समस्तीपुर : जिसकी हत्या में 4 साल से जेल काटते रहे 4 लोग, वही युवक नोएडा में फल बेचता मिला
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बिहार के समस्तीपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समस्तीपुर हत्या मामला उस वक्त अचानक चर्चा में आ गया, जब जिस युवक की हत्या के आरोप में चार लोग करीब चार साल से जेल में बंद हैं, वही युवक नोएडा में जिंदा मिला। समस्तीपुर हत्या मामला अब पुलिस की जांच और कार्रवाई के तरीके को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है।
बताया जा रहा है कि युवक नोएडा में एक फल की दुकान पर काम कर रहा था। पहचान होने के बाद गांव के लोग उसे समस्तीपुर लेकर पहुंचे और पुलिस के हवाले कर दिया। युवक को थाने में देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।
चार साल पहले दर्ज हुआ था हत्या का मामला
यह पूरा मामला रोसड़ा थाना क्षेत्र के लालपुर गांव से जुड़ा है। 1 जुलाई 2022 को मदन यादव ने पुलिस को आवेदन देकर अपने 20 वर्षीय दिव्यांग बेटे रवि शंकर कुमार की हत्या और शव गायब करने का आरोप लगाया था।
शिकायत के मुताबिक, गांव के सहदेव पंडित, मुकेश पंडित और दिनेश पंडित रवि शंकर से जेसीबी-ट्रैक्टर चलवाने के साथ आम के बगीचे में भी काम करवाते थे।
आवेदन में आरोप लगाया गया था कि ट्रैक्टर पलटने के कारण रवि शंकर की मौत हो गई और बाद में उसके शव को गायब कर दिया गया। इस मामले में ट्रैक्टर चालक छोटू महतो को भी आरोपी बनाया गया था।
इसके बाद पुलिस ने सहदेव पंडित, मुकेश पंडित और छोटू महतो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं, दिनेश पंडित ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था।
हत्या का आरोपी युवक नोएडा में फल बेचता मिला
मामले में सबसे बड़ा मोड़ 2 अक्टूबर को सामने आया। लालपुर गांव का आकाश कुमार उस समय नोएडा में मजदूरी कर रहा था। बताया गया कि दोपहर करीब 3 बजे वह सैलून जाने के दौरान एक फल की दुकान के पास पहुंचा।
वहां फल बेच रहे एक युवक को देखकर आकाश को शक हुआ। पहचान करने के बाद उसने दावा किया कि दुकान पर मौजूद युवक वही रवि शंकर कुमार है, जिसकी हत्या के मामले में चार लोग जेल में हैं।
आकाश ने इसकी जानकारी अपने साथियों और पंचायत के मुखिया को दी। इसके बाद गांव के लोगों को पूरे मामले की जानकारी मिली।
खबर फैलते ही कई ग्रामीण नोएडा पहुंचे। वहां मिले युवक को वे अपने साथ समस्तीपुर लेकर आए और रोसड़ा थाना पुलिस को सौंप दिया।
थाने में युवक को देखकर मचा हड़कंप
जैसे ही युवक को रोसड़ा थाना लाया गया, मामले ने नया रूप ले लिया। जिस व्यक्ति को पुलिस रिकॉर्ड में मृत माना जा रहा था, उसके सामने मौजूद होने की खबर तेजी से गांव में फैल गई।
इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण थाने पहुंच गए। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने पर्याप्त सत्यापन और जांच के बिना हत्या का मामला आगे बढ़ाया और चार लोगों को जेल भेज दिया। उनका कहना है कि यदि युवक वास्तव में वही रवि शंकर है, तो मामले की शुरुआती जांच में गंभीर चूक हुई होगी।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले की अंतिम कानूनी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
चार लोगों की चार साल की जेल पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल उन चार लोगों को लेकर उठ रहा है, जो पिछले करीब चार साल से हत्या के मामले में जेल में हैं।
यदि पुलिस और अदालत के रिकॉर्ड में जिस युवक को मृत बताया गया था, उसकी पहचान अब जीवित व्यक्ति के रूप में होती है, तो पूरे केस की जांच और साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा जरूरी हो सकती है।
इसमें यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस ने उस समय शव की बरामदगी और पहचान किस आधार पर की थी। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि मामले में कौन-कौन से साक्ष्य जुटाए गए थे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई किन तथ्यों के आधार पर हुई।
पुलिस की जांच और कार्रवाई पर गंभीर सवाल
इस घटना के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष, जांच अधिकारी यानी IO और संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी पुलिस अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
मामले में यह भी देखा जाना बाकी है कि नोएडा से समस्तीपुर लाए गए युवक की पहचान की आधिकारिक प्रक्रिया कैसे पूरी होती है और पुलिस उसके बयान तथा अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई करती है।
फिलहाल इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यही है कि जिस युवक की हत्या के आरोप में चार लोग वर्षों से जेल में हैं, वही युवक अब जीवित मिलने का दावा किया जा रहा है।
अब आगे क्या होगा?
अब पुलिस के सामने सबसे जरूरी काम युवक की पहचान और पूरे घटनाक्रम की कानूनी जांच करना है। इसके साथ पुराने हत्या केस की फाइल, एफआईआर, जांच रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्य और आरोपियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की भी समीक्षा जरूरी हो सकती है।
अगर युवक की पहचान आधिकारिक तौर पर रवि शंकर कुमार के रूप में स्थापित होती है, तो पुराने मामले की जांच की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।
वहीं, जेल में बंद चारों आरोपियों के मामले में भी आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। किसी भी व्यक्ति को निर्दोष या दोषी घोषित करने का अंतिम अधिकार अदालत के पास है।
