मोतिहारी में सूखे नशे के तस्करों पर बड़ा एक्शन, 51 गिरफ्तार
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बिहार में सूखे नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में अक्टूबर महीने के दौरान पुलिस ने तस्करों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 35 मामले दर्ज किए और 51 लोगों को गिरफ्तार किया। मोतिहारी पुलिस की इस कार्रवाई में 205.953 किलोग्राम गांजा, 12.886 किलोग्राम चरस और स्मैक समेत कई तरह के नशीले पदार्थ बरामद हुए हैं।
पुलिस की कार्रवाई में 48 पुरुष और तीन महिलाएं गिरफ्तार हुई हैं। जब्त सामान में हजारों नशीले इंजेक्शन, कफ सिरप और गोगो भी शामिल हैं। नेपाल सीमा से सटे इलाकों में तस्करी के नेटवर्क पर विशेष नजर रखी जा रही है। पुलिस ने साफ किया है कि जिले में नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार करने वालों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
अक्टूबर में 35 केस दर्ज, 51 लोगों की गिरफ्तारी
मोतिहारी पुलिस की ओर से जारी अक्टूबर महीने की कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार छापेमारी की गई।
एक अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच पुलिस ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कार्रवाई कर कुल 35 मामले दर्ज किए। इस दौरान 51 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों में 48 पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं।
पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कई ठिकानों पर दबिश दी। इस अभियान का मकसद नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री और तस्करी से जुड़े लोगों पर कार्रवाई करना बताया गया है।
अक्टूबर में कितने नशीले पदार्थ जब्त हुए?
पुलिस की कार्रवाई में अलग-अलग तरह के मादक पदार्थ बरामद किए गए। जब्ती का विवरण इस प्रकार है:
नशीले पदार्थ | बरामद मात्रा |
|---|---|
गांजा | 205.953 किलोग्राम |
चरस | 12.886 किलोग्राम |
स्मैक | 50.566 ग्राम |
नशीले इंजेक्शन | 3,252 पीस |
ऑनरेक्स कफ सिरप | 206 पीस |
गोगो | 80 पीस |
इन आंकड़ों से पता चलता है कि जिले में नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल गांजा या चरस तक सीमित नहीं रही। पुलिस ने नशीले इंजेक्शन, सिरप और अन्य प्रतिबंधित पदार्थों की बरामदगी पर भी ध्यान दिया।
हरसिद्धि से रक्सौल तक पुलिस की छापेमारी
अक्टूबर में मोतिहारी पुलिस की कई बड़ी कार्रवाइयां अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुईं। हरसिद्धि थाना क्षेत्र में पुलिस ने भारी मात्रा में गांजा और हजारों नशीले इंजेक्शन बरामद किए।
इसके अलावा रक्सौल, आदापुर और महुआवा जैसे सीमावर्ती इलाकों में भी छापेमारी की गई। इन क्षेत्रों में नेपाल सीमा से जुड़े तस्करी नेटवर्क पर पुलिस की विशेष नजर रही।
कार्रवाई के दौरान चरस, स्मैक और गांजा की बरामदगी के साथ कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े संदिग्धों और उनके सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानकारी दी है।
सीमावर्ती इलाकों में तस्करी रोकना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पुलिस की कोशिश केवल स्थानीय स्तर पर नशा बेचने वालों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि सप्लाई नेटवर्क की पहचान करना भी है।
कई थानों की पुलिस ने मिलकर चलाया अभियान
जिले के नगर थाना, सुगौली, बंजरिया, कोटवा, मेहसी, चिरैया और पकड़ीदयाल समेत कई थाना क्षेत्रों में कार्रवाई हुई।
इन इलाकों में पुलिस ने अपने स्तर पर सूचना जुटाई और संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की। अभियान के दौरान गिरफ्तारियां और बरामदगी की गई।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूर्वी चंपारण में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और तस्करी के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
नेपाल सीमा से जिले की भौगोलिक निकटता के कारण तस्करी पर निगरानी और मजबूत करना भी जरूरी है। पुलिस के सामने अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर सप्लाई चेन और बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की चुनौती है।
बिहार में भी बढ़ी नशे के खिलाफ कार्रवाई
मोतिहारी की कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब राज्य सरकार ने पूरे बिहार में सूखे नशे के खिलाफ अभियान तेज करने का फैसला किया है।
बुधवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में पटना में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इसमें राज्य में मादक पदार्थों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई, दर्ज मामलों, गिरफ्तारियों और जब्ती के आंकड़ों की समीक्षा की गई।
बैठक में बिहार की पुलिस महानिदेशक प्रीता वर्मा, गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक रत्न संजय और गृह विभाग के विशेष सचिव क्षत्रनील सिंह भी मौजूद रहे।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 तक बिहार में एनडीपीएस एक्ट के तहत कुल 4,232 मामले दर्ज किए गए। इस दौरान 6,104 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई।
2025 के मुकाबले 2026 में ज्यादा मामले और गिरफ्तारियां
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में पूरे साल एनडीपीएस एक्ट के तहत 2,583 मामले दर्ज हुए थे और 3,562 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
इसके मुकाबले 2026 में 27 अक्टूबर तक ही दर्ज मामलों और गिरफ्तारियों की संख्या काफी आगे निकल गई। हालांकि, दोनों आंकड़ों की अवधि अलग-अलग है। इसलिए इनकी तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि 2026 के आंकड़े पूरे साल के नहीं हैं।
वर्ष 2023 से 27 अक्टूबर 2026 तक बिहार में कुल 11,347 मामले दर्ज किए गए और 13,543 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।
यह आंकड़े बताते हैं कि राज्य में मादक पदार्थों के खिलाफ पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है।
2026 में गांजा से लेकर नशीले इंजेक्शन तक बड़ी जब्ती
समीक्षा बैठक में 2026 के दौरान जब्त किए गए नशीले पदार्थों का विवरण भी सामने आया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 27 अक्टूबर तक राज्य में 46,549.95 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया।
इसके अलावा 149.696 किलोग्राम हेरोइन, ब्राउन शुगर और स्मैक की बरामदगी हुई। पुलिस ने 11,56,380 नशीली गोलियां और कैप्सूल तथा 4,92,870 नशीले इंजेक्शन भी जब्त किए।
इसी अवधि में 5,11,988 बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप की बरामदगी दर्ज की गई। ये आंकड़े राज्य में नशीले पदार्थों के अलग-अलग रूपों में सक्रिय अवैध कारोबार की गंभीरता को दिखाते हैं।
युवाओं को नशे से बचाना पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
मोतिहारी में अक्टूबर महीने की कार्रवाई और बिहार सरकार की समीक्षा बैठक से साफ है कि सूखे नशे के खिलाफ अभियान को प्राथमिकता दी जा रही है।
हालांकि, केवल गिरफ्तारी और बरामदगी से नशे की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसके लिए तस्करी के बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई, सीमावर्ती इलाकों में निगरानी, नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए उपचार और युवाओं में जागरूकता भी जरूरी है।
अब देखना होगा कि मोतिहारी पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए तस्करी के नेटवर्क के कितने बड़े हिस्से तक पहुंच पाती है। साथ ही, बिहार में चल रहा विशेष अभियान आने वाले महीनों में नशे के अवैध कारोबार को रोकने में कितना प्रभावी साबित होता है।
