हैदराबाद में अमित शाह की अगुवाई में BJP का शक्ति प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे हजारों कार्यकर्ता
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तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में सोमवार, 2 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत निकाली गई पदयात्रा का नेतृत्व किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। शहर की सड़कों पर पार्टी के झंडे, बैनर और अमित शाह की तस्वीरें दिखाई दीं।
यह पदयात्रा ऐसे समय आयोजित की गई, जब देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा तथा विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा हुआ है। भाजपा ने इस अभियान को विपक्ष के आरोपों के जवाब के तौर पर शुरू किया है।
अमित शाह की अगुवाई में हैदराबाद में BJP का प्रदर्शन
हैदराबाद में आयोजित इस पदयात्रा में भाजपा के स्थानीय नेताओं के साथ बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पार्टी के झंडे और बैनर लेकर नारे लगाए। कई समर्थक अमित शाह के बड़े पोस्टर और तस्वीरें भी लेकर पहुंचे।
पदयात्रा के रास्ते में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी।
भाजपा ने इस कार्यक्रम के लिए पहले से ही शहर में स्वागत संबंधी बड़े होर्डिंग और प्रचार सामग्री लगाई थी। पार्टी का कार्यक्रम निजाम कॉलेज से नंपल्ली के एमजे मार्केट तक प्रस्तावित मार्ग से जुड़ा था। अमित शाह के दौरे को तेलंगाना में भाजपा संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
SIR विवाद के बीच BJP का राष्ट्रव्यापी अभियान
भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नाम से देशव्यापी अभियान शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। इसी के जवाब में भाजपा विभिन्न राज्यों में कार्यक्रम और पदयात्राएं आयोजित कर रही है।
तेलंगाना में यह कार्यक्रम कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा की राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
वहीं, विपक्षी दल SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और कुछ जगहों पर अनियमितताओं की आशंका है। इन आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है।
राहुल गांधी के बयान के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव
हैदराबाद में भाजपा की पदयात्रा से एक दिन पहले रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन ने बड़ी रैली की थी। इस रैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर तीखा बयान दिया।
राहुल गांधी ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित वोट चोरी और SIR को लेकर भी सवाल उठाए।
इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर अपनी चिंताएं रखीं।
रैली से पहले 31 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग से जुड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं और समर्थकों ने मिंटो रोड-Connaught Place जंक्शन से रामलीला मैदान की ओर मार्च किया।
तेलंगाना की राजनीति में भी अहम माना जा रहा दौरा
अमित शाह की हैदराबाद यात्रा को भाजपा के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है और भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के प्रयास में जुटी है।
इस पदयात्रा के जरिए पार्टी ने SIR विवाद पर विपक्ष को जवाब देने के साथ-साथ अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का संदेश भी दिया। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा का यह अभियान तेलंगाना और अन्य राज्यों में कितना प्रभाव डालता है।
फिलहाल, SIR और चुनाव आयोग को लेकर भाजपा तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। हैदराबाद की पदयात्रा ने इस राजनीतिक बहस को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
