पटना के गायघाट पर बड़ा हादसा टला, क्रेन की चपेट से बचीं 5 महिलाएं

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पटना के गायघाट पर बड़ा हादसा टला, क्रेन की चपेट से बचीं 5 महिलाएं

पटना सिटी के गायघाट पर 22 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक बड़ा हादसा टल गया। गंगा घाट पर प्रतिमा विसर्जन के लिए तैनात सिंगला कंपनी का एक क्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दौरान गायघाट क्रेन हादसे में पांच महिलाओं और एक मासूम बच्चे की जान पर खतरा मंडराने लगा, लेकिन मौके पर मौजूद सिविल डिफेंस के वार्डन और वॉलंटियरों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें बचा लिया। गायघाट क्रेन हादसे के दौरान टीम की सतर्कता से एक संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई।

घटना दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन हुई। उस समय घाट पर विसर्जन के लिए लोगों की आवाजाही जारी थी। ऐसे में क्रेन का दुर्घटनाग्रस्त होना वहां मौजूद लोगों के लिए गंभीर खतरा बन गया।

क्रेन दुर्घटना के बीच महिला और बच्चे की जान बची

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुर्घटना की चपेट में आने से बचीं गुड़िया देवी और उनके साथ मौजूद महिलाएं पटना जिले के गौरीचक थाना क्षेत्र के अवस्थीचक गांव की रहने वाली हैं।

घटना के दौरान गुड़िया देवी का करीब साढ़े चार साल का बच्चा शिवांशु उर्फ राजकुमार भी खतरे में आ गया था। बताया गया कि यदि सिविल डिफेंस के वार्डन और वॉलंटियर समय पर सक्रिय नहीं होते, तो बच्चा क्रेन के डंपर की चपेट में आ सकता था।

सिविल डिफेंस कर्मियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पांच महिलाओं और बच्चे को सुरक्षित बचाया। इस घटना में उनकी सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया अहम रही।

बच्चे और अन्य महिलाओं के सुरक्षित बच जाने के बाद गुड़िया देवी ने सिविल डिफेंस के वार्डन और वॉलंटियरों के प्रति आभार जताया। उन्होंने बचाव कार्य में शामिल कर्मियों को धन्यवाद दिया और आशीर्वाद दिया।

विजय कुमार सिंह के नेतृत्व में तैनात थी सिविल डिफेंस टीम

इस बचाव अभियान का नेतृत्व सिविल डिफेंस के ऑफिसर कमांडिंग सह चीफ वार्डेन विजय कुमार सिंह, जिन्हें श्याम नाथ सिंह के नाम से भी संबोधित किया गया है, ने किया।

पटना के जिलाधिकारी सह सिविल डिफेंस नियंत्रक कुंदन कुमार के निर्देश पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान घाटों पर वार्डन और वॉलंटियरों को तैनात किया गया था। उनकी जिम्मेदारी भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और निगरानी के साथ शांति व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन की सहायता करना था।

गायघाट के साथ-साथ पास के भद्र घाट पर भी सिविल डिफेंस के जवानों की तैनाती की गई थी। इन कर्मियों ने विसर्जन कार्यक्रम के दौरान लोगों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी।

इन वार्डन और वॉलंटियरों ने बचाव कार्य में निभाई भूमिका

महिला और बच्चे को सुरक्षित निकालने के अभियान में कई सिविल डिफेंस कर्मी शामिल रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, श्याम नाथ सिंह के अलावा डिप्टी ग्रुप लीडर कुंदन कुमार, राहुल रंजन, मुस्कान कुमारी, रोहन रंजन और अजितेश कुमार सिन्हा ने भी योगदान दिया।

इसके अतिरिक्त सीनियर वार्डन अरुण कुमार, ज्ञानती कुमारी, सिया शरण कुमार और अमन कुमार सहित अन्य कर्मी भी बचाव कार्य में शामिल रहे।

घटना ने धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रशिक्षित बचाव दल और सतर्क सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत को सामने रखा। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने वाले स्थानों पर छोटी-सी चूक भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।

गायघाट और भद्र घाट पर सैकड़ों प्रतिमाओं का विसर्जन

दुर्गा पूजा के बाद पटना और पटना सिटी में स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत कराया जा रहा था। 22 अक्टूबर को कार्यक्रम के दूसरे दिन गायघाट और भद्र घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दोनों घाटों पर सैकड़ों प्रतिमाओं का विसर्जन शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने में सिविल डिफेंस कर्मियों ने सहयोग दिया।

वार्डन और वॉलंटियरों ने भीड़ को नियंत्रित करने, निगरानी रखने और आपात स्थिति में सहायता पहुंचाने का काम किया। उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई।

क्रेन दुर्घटना के बावजूद महिला और बच्चे को सुरक्षित बचा लेना इस तैनाती के दौरान सामने आया महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा। हालांकि, दुर्घटना के कारण और क्रेन को हुए नुकसान के बारे में उपलब्ध जानकारी में विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था क्यों जरूरी?

दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जैसे आयोजनों में एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाटों पर पहुंचते हैं। गंगा किनारे भीड़, भारी वाहनों और क्रेन जैसी मशीनों की आवाजाही के बीच सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है।

ऐसे आयोजनों में प्रशासन, पुलिस और सिविल डिफेंस की संयुक्त तैयारी से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। भारी मशीनों के संचालन के दौरान लोगों की सुरक्षित दूरी, स्पष्ट आवाजाही मार्ग और आपातकालीन बचाव दल की उपलब्धता विशेष महत्व रखती है।

पटना के गायघाट पर हुई इस घटना में सिविल डिफेंस कर्मियों की तत्परता से पांच महिलाओं और एक छोटे बच्चे को सुरक्षित बचाया गया। घटना ने यह भी दिखाया कि भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर निगरानी और त्वरित कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है।

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