शिवहर की 53 पंचायतों में बाल विवाह के खिलाफ बड़ा संकल्प, ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित
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👉 WhatsApp से जुड़ेंशिवहर में बाल विवाह मुक्त पंचायत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बाल विवाह मुक्त पंचायत अभियान के तहत जिले की सभी 53 पंचायतों में ग्राम सभा का आयोजन कर बाल विवाह के खिलाफ सामुदायिक संकल्प लिया गया।
इस दौरान पंचायत स्तर पर लोगों को बाल विवाह से होने वाले सामाजिक और कानूनी नुकसान की जानकारी दी गई। ग्रामीणों से अपील की गई कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने में प्रशासन और बाल संरक्षण तंत्र का सहयोग करें।
53 पंचायतों में आयोजित हुई ग्राम सभा
महिला एवं बाल विकास निगम, शिवहर के निर्देशानुसार जिले की 53 पंचायतों में बाल विवाह के खिलाफ जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए ग्रामीण स्तर पर सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना था।
इस अभियान का आयोजन बिहार ग्राम विकास परिषद ने सहयोगी संगठन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोग से किया। कार्यक्रम में जिला समन्वयक अनिल कुमार के साथ जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।
ग्राम सभा में लोगों को समझाया गया कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि इससे बच्चों के अधिकार, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य पर भी असर पड़ सकता है।
धनकौल पंचायत में पारित हुआ प्रस्ताव
पिपराही प्रखंड की धनकौल पंचायत में आयोजित ग्राम सभा की अध्यक्षता मुखिया ललिता देवी ने की। इस दौरान बाल विवाह की रोकथाम को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
ग्राम सभा में बाल विवाह से होने वाले सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों पर लोगों का ध्यान दिलाया गया। ग्रामीणों से कहा गया कि किसी भी बच्चे का कम उम्र में विवाह कराने के प्रयास की जानकारी समय रहते संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाए।
इस अवसर पर बाल विवाह मुक्त पंचायत घोषित करने के लिए प्रस्ताव ग्राम सभा में पारित किया गया। प्रस्ताव मुखिया ललिता देवी ने रखा, जिसे उपस्थित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने समर्थन दिया।
धनकौल पंचायत का नाम शिवहर जिला प्रशासन की पंचायत सूची में भी दर्ज है और यह पिपराही प्रखंड की पंचायतों में शामिल है।
बच्चों के अधिकार और बालिकाओं की शिक्षा पर जोर
ग्राम सभा के दौरान बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बालिकाओं की शिक्षा को लेकर विशेष जोर दिया गया। ग्रामीणों से कहा गया कि बेटियों की पढ़ाई बाधित करने वाली परिस्थितियों को रोकने के लिए परिवार और समाज दोनों को जिम्मेदारी निभानी होगी।
बाल विवाह के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित होने के साथ-साथ कम उम्र में विवाह से जुड़ी सामाजिक और कानूनी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत महिला की 18 वर्ष और पुरुष की 21 वर्ष से कम आयु में विवाह को बाल विवाह की श्रेणी में रखा गया है।
इसी वजह से ग्राम स्तर पर जागरूकता को बाल विवाह रोकने की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
सूचना मिलने पर प्रशासन को बताने की अपील
कार्यक्रम में ग्रामीणों से स्पष्ट अपील की गई कि यदि किसी इलाके में बाल विवाह की तैयारी या इसकी सूचना मिलती है तो संबंधित प्रशासन और बाल संरक्षण तंत्र को इसकी जानकारी दी जाए।
अभियान का उद्देश्य केवल ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करना नहीं, बल्कि उसके बाद भी पंचायत स्तर पर लगातार निगरानी और जागरूकता बनाए रखना है।
जनप्रतिनिधियों, वार्ड सदस्यों और ग्रामीणों की भागीदारी को इस अभियान में महत्वपूर्ण बताया गया। पंचायत के स्तर पर सामूहिक प्रयास से बाल विवाह रोकने और बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने पर जोर दिया गया।
BPRO, वार्ड सदस्य और जीविका दीदियों की रही भागीदारी
धनकौल पंचायत में आयोजित कार्यक्रम में BPRO, मुखिया, वार्ड सदस्य, जीविका दीदी, आंगनबाड़ी सेविका, पंच और ग्रामीण मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने बाल विवाह रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने का सामूहिक संकल्प लिया। बालिकाओं की शिक्षा जारी रखने और उनके सुरक्षित भविष्य के लिए सामाजिक स्तर पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई।
शिवहर जिला प्रशासन के अनुसार जिले में कुल 53 ग्राम पंचायतें हैं। ऐसे में सभी पंचायतों में इस तरह की ग्राम सभाओं का आयोजन ग्रामीण स्तर पर अभियान को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बाल विवाह मुक्त शिवहर बनाने की कोशिश
शिवहर में बाल विवाह के खिलाफ अभियान पहले भी जागरूकता, पंचायतों, स्कूलों और ग्रामीण समुदायों की भागीदारी के साथ चलाया जाता रहा है। सितंबर 2026 में भी जिले में घर-घर जागरूकता और बाल विवाह रोकथाम को लेकर अभियान की जानकारी सामने आई थी।
अब 53 पंचायतों में ग्राम सभा के जरिए सामुदायिक संकल्प लेने से अभियान को पंचायत स्तर पर और मजबूत करने का प्रयास किया गया है।
बाल विवाह को रोकने के लिए कानून के साथ-साथ परिवार, पंचायत, स्कूल, आंगनबाड़ी, जीविका समूह और ग्रामीण समुदाय की भूमिका भी अहम है। ग्राम सभा में लिया गया संकल्प तभी प्रभावी होगा, जब लोग किसी भी संभावित बाल विवाह की सूचना समय पर संबंधित तंत्र तक पहुंचाएं और बच्चों की शिक्षा व सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
