पूर्वी चंपारण में मिड-डे मील के चावल का मामला, प्रधानाध्यापक सस्पेंड
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बिहार के मोतिहारी में मिड-डे मील के चावल से जुड़ी कथित अनियमितता के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मिड-डे मील के चावल की बिक्री, भंडार में दर्ज मात्रा से अधिक चावल मिलने और विद्यालय में सोने जैसे आरोपों के बाद पूर्वी चंपारण के एक सरकारी स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक सुनील कुमार श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह मामला संग्रामपुर प्रखंड के राजकीय बुनियादी विद्यालय, भवानीपुर से जुड़ा है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, जिला शिक्षा पदाधिकारी की रिपोर्ट और प्रधानाध्यापक से मिले स्पष्टीकरण की समीक्षा के बाद क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक, तिरहुत प्रमंडल ने निलंबन का आदेश जारी किया। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी अंतिम स्थिति विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
किस सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक पर हुई कार्रवाई?
यह मामला पूर्वी चंपारण जिले के संग्रामपुर प्रखंड स्थित राजकीय बुनियादी विद्यालय, भवानीपुर का है। यहां प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात सुनील कुमार श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है।
विभाग के सामने आई रिपोर्ट में मध्याह्न भोजन योजना के चावल के कथित दुरुपयोग समेत कुछ अन्य अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट और संबंधित अधिकारी के स्पष्टीकरण की समीक्षा के बाद विभाग ने अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की।
सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए संचालित होती है। इसलिए इससे जुड़ी सामग्री के भंडारण और वितरण का रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण होता है।
प्रधानाध्यापक पर क्या-क्या आरोप लगे हैं?
उपलब्ध विभागीय जानकारी के अनुसार, सुनील कुमार श्रीवास्तव पर मुख्य रूप से तीन तरह के आरोप लगाए गए हैं।
चावल बेचने का आरोप: मध्याह्न भोजन योजना के लिए रखे चावल को बेचने की कथित शिकायत।
भंडार में अनियमितता: स्कूल के भंडार में चावल की मात्रा का भंडार पंजी में दर्ज विवरण से मेल नहीं खाने का मामला।
विद्यालय में सोने का आरोप: ड्यूटी के दौरान विद्यालय में सोने से संबंधित आरोप।
इन आरोपों के आधार पर विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा और फिर उपलब्ध जवाब की समीक्षा की। अभी इन आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। विभागीय जांच और संबंधित रिकॉर्ड के परीक्षण से ही मामले की पूरी स्थिति सामने आएगी।
7 अक्टूबर की रिपोर्ट से 10 अक्टूबर तक क्या हुआ?
विभागीय आदेश के मुताबिक, जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 7 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी कर प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की थी।
इसके बाद क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय ने सुनील कुमार श्रीवास्तव से 24 घंटे के भीतर साक्ष्य आधारित स्पष्टीकरण मांगा। इसका उद्देश्य संबंधित आरोपों पर उनका पक्ष जानना था।
प्रधानाध्यापक ने 10 अक्टूबर 2026 को अपना स्पष्टीकरण कार्यालय में जमा किया। विभागीय समीक्षा में जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और उनके विरुद्ध आगे की अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
इस घटनाक्रम में स्पष्टीकरण मांगना और उसकी समीक्षा करना विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा था। निलंबन के बाद आरोपों की जांच और अंतिम निर्णय अलग-अलग चरणों में हो सकते हैं।
निलंबन के दौरान कहां रहेगा मुख्यालय?
आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि में सुनील कुमार श्रीवास्तव की मुख्यालय पोस्टिंग प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, कोटवा, पूर्वी चंपारण में निर्धारित की गई है।
विभागीय आदेश में यह भी कहा गया है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। इसका भुगतान अनुपस्थिति विवरणी के आधार पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना, पूर्वी चंपारण करेंगे।
इसके अतिरिक्त, विभाग ने प्रभारी प्रधानाध्यापक के विरुद्ध आरोप पत्र अलग से जारी करने की बात कही है। आरोप पत्र के जरिए संबंधित आरोपों और अनुशासनिक प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया जाएगा।
बच्चों के मिड-डे मील पर क्यों जरूरी है निगरानी?
मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य सरकारी और पात्र विद्यालयों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। इसके लिए खाद्यान्न का सही भंडारण, नियमित रिकॉर्ड और वितरण की निगरानी जरूरी होती है।
यदि चावल की मात्रा और भंडार पंजी में अंतर मिलता है, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जांच करनी चाहिए। रिकॉर्ड का मिलान, स्टॉक की भौतिक जांच और जिम्मेदार कर्मचारियों से जवाब लेना अनियमितता की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करता है।
मोतिहारी का यह मामला सरकारी स्कूलों में खाद्यान्न प्रबंधन और जवाबदेही की अहमियत को सामने लाता है। साथ ही, यह भी जरूरी है कि विभाग आरोपों की निष्पक्ष जांच करे और साक्ष्यों के आधार पर अंतिम निर्णय ले।
अब आगे क्या होगा?
निलंबन के बाद विभागीय अनुशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आरोप पत्र जारी होने और जांच के दौरान संबंधित साक्ष्यों तथा प्रधानाध्यापक के पक्ष पर विचार किया जा सकता है। अंतिम कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और लागू सेवा नियमों के अनुसार तय होगी।
