आईपीएस कुंदन कृष्णन की संपत्ति पर सियासी घमासान, सुधाकर सिंह ने उठाए सवाल
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
बिहार में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन की संपत्ति को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। बक्सर से आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अधिकारी और उनके परिवार की संपत्ति पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। कुंदन कृष्णन की संपत्ति को लेकर सांसद ने कथित बेनामी जमीन, शेयर बाजार में निवेश और कीमती वस्तुओं का जिक्र करते हुए जांच की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है।
सुधाकर सिंह के दावों के मुताबिक, अधिकारी और उनकी पत्नी के नाम पर घोषित संपत्ति का बाजार मूल्य करीब 87 करोड़ रुपये है। सांसद ने इसके अलावा भी कई ऐसी संपत्तियों और निवेशों का दावा किया है, जिनका विवरण सार्वजनिक संपत्ति घोषणा में नहीं होने की बात कही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कुंदन कृष्णन की संपत्ति पर सुधाकर सिंह ने क्या आरोप लगाए?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधाकर सिंह ने कहा कि कुंदन कृष्णन को अपने माता-पिता से करीब 38 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति विरासत में मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विरासत में मिली संपत्ति को लेकर वह भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा रहे हैं।
सांसद का मुख्य सवाल अधिकारी और उनकी पत्नी डॉ. मल्लिका सिंह के नाम पर अर्जित संपत्ति को लेकर है। उन्होंने दावा किया कि दोनों की घोषित संपत्ति का बाजार मूल्य लगभग 87 करोड़ रुपये है।
सुधाकर सिंह के अनुसार, इसके अलावा भी कई जमीनें और निवेश हैं, जिनका पूरा विवरण संपत्ति घोषणा में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ जमीनों के दस्तावेजों की पड़ताल और रिकॉर्ड का सत्यापन भी कराया गया है।
कैमूर में 16 एकड़ से अधिक जमीन की खरीद पर सवाल
सांसद ने कैमूर जिले में करीब 16 एकड़ 88 डिसमिल कृषि भूमि की खरीद का मुद्दा उठाया। उनके दावे के अनुसार, इस जमीन का बाजार मूल्य लगभग दो करोड़ रुपये हो सकता है, जबकि कागजात में इसकी कीमत करीब 17.50 लाख रुपये दिखाई गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन की खरीद में नकद भुगतान किया गया। इस आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि जब संबंधित लोगों के पास बैंक खाते और निवेश के रूप में पर्याप्त संपत्ति मौजूद थी, तो जमीन खरीदने में नकद भुगतान क्यों किया गया?
सांसद ने जमीन की वास्तविक कीमत, भुगतान के तरीके और लेनदेन की जांच कराने की मांग की है। इन दावों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के बाद ही हो सकेगी।
नालंदा और पटना की जमीनों को लेकर भी उठाए सवाल
सुधाकर सिंह ने नालंदा जिले में कुंदन कृष्णन के पैतृक गांव के आसपास जमीन खरीदे जाने का आरोप लगाया। उन्होंने दिनेश राम नाम के व्यक्ति से जमीन खरीदने की बात कही और दावा किया कि इसका उल्लेख संपत्ति घोषणा में नहीं किया गया है।
इसके अलावा उन्होंने पटना के मालसलामी इलाके के सिमरी-मुरारपुर में डॉ. मल्लिका सिंह के नाम पर करीब 10 कट्ठा जमीन होने का दावा किया। सांसद ने इस जमीन का संभावित बाजार मूल्य लगभग 20 करोड़ रुपये बताया।
उन्होंने ट्रांसपोर्ट नगर में कुंदन कृष्णन के नाम पर साढ़े तीन से साढ़े चार कट्ठा जमीन होने की बात भी कही। उनके अनुसार, इन संपत्तियों के स्वामित्व और मूल्य का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।
सांसद ने मालसलामी के अलग-अलग प्लॉट में डॉ. मल्लिका सिंह और बिट्टू सिंह के नाम पर जमीन होने के दावे भी किए। उन्होंने इन जमीनों की कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये तक होने का अनुमान जताया। हालांकि, बताए गए रकबे, स्वामित्व और बाजार मूल्य की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
शेयर बाजार में निवेश और 850 ग्राम सोने का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधाकर सिंह ने शेयर बाजार में निवेश से जुड़े दस्तावेजों का भी हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि कुंदन कृष्णन और उनकी पत्नी के नाम पर पहले कई कंपनियों के शेयर रहे हैं।
इनमें एक्सिस बैंक, बजाज हिंदुस्तान, भारती टेलीवेंचर्स, सिप्ला, फोर्टिस हेल्थकेयर, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईटीसी और एनएमडीसी जैसी कंपनियों के नाम शामिल किए गए।
सांसद ने वर्ष 2016 के संपत्ति विवरण का हवाला देते हुए करीब 36 लाख रुपये के शेयर खरीद मूल्य का दावा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मौजूदा संपत्ति विवरण में शेयर निवेश शून्य है, तो पहले खरीदे गए शेयरों का क्या हुआ और उन्हें बेचने पर कितनी रकम मिली?
इसके साथ ही उन्होंने अधिकारी और उनके परिवार के पास करीब 850 ग्राम सोना होने का दावा किया। उन्होंने हीरा, पुखराज, रूबी, प्लेटिनम और चांदी जैसी कीमती वस्तुओं का भी जिक्र किया। सांसद ने इनकी मात्रा और वास्तविक कीमत की जांच की मांग की।
मुख्यमंत्री से जांच और आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई की मांग
सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आर्थिक अपराध इकाई सहित सक्षम जांच एजेंसियों से संपत्ति के दस्तावेज, जमीन की रजिस्ट्री और निवेश के रिकॉर्ड की पड़ताल कराने की बात कही।
सांसद ने बिहार में लोकायुक्त की नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए स्वतंत्र संस्थागत व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने इस विषय पर हाईकोर्ट जाने और लोकायुक्त की नियुक्ति सुनिश्चित कराने की बात कही।
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि अधिकारी की अपनी संपत्ति और उनके करीबी लोगों के नाम पर मौजूद संपत्तियों का कुल मूल्य सैकड़ों करोड़ रुपये तक हो सकता है। उन्होंने इसे जांच का विषय बताया है।
पांच करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस से शुरू हुआ विवाद
कुंदन कृष्णन और सुधाकर सिंह के बीच विवाद पहले भी सार्वजनिक हो चुका है। भोजपुर के भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले में सांसद ने पुलिस कार्रवाई और तत्कालीन एसटीएफ नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
इसके बाद कुंदन कृष्णन की ओर से पांच करोड़ रुपये के मानहानि दावे से जुड़ा कानूनी नोटिस भेजे जाने की बात सामने आई थी। नोटिस में सार्वजनिक माफी की मांग भी की गई थी।
इसके जवाब में सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सरकार से जवाब मांगा था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को भी पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की थी। अब संपत्ति से जुड़े नए आरोपों के बाद दोनों के बीच विवाद फिर चर्चा में आ गया है।
अब अधिकारी के जवाब और निष्पक्ष जांच पर नजर
सुधाकर सिंह के आरोपों के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या बिहार सरकार इन दावों की जांच कराएगी? क्या आर्थिक अपराध इकाई या कोई दूसरी सक्षम एजेंसी जमीन और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करेगी?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और कुंदन कृष्णन का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए संपत्ति से जुड़े दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन, अधिकारी का पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है। आने वाले दिनों में सरकार और पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया इस मामले की दिशा तय कर सकती है।
