AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन दिल्ली दंगा मामले में दोषी, 12 अन्य आरोपी बरी
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👉 WhatsApp से जुड़ेंदिल्ली के 2020 दंगों से जुड़े एक मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को अदालत ने दोषी करार दिया है। ताहिर हुसैन से जुड़े इस मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में आगजनी और दंगे से संबंधित आरोपों पर फैसला सुनाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने इस मुकदमे में 12 अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। फैसले में ताहिर हुसैन को कुछ आरोपों में दोषी ठहराया गया, जबकि अन्य आरोपों से राहत दी गई।
यह मामला फरवरी 2020 में दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान एक दुकान में कथित लूटपाट और आगजनी से जुड़ा है। अदालत के फैसले का दायरा इसी मुकदमे तक सीमित है। दोषसिद्धि के आधार, लागू धाराओं और आगे की कानूनी प्रक्रिया को समझने के लिए फैसले की विस्तृत प्रति महत्वपूर्ण होगी।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
मामले की सुनवाई कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह की अदालत में हुई। उपलब्ध खबर के मुताबिक, अदालत ने ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने से संबंधित मामले में दोषी पाया, जबकि उनके खिलाफ लगाए गए कुछ अन्य आरोपों से बरी कर दिया।
इसी मुकदमे में मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, मोहम्मद रिहान, अरशद कय्यूम और इरशाद अहमद समेत 12 अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से बरी किया गया।
यह अंतर समझना जरूरी है कि किसी एक मामले में दोषसिद्धि का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी उस मामले से जुड़े हर आरोप में दोषी पाया गया। इसी तरह, अन्य आरोपियों को बरी किए जाने का अर्थ है कि अदालत ने इस मुकदमे में उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं माने।
किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ था मामला?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इनमें दंगा करने, हथियारों के साथ दंगा करने, गैरकानूनी जमावड़े, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आग लगाकर नुकसान पहुंचाने और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं शामिल थीं।
प्रमुख धाराओं का सामान्य अर्थ इस प्रकार है:
धारा 147: दंगा करने से संबंधित अपराध।
धारा 148: घातक हथियार या ऐसी वस्तु के साथ दंगा करना, जिससे गंभीर चोट पहुंच सकती हो।
धारा 149: गैरकानूनी जमावड़े के साझा उद्देश्य से जुड़े अपराधों की जिम्मेदारी।
धारा 427: संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित प्रावधान।
धारा 436: घर या कुछ अन्य संरचनाओं को आग अथवा विस्फोटक से नष्ट करने के अपराध से संबंधित प्रावधान।
धारा 120बी: आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधान।
ध्यान देने वाली बात है कि प्राथमिकी में किसी धारा का शामिल होना अपने आप दोष सिद्ध नहीं करता। अदालत साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर तय करती है कि कौन-सा आरोप साबित हुआ।
शिकायतकर्ता ने दुकान में लूट और आगजनी का क्या आरोप लगाया?
मामले में इरशाद अली नाम के शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 24 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान उनकी दुकान में लूटपाट हुई और आग लगा दी गई। शिकायत के अनुसार, दुकान से करीब 17 से 18 लाख रुपये का सामान चोरी हुआ और आगजनी से लगभग 10 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा।
एक अन्य शिकायतकर्ता मोहम्मद जाहिद ने कथित तौर पर बताया था कि हिंसा के दौरान भीड़ ने ताहिर हुसैन के समर्थन में नारे लगाए। खबर के मुताबिक, जांच के दौरान दो कांस्टेबलों ने भी पहचान संबंधी जानकारी दी थी।
ये शिकायत और जांच से जुड़े आरोप हैं। इन्हें अदालत के अंतिम निष्कर्ष से अलग समझना चाहिए। इस मामले में किस साक्ष्य को कितना महत्व दिया गया, इसकी पूरी जानकारी के लिए विस्तृत न्यायिक आदेश देखना आवश्यक है।
ताहिर हुसैन को पहले भी दूसरे मामले में दोषी ठहराया गया था
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, ताहिर हुसैन को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है। वह मामला इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या से संबंधित था। उस मामले में अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
अंकित शर्मा की हत्या के मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने गंभीर चोटों और कथित हमले से जुड़े तर्क रखे थे। हालांकि, वह अलग मुकदमा है और उसका फैसला वर्तमान आगजनी मामले से अलग कानूनी आधार पर हुआ था।
इसलिए दोनों मामलों के आरोपों, साक्ष्यों और सजा को एक ही फैसला मानकर नहीं देखना चाहिए। किसी व्यक्ति की कानूनी स्थिति का आकलन करते समय प्रत्येक मुकदमे के अलग-अलग आदेश और संबंधित अपीलों की स्थिति देखना जरूरी होता है।
अब आगे क्या होगा?
ताजा फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष फैसले को चुनौती देते हैं या नहीं और अदालत के विस्तृत आदेश में क्या निष्कर्ष दर्ज हैं। दोषसिद्धि के बाद सजा से संबंधित प्रक्रिया तथा संभावित अपील का विवरण आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होगा।
