तरियानी में तालाबों का डीएम ने लिया जायजा, रखरखाव पर सख्त निर्देश
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👉 WhatsApp से जुड़ेंशिवहर में जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत निर्मित तालाबों और पोखरों की स्थिति जांचने के लिए जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी ने तरियानी प्रखंड का स्थल निरीक्षण किया। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत तैयार इन जल संरचनाओं की उपयोगिता, गुणवत्ता और रखरखाव की स्थिति का डीएम ने जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जल संरक्षण की योजनाएं केवल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि उनका वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों और किसानों को मिलना चाहिए।
कई पंचायतों में तालाबों का किया गया स्थल निरीक्षण
जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी ने तरियानी प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में पहुंचकर जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत बनाए गए तालाबों और पोखरों की स्थिति देखी।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन के लिए बनाई गई संरचनाओं की वर्तमान स्थिति, उपयोगिता और निर्माण गुणवत्ता की जानकारी लेना था।
डीएम ने तालाबों में जल संचयन की स्थिति, जलधारण क्षमता, आसपास के क्षेत्र और स्थानीय स्तर पर इनके उपयोग का भी अवलोकन किया।
उन्होंने अधिकारियों से यह जानकारी भी ली कि निर्माण के बाद इन जल संरचनाओं का नियमित रखरखाव किस तरह किया जा रहा है।
जल संरचनाओं का निर्माण क्यों है महत्वपूर्ण?
जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नए जल स्रोत तैयार करने और उपलब्ध जल संसाधनों को बेहतर तरीके से उपयोग में लाने पर जोर दिया जाता है।
इस अभियान के तहत तालाबों और पोखरों की खुदाई जैसे कार्य कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य वर्षा जल को संरक्षित करना, भू-जल का पुनर्भरण बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर जल की उपलब्धता को मजबूत करना है।
जिला पदाधिकारी ने कहा कि किसी तालाब का निर्माण तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह लंबे समय तक जल संचयन और स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी बना रहे।
अठकोनी, छतौनी और नरवारा में योजनाओं की जांच
निरीक्षण के दौरान तरियानी प्रखंड की कई पंचायतों में संचालित तालाब खुदाई योजनाओं को देखा गया।
अठकोनी पंचायत के गरम बराही में योगेंद्र राय की जमीन में कराए गए पोखर खुदाई कार्य का निरीक्षण किया गया।
इसी तरह छतौनी पंचायत के वार्ड संख्या-05 में अरधन्ना देवी की जमीन तथा वार्ड संख्या-14 में ईश्वर दयाल राय की जमीन में कराए गए पोखर खुदाई कार्य की स्थिति भी देखी गई।
नरवारा पंचायत के वार्ड संख्या-01 में इंदु देवी और अवधेश सिंह की जमीन में पोखर खुदाई तथा नरवारा में लोकेश कुमार की जमीन में कराए गए कार्य का भी निरीक्षण किया गया।
पोजहिया पंचायत में भी तालाब योजना का जायजा
जिला पदाधिकारी ने पोजहिया पंचायत के ग्राम पचरा, वार्ड संख्या-11 में प्रकाश कुमार की जमीन में कराए गए पोखर खुदाई कार्य की भी जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान जल संरचनाओं की स्थिति और उनकी उपयोगिता को देखा गया। प्रशासन का जोर इस बात पर रहा कि निर्माण के बाद इन परिसंपत्तियों का सही तरीके से इस्तेमाल और संरक्षण हो।
तालाबों के आसपास की स्थिति और जलधारण क्षमता को बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने पर भी अधिकारियों का ध्यान दिलाया गया।
नियमित भौतिक सत्यापन के निर्देश
डीएम प्रतिभा रानी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत निर्मित सभी जल संरचनाओं का नियमित भौतिक सत्यापन किया जाए।
उन्होंने कहा कि केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर योजनाओं की निगरानी पर्याप्त नहीं है। स्थल पर जाकर यह देखना जरूरी है कि तालाब और पोखर वास्तविक रूप से किस स्थिति में हैं।
उन्होंने योजनाओं से जुड़े अभिलेखों और स्थल की वास्तविक स्थिति में एकरूपता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।
तालाबों के रखरखाव पर विशेष जोर
जिला पदाधिकारी ने जल संरचनाओं की जलधारण क्षमता लंबे समय तक बनाए रखने के लिए रखरखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी किसी तालाब या पोखर में सुधार अथवा रखरखाव की आवश्यकता हो, वहां नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।
डीएम ने यह भी कहा कि जल संरक्षण की संरचनाओं को केवल सरकारी योजना के तहत बनाई गई संपत्ति न माना जाए, बल्कि उन्हें स्थानीय जरूरतों से जोड़कर उपयोगी बनाए रखना जरूरी है।
किसानों और ग्रामीणों को मिले वास्तविक लाभ
जल संरक्षण संरचनाओं का सीधा संबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि से भी है। तालाबों में वर्षा जल का संचयन होने से स्थानीय जल उपलब्धता को सहारा मिल सकता है।
भू-जल पुनर्भरण बढ़ने से आसपास के क्षेत्र में जल संसाधनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। इसके अलावा पशुपालन और अन्य स्थानीय जरूरतों में भी जल स्रोत उपयोगी हो सकते हैं।
डीएम ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि निर्मित जल संरचनाओं का वास्तविक लाभ स्थानीय नागरिकों, किसानों और आसपास के क्षेत्रों को मिले।
आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
जिला पदाधिकारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय लोगों की भागीदारी से तालाबों और अन्य जल स्रोतों का संरक्षण अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
वर्षा जल को संरक्षित करना और भू-जल का पुनर्भरण करना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसलिए जल स्रोतों को सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रशासन करेगा योजनाओं की लगातार निगरानी
शिवहर जिला प्रशासन की ओर से जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत निर्मित और विकसित जल संरचनाओं की निगरानी जारी रखने की बात कही गई है।
प्रशासन का उद्देश्य है कि जल संरक्षण से जुड़ी योजनाएं गुणवत्तापूर्ण, टिकाऊ और जनोपयोगी परिसंपत्तियों के रूप में विकसित हों।
तरियानी प्रखंड में डीएम के निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों को नियमित अनुश्रवण, रखरखाव और आवश्यक सुधार पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है।
एक नजर में प्रमुख बातें
- डीएम प्रतिभा रानी ने तरियानी प्रखंड में तालाबों का निरीक्षण किया।
- निरीक्षण जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत किया गया।
- कई पंचायतों में पोखर खुदाई योजनाओं की स्थिति देखी गई।
- तालाबों की जलधारण क्षमता और उपयोगिता की समीक्षा हुई।
- योजनाओं का नियमित भौतिक सत्यापन करने का निर्देश दिया गया।
- रखरखाव और आवश्यक सुधार पर विशेष जोर दिया गया।
- स्थानीय नागरिकों और किसानों को जल संरचनाओं का वास्तविक लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए।
- जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
