बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली छोड़ने की अपील, CM सम्राट ने बताई बड़ी वजह
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बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने राज्य के आर्थिक रूप से संपन्न बिजली उपभोक्ताओं से हर महीने मिलने वाली 125 यूनिट मुफ्त बिजली की सुविधा स्वेच्छा से छोड़ने की अपील की है। CM Samrat Choudhary का कहना है कि सक्षम परिवार बिजली सब्सिडी का लाभ छोड़कर उसके बराबर राशि सरकार को दान कर सकते हैं। इस पैसे का इस्तेमाल बिहार की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। मुख्यमंत्री की इस अपील के बाद बिजली सब्सिडी और सरकारी खर्च को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। सरकार का तर्क है कि आर्थिक रूप से मजबूत परिवार यदि इस सुविधा का लाभ नहीं लेते हैं, तो बचने वाली राशि का इस्तेमाल शिक्षा और विकास से जुड़े कार्यों में किया जा सकता है।
संपन्न परिवारों से मुफ्त बिजली छोड़ने की अपील
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि राज्य में आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को सरकार की ओर से मिलने वाली मुफ्त बिजली की सुविधा छोड़ने के बारे में विचार करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह स्वैच्छिक फैसला होगा। जो उपभोक्ता आर्थिक रूप से मजबूत हैं और उन्हें बिजली सब्सिडी की जरूरत नहीं है, वे इस सुविधा का लाभ छोड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री ने ऐसे लोगों से सब्सिडी के बराबर राशि सरकार को दान करने का भी आग्रह किया है। उनका मानना है कि समाज के सक्षम लोग यदि आगे आकर सरकार का सहयोग करते हैं, तो इससे राज्य के दूसरे जरूरी क्षेत्रों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में खर्च होगी राशि
सम्राट चौधरी ने बिजली सब्सिडी छोड़ने की अपील को सीधे बिहार की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि संपन्न उपभोक्ताओं की ओर से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल शिक्षा के क्षेत्र में किया जा सकता है। बिहार में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था बेहतर बनाना, शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार करना और विद्यार्थियों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराना सरकार के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे में यदि बिजली सब्सिडी के रूप में खर्च होने वाली राशि का कुछ हिस्सा बचता है, तो उसे शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में लगाने का विकल्प मिल सकता है। हालांकि, मुख्यमंत्री की अपील के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि दान की राशि जमा करने के लिए सरकार अलग से कौन-सी व्यवस्था बनाएगी और इसका इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत होगा।
बिहार में करीब 1.92 करोड़ उपभोक्ताओं को मिल रहा लाभ
बिहार सरकार की 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का लाभ बड़ी संख्या में घरेलू उपभोक्ताओं को मिल रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राज्य में करीब 1 करोड़ 92 लाख बिजली उपभोक्ता इस सुविधा से लाभान्वित हो रहे हैं। इस योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य आम परिवारों को बिजली बिल के खर्च से राहत देना है। सरकार इस योजना पर सालाना करीब 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के कारण बिजली सब्सिडी राज्य के बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। मुख्यमंत्री की अपील के पीछे भी यही तर्क है कि जिन परिवारों को आर्थिक रूप से इस सहायता की जरूरत नहीं है, वे स्वेच्छा से इसका लाभ छोड़कर राज्य के विकास में योगदान दे सकते हैं।
यूपी और बिहार की बिजली सब्सिडी में कितना अंतर?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार की बिजली सब्सिडी की तुलना उत्तर प्रदेश से भी की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए दोनों राज्यों के बीच सब्सिडी खर्च का अंतर बताया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की आबादी बिहार की तुलना में लगभग दोगुनी है। इसके बावजूद वहां बिजली सब्सिडी पर करीब 6 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। वहीं, बिहार में इस मद में सालाना लगभग 23 हजार करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई है। इस तुलना के जरिए मुख्यमंत्री ने बिहार में बिजली सब्सिडी पर होने वाले बड़े खर्च की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से सक्षम उपभोक्ताओं को इस सुविधा का लाभ छोड़ने के बारे में सोचना चाहिए। हालांकि, दोनों राज्यों के आंकड़ों की तुलना करते समय बिजली उपभोक्ताओं की संख्या, सब्सिडी की पात्रता, बिजली खपत और सरकारी सहायता की अलग-अलग शर्तों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
क्या सभी उपभोक्ताओं को छोड़नी होगी मुफ्त बिजली?
मुख्यमंत्री की अपील का मतलब यह नहीं है कि बिहार के सभी बिजली उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ना होगा। यह अपील खास तौर पर आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों से की गई है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को इस योजना से मिलने वाली राहत जारी रखने का उद्देश्य बताया गया है। सरकार की ओर से किसी भी उपभोक्ता पर सब्सिडी छोड़ने का दबाव होने की बात सामने नहीं आई है। यानी उपभोक्ता अपनी आर्थिक स्थिति और जरूरत के अनुसार फैसला ले सकते हैं। इसलिए आम बिजली उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने फिलहाल सक्षम लोगों से स्वेच्छा से आगे आने और राज्य के विकास में योगदान देने का आग्रह किया है।
आम बिजली उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर?
125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देना है। खासकर कम बिजली खपत करने वाले परिवारों को इससे बिजली बिल में सीधा फायदा मिलता है। मुख्यमंत्री की नई अपील के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने संपन्न उपभोक्ता स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने के लिए आगे आते हैं। इसके साथ ही सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि सब्सिडी छोड़ने की प्रक्रिया क्या होगी, दान की राशि कैसे जमा होगी और शिक्षा के क्षेत्र में इसका इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी की यह अपील बिजली सब्सिडी के खर्च और शिक्षा पर सरकारी निवेश को लेकर नई चर्चा शुरू करती है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि बिहार के संपन्न बिजली उपभोक्ता मुख्यमंत्री की इस अपील पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।