उत्तराखंड में परिवारों को मिलेगी डिजिटल पहचान, जानिए पोर्टल के फायदे
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के परिवारों को डिजिटल पहचान देने और सरकारी योजनाओं का लाभ आसान बनाने की दिशा में नई पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि परिवार पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके साथ ही देवभूमि परिवार पोर्टल के जरिए प्रदेश के परिवारों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करने की योजना भी शुरू की गई है। इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विकसित उत्तराखंड विजन 2047 का भी विमोचन किया।
सरकार का दावा है कि इन दोनों पहलों से सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने, विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और राज्य के विकास को नई दिशा देने में मदद मिलेगी। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि परिवार आईडी कैसे काम करेगी और इससे आम नागरिकों को क्या सुविधाएं मिलेंगी।
क्या है देवभूमि परिवार पोर्टल और कैसे मिलेगी आईडी?
देवभूमि परिवार पोर्टल उत्तराखंड सरकार की एक डिजिटल पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में रहने वाले परिवारों और उनके सदस्यों की जरूरी जानकारी को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है।
प्रमुख सचिव नियोजन आर मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार, पोर्टल पर पंजीकरण के बाद प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी दी जाएगी। इस आईडी के माध्यम से परिवार से जुड़ी जानकारी को सरकारी विभागों के बीच बेहतर तरीके से साझा और उपयोग किया जा सकेगा।
इस व्यवस्था के तहत परिवारों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे सरकारी विभागों को पात्र लाभार्थियों की पहचान करने और योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, आईडी बनाने की समयसीमा और नागरिकों के लिए उपलब्ध सेवाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार स्पष्ट होगी।
देवभूमि परिवार आईडी से आम लोगों को क्या फायदे होंगे?
सरकार का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने और अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की परेशानी से राहत देना है।
देवभूमि परिवार आईडी से संभावित रूप से ये फायदे मिल सकते हैं:
एकीकृत डिजिटल पहचान: प्रत्येक परिवार का रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा।
योजनाओं की पहचान: सरकारी विभाग पात्र परिवारों और लाभार्थियों की पहचान आसानी से कर सकेंगे।
कम दस्तावेजी परेशानी: बार-बार एक जैसी जानकारी और दस्तावेज देने की जरूरत कम हो सकती है।
विभागों के बीच समन्वय: अलग-अलग विभाग परिवार से संबंधित उपलब्ध जानकारी का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।
योजनाओं की निगरानी: सरकारी योजनाओं की प्रगति और लाभार्थियों तक पहुंच का आकलन आसान होगा।
बेहतर बजट नियोजन: परिवारों की जरूरतों के आधार पर सरकारी संसाधनों और बजट की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार की सफलता केवल योजनाएं बनाने से नहीं, बल्कि उनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने से तय होती है। इसी सोच के साथ इस पोर्टल को नागरिक-केंद्रित व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
पोर्टल के संचालन के लिए बनेगी प्रशासनिक व्यवस्था
देवभूमि परिवार पोर्टल को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।
प्रमुख सचिव नियोजन आर मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, इसके लिए राज्य स्तर पर देवभूमि परिवार प्राधिकरण और जिला स्तर पर जिला देवभूमि परिवार अधिकारी की व्यवस्था का प्रस्ताव है।
इससे परिवारों के डेटा के प्रबंधन, विभागों के बीच तालमेल और योजनाओं की निगरानी को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस डिजिटल व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि परिवारों का डेटा कितना सही और अद्यतन रहता है। साथ ही नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा और उसके जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
विकसित उत्तराखंड विजन 2047 में क्या हैं बड़े लक्ष्य?
देवभूमि परिवार पोर्टल के साथ मुख्यमंत्री ने विकसित उत्तराखंड विजन 2047 का भी विमोचन किया। यह दस्तावेज राज्य के दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
प्रमुख सचिव नियोजन आर मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार, विजन में लगभग 440 संकेतकों के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
इसमें वर्ष 2047 तक उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को लगभग 28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही राज्य की प्रति व्यक्ति आय को करीब 20 लाख रुपये तक ले जाने की योजना है।
विजन के प्रमुख आर्थिक और सामाजिक लक्ष्य इस प्रकार हैं:
अर्थव्यवस्था: लगभग 28 लाख करोड़ रुपये।
प्रति व्यक्ति आय: लगभग 20 लाख रुपये।
बेरोजगारी दर: 3.5 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य।
बहुआयामी गरीबी: 0.61 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य।
स्थापित ऊर्जा क्षमता: लगभग 22 हजार मेगावाट।
वन क्षेत्र: कुल क्षेत्रफल का 46.6 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य।
ये सभी वर्ष 2047 के लिए निर्धारित दीर्घकालिक लक्ष्य हैं। इन्हें हासिल करने के लिए अलग-अलग समयसीमा के अनुसार विभागीय योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया गया है।
LIVE: ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ एवं ‘विकसित उत्तराखण्ड विजन-2047’ का लोकार्पण https://t.co/8wJkX8QCld
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) November 2, 2026
सड़क, रेल और पर्यटन विकास पर भी सरकार का जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उत्तराखंड भी इसी लक्ष्य के अनुरूप अपनी विकास योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है।
राज्य में सड़क, रेल और हवाई संपर्क बेहतर बनाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम हो रहा है। इनमें दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम सड़क परियोजना प्रमुख हैं।
इसके अलावा केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य, मानसखंड मंदिर माला मिशन और शीतकालीन यात्रा के माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना है।
सरकार का लक्ष्य पर्यटन गतिविधियों को केवल यात्रा के कुछ महीनों तक सीमित न रखकर पूरे साल रोजगार और स्थानीय कारोबार के अवसर बढ़ाना है।
महिलाओं, युवाओं और स्थानीय रोजगार को मिलेगा महत्व
विकसित उत्तराखंड विजन 2047 में रोजगार, कौशल विकास, उद्योग और स्वरोजगार को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी योजना के जरिए महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके माध्यम से उत्तराखंड के पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार औद्योगिक निवेश, स्टार्टअप और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दे रही है, ताकि युवाओं को राज्य के भीतर ही रोजगार के बेहतर विकल्प मिल सकें।
पर्यावरण और आपदा प्रबंधन को भी दी गई प्राथमिकता
उत्तराखंड हिमालयी और आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। इसलिए विकास योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का विकास मॉडल प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। हिमालय, नदियां, वन संपदा और सांस्कृतिक विरासत उत्तराखंड की पहचान हैं।
विजन 2047 में कृषि, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, उद्योग और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों के लिए लक्ष्य तय किए गए हैं। इसके अलावा वर्ष 2030, 2035, 2040, 2047 और 2050 के लिए अलग-अलग समयसीमा निर्धारित की गई है।
क्या देवभूमि परिवार आईडी से सरकारी काम आसान होंगे?
देवभूमि परिवार पोर्टल से उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं और सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने की उम्मीद है। परिवारों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड बनने से पात्र लाभार्थियों की पहचान और विभागीय समन्वय बेहतर हो सकता है।
वहीं, विकसित उत्तराखंड विजन 2047 राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार, पर्यटन, बुनियादी सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य तय करता है।
अब इन दोनों पहलों की असली सफलता उनके जमीन पर लागू होने, डेटा की सुरक्षा और आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर करेगी।
