CEC ज्ञानेश कुमार पर आज SC में सुनवाई, SIR से सॉफ्टवेयर तक सवाल

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CEC ज्ञानेश कुमार पर आज SC में सुनवाई, SIR से सॉफ्टवेयर तक सवाल

मुख्य निर्वाचन आयुक्त CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। CEC ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों, चुनाव आयोग के कामकाज और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को लेकर याचिकाओं में कई सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला ऐसे समय पहुंचा है, जब याचिकाकर्ताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े फैसलों और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं पर भी आपत्ति जताई है। हालांकि, इन याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

किन याचिकाओं पर होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई?

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को निलंबित करने और उनके कथित तौर पर अकेले लिए गए फैसलों को रद्द करने की मांग दो अलग-अलग याचिकाओं में की गई है।

इनमें राकेश कुमार सिंह और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिकाएं शामिल हैं। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ करेगी।

राकेश कुमार सिंह की याचिका में मांग की गई है कि अंतिम सुनवाई तक ज्ञानेश कुमार CEC के तौर पर कार्य न करें। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस अवधि में चुनाव आयोग का काम दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत राय से संचालित किया जाए।

वहीं, शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में CEC और कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ आधिकारिक कर्तव्य के कथित उल्लंघन को लेकर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है।

SIR के फैसलों और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

याचिकाओं में मुख्य सवाल यह उठाया गया है कि क्या कुछ महत्वपूर्ण फैसले पूरे चुनाव आयोग की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कुछ अधिकारों का इस्तेमाल व्यक्तिगत रूप से किया गया, जबकि कानून के तहत वे अधिकार पूरे निर्वाचन आयोग से जुड़े हैं।

याचिका में SIR यानी Special Intensive Revision से संबंधित फैसलों, दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि पिछले 10 महीनों में दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी।

हालांकि, चुनाव आयोग का पक्ष अलग है। आयोग ने कहा है कि किसी संस्थान में विचारों और टिप्पणियों में अंतर होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार उसके जारी किए गए आदेश कानूनी रूप से वैध हैं।

फॉर्म-6 और सॉफ्टवेयर बदलाव का क्या है मामला?

याचिका में मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से जुड़े सॉफ्टवेयर बदलावों पर भी सवाल उठाया गया है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि फॉर्म-6 की प्रक्रिया में पूर्वजों से संबंधित जानकारी और पिछले SIR से लिंक जैसी शर्तें सॉफ्टवेयर के माध्यम से जोड़ी गईं। उनका दावा है कि इस तरह के बदलाव करने से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में इन आरोपों पर भी चर्चा होने की संभावना है। अदालत यह देख सकती है कि याचिकाओं में उठाए गए मुद्दे किस हद तक कानूनी सुनवाई के योग्य हैं और संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर क्या स्थिति है।

गोवा के 97 मतदाताओं का भी याचिका में जिक्र

याचिका में गोवा की मतदाता सूची से जुड़ा एक मामला भी उठाया गया है। इसमें 97 पात्र मतदाताओं को बहाल करने के निर्देश के बावजूद सॉफ्टवेयर में उन्हें दोबारा बहाल करने की सुविधा उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने इस स्थिति को लेकर चुनावी प्रक्रिया और तकनीकी व्यवस्था के बीच तालमेल पर सवाल उठाया है।

मामला केवल गोवा तक सीमित नहीं है। याचिका में पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से संबंधित 16.10 लाख से अधिक अपीलों का भी उल्लेख किया गया है।

इन आंकड़ों और मामलों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा निर्णय लेने की व्यवस्था पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।

2023 के कानून की धारा 18 का क्या है महत्व?

शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में 2023 के कानून की धारा 18 का भी हवाला दिया गया है। याचिका के अनुसार, निर्वाचन आयोग के भीतर किसी मुद्दे पर मतभेद होने की स्थिति में बहुमत के आधार पर फैसला लागू किया जाता है।

इसी प्रावधान को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि यदि किसी फैसले में निर्वाचन आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद था, तो निर्णय लेने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में इन कानूनी सवालों पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, केवल याचिका में लगाए गए आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

आज की सुनवाई क्यों है अहम?

यह मामला चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, CEC की भूमिका, निर्वाचन आयुक्तों के बीच अधिकारों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ा है।

SIR और सॉफ्टवेयर बदलावों से जुड़े सवाल सीधे मतदाता सूची की प्रक्रिया से संबंधित हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया पर नजर रखने वाले लोगों की भी निगाहें रहेंगी।

फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि याचिकाओं में लगाए गए आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ही यह पता चलेगा कि अदालत इन दावों को किस नजर से देखती है और आगे क्या दिशा तय करती है।

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