समस्तीपुर में 6.86 करोड़ का थाना भवन अटका, छोटे कमरे में चल रहा SC-ST थाना

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समस्तीपुर में 6.86 करोड़ का थाना भवन अटका, छोटे कमरे में चल रहा SC-ST थाना

समस्तीपुर में एससी-एसटी थाना की स्थिति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। जिले का समस्तीपुर SC-ST थाना करीब डेढ़ वर्षों से महज 10×12 फीट के छोटे कमरे में संचालित हो रहा है। नए भवन के लिए 6 करोड़ 86 लाख 74 हजार 900 रुपये की स्वीकृत प्राक्कलित राशि आवंटित होने के बावजूद निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ है। समस्तीपुर SC-ST थाना में जगह की कमी का असर पुलिसकर्मियों के कामकाज और शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादियों की सुविधाओं पर भी पड़ रहा है।

वर्तमान में थाना परिसर के आगंतुक कक्ष में ही थानाध्यक्ष का चेंबर बना दिया गया है। वहीं, बगल के छोटे कमरे में सीसीटीएनएस से संबंधित काम किया जाता है। सीमित जगह के कारण कार्यालय संचालन, अभिलेखों को सुरक्षित रखने और लोगों के बैठने की व्यवस्था में परेशानी होती है।

10×12 फीट के कमरे में चल रहा थाना, कामकाज प्रभावित

एससी-एसटी थाना जैसे संवेदनशील मामलों से जुड़े कार्यालय में पुलिसकर्मियों और फरियादियों के लिए पर्याप्त जगह जरूरी है। लेकिन समस्तीपुर में फिलहाल थाना छोटे से कमरे में चल रहा है।

आगंतुक कक्ष को ही थाना कार्यालय और थानाध्यक्ष के चेंबर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे लोगों के बैठने और पुलिसकर्मियों के नियमित कामकाज के लिए अलग-अलग जगह उपलब्ध नहीं हो पाती।

जरूरी फाइलों और अभिलेखों को व्यवस्थित तरीके से रखने में भी कठिनाई होती है। सीमित स्थान के कारण पुलिसकर्मियों को एक ही जगह पर कई तरह के काम करने पड़ते हैं।

थाने में आने वाले लोगों के लिए भी पर्याप्त प्रतीक्षालय नहीं है। शिकायत दर्ज कराने या किसी मामले में जानकारी लेने पहुंचने वाले लोगों को उपलब्ध जगह के हिसाब से इंतजार करना पड़ता है।

बारिश और तेज धूप में फरियादियों को होती है परेशानी

थाना परिसर में आगंतुकों के बैठने और प्रतीक्षा करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का असर सीधे फरियादियों पर पड़ता है। तेज धूप या बारिश के समय लोगों को खुले आसमान के नीचे इंतजार करना पड़ता है।

ऐसी स्थिति में बुजुर्गों, महिलाओं और अन्य जरूरतमंद लोगों को विशेष परेशानी हो सकती है। थाना आने वाले लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देने के लिए प्रतीक्षालय जैसी बुनियादी सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं।

वर्तमान परिसर में हाजत की व्यवस्था भी नहीं है। किसी मामले में आरोपित की गिरफ्तारी होने पर उसे यहां रखने के बजाय मुफ्फसिल थाना भेजना पड़ता है। इससे पुलिसकर्मियों को आरोपित की सुरक्षा और आवाजाही के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी होती है।

पुराना भवन तोड़ा, लेकिन डेढ़ साल बाद भी नया निर्माण शुरू नहीं

मिली जानकारी के अनुसार, एससी-एसटी थाना के पुराने भवन को हटाकर नए भवन के निर्माण की योजना बनाई गई थी। पुराने भवन को तोड़ दिया गया और उसके अवशेषों की नीलामी भी कर दी गई।

इसके बाद उम्मीद थी कि निर्माण कार्य जल्द शुरू हो जाएगा। लेकिन करीब डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी प्रस्तावित भवन का निर्माण धरातल पर शुरू नहीं हो सका है।

नए भवन के लिए 6 करोड़ 86 लाख 74 हजार 900 रुपये की स्वीकृत प्राक्कलित राशि करीब 10 महीने पहले आवंटित की जा चुकी है। इसके बावजूद निर्माण शुरू नहीं होने से परियोजना की प्रगति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इस भवन के निर्माण की जिम्मेदारी बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के पास है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में निर्माण कार्य शुरू नहीं होने की स्पष्ट वजह और काम शुरू करने की निश्चित तारीख का उल्लेख नहीं है।

जी+3 भवन में एक साथ चलेंगे एससी-एसटी और महिला थाना

प्रस्तावित योजना के अनुसार, समस्तीपुर में काली मंदिर के पीछे जी+3 संरचना वाला भवन बनाया जाना है। जी+3 का मतलब है भूतल के साथ तीन अतिरिक्त मंजिलें।

इस भवन में एससी-एसटी थाना और महिला थाना दोनों संचालित किए जाने की योजना है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दोनों थानों के पास अपना अलग भवन और हाजत नहीं है। नए परिसर से दोनों थानों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

प्रस्तावित भवन में थाना कार्यालय, पूछताछ कक्ष, महिला एवं पीड़ित-अनुकूल काउंसलिंग रूम, अभिलेखागार और अधिकारियों के लिए अलग-अलग कक्ष बनाए जाने की योजना है।

भवन को आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार करने का प्रस्ताव है, ताकि पुलिसकर्मियों को काम करने के लिए बेहतर जगह मिले और शिकायत लेकर आने वाले लोगों को भी सुरक्षित माहौल उपलब्ध हो सके।

योजना के मुताबिक, भवन के एक हिस्से में महिला थाना और दूसरे हिस्से में एससी-एसटी थाना संचालित होगा। परिसर के सामने सुव्यवस्थित बगीचा बनाने का भी प्रस्ताव है।

नए भवन से पीड़ितों को मिल सकती हैं बेहतर सुविधाएं

महिला थाना और एससी-एसटी थाना एक ही परिसर में संचालित होने से दोनों के बीच समन्वय बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, पूछताछ और काउंसलिंग के लिए अलग कमरे होने से शिकायतकर्ताओं को अधिक व्यवस्थित वातावरण मिल सकता है।

हाजत, कार्यालय कक्ष और अभिलेख रखने की उचित व्यवस्था पुलिसकर्मियों के कामकाज को भी आसान बना सकती है। खासकर संवेदनशील मामलों में गोपनीयता, सुरक्षा और सम्मानजनक व्यवहार के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा महत्वपूर्ण होता है।

हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ तभी मिल पाएगा, जब भवन निर्माण पूरा होकर दोनों थानों का संचालन शुरू होगा।

अब निर्माण शुरू होने का इंतजार

समस्तीपुर में एससी-एसटी और महिला थाना के लिए प्रस्तावित भवन पुलिस व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना है। लेकिन स्वीकृत राशि आवंटित होने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं होने से वर्तमान व्यवस्था में सुधार का इंतजार लंबा हो रहा है।

फिलहाल पुलिसकर्मी सीमित जगह में काम कर रहे हैं और फरियादियों को भी पर्याप्त प्रतीक्षालय तथा अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अब निगाहें बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम की ओर हैं कि निर्माण कार्य कब शुरू होता है और दोनों थानों को नए भवन में कब तक स्थानांतरित किया जा सकेगा।

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