागियों को स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जागरूक करने का संकल्प दिलाया गया।

तीन प्रखंडों में आयोजित हुआ नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम

जीविका के तत्वावधान में आयोजित इस अभियान के तहत तीनों प्रखंडों में जागरूकता कार्यक्रम और शपथ ग्रहण समारोह हुए। इनमें ग्रामीण समुदाय के लोगों के साथ जीविका से जुड़ी महिलाएं, सामुदायिक कैडर और विभिन्न संकुल स्तरीय संघों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बताया कि नशे की लत केवल व्यक्ति की सेहत को प्रभावित नहीं करती, बल्कि इसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इससे आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है और पारिवारिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए लोगों से अपील की गई कि वे नशे से दूरी बनाए रखें और अपने आसपास भी इसके खिलाफ जागरूकता फैलाएं।

विभूतिपुर में सबसे अधिक 459 लोगों ने लिया संकल्प

इस अभियान में विभूतिपुर प्रखंड की भागीदारी सबसे अधिक रही। यहां सभी छह संकुल स्तरीय संघों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इन कार्यक्रमों में कुल 459 लोगों ने हिस्सा लिया और नशामुक्त समाज बनाने की शपथ ली। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी से अभियान को स्थानीय स्तर पर समर्थन मिला।

कार्यक्रम में लोगों को बताया गया कि नशे की आदत व्यक्ति की कार्यक्षमता, स्वास्थ्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए समय रहते इस आदत से बचना और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेना जरूरी है।

बिथान में 181 और दलसिंहसराय में 63 लोगों ने ली शपथ

बिथान प्रखंड के तीन संकुल स्तरीय संघों में भी नशामुक्ति अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किए गए। यहां कुल 181 लोगों ने नशे से दूर रहने और दूसरों को जागरूक करने का संकल्प लिया।

वहीं, दलसिंहसराय प्रखंड में आयोजित कार्यक्रम में 63 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस तरह तीनों प्रखंडों में कुल 703 लोगों ने अभियान के दौरान शपथ ली।

प्रखंडवार भागीदारी इस प्रकार रही:

  • विभूतिपुर: 459 लोग, छह संकुल स्तरीय संघ।

  • बिथान: 181 लोग, तीन संकुल स्तरीय संघ।

  • दलसिंहसराय: 63 प्रतिभागी।

इन तीनों प्रखंडों के आंकड़ों को जोड़ने पर कुल संख्या 703 होती है।

नशे के शारीरिक, मानसिक और आर्थिक नुकसान बताए गए

कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने नशे के विभिन्न दुष्परिणामों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि नशे की लत व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है।

इसके साथ ही नशे का असर परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है। नशे पर खर्च बढ़ने से घर की जरूरी जरूरतों और बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ सकता है। कई बार इसकी वजह से परिवार में विवाद और सामाजिक परेशानियां भी पैदा होती हैं।

प्रतिभागियों को समझाया गया कि नशामुक्ति केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि परिवार और समाज के सहयोग से आगे बढ़ने वाला प्रयास है। यदि परिवार के सदस्य और आसपास के लोग मिलकर जागरूकता फैलाएं, तो नशे की समस्या से निपटने में मदद मिल सकती है।

नशामुक्त समाज बनाने में महिलाओं की भूमिका पर जोर

जीविका का यह अभियान ग्रामीण समुदाय में जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित रहा। इसमें विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी और उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।

ग्रामीण परिवारों में महिलाएं स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा और घरेलू आर्थिक प्रबंधन से सीधे जुड़ी रहती हैं। ऐसे में नशे के दुष्परिणामों की जानकारी मिलने से वे परिवार के सदस्यों को सही दिशा में जागरूक कर सकती हैं।

अभियान के दौरान लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे और दूसरों को भी इसके नुकसान के बारे में बताएंगे। इस तरह जागरूकता को गांव और समुदाय के स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम में जीविका के अधिकारी और सामुदायिक प्रतिनिधि रहे मौजूद

तीनों प्रखंडों में आयोजित कार्यक्रमों में जीविका के जिला और प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी शामिल हुए। इनके अलावा क्षेत्रीय समन्वयक, संकुल स्तरीय संघों की प्रतिनिधि, सामुदायिक कैडर और ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को नशे के नुकसान समझाना और सामूहिक प्रयास से नशामुक्त वातावरण तैयार करने के लिए प्रेरित करना था।

703 लोगों की शपथ इस अभियान में स्थानीय भागीदारी को दिखाती है। हालांकि, नशामुक्त समाज बनाने के लिए केवल शपथ लेना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए लगातार जागरूकता, परिवार का सहयोग और जरूरत पड़ने पर नशे की लत से बाहर निकलने के लिए उचित परामर्श और उपचार भी जरूरी है।

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