समस्तीपुर में साइबर ठगी का डबल अटैक, महिला और बैंक मैनेजर से लाखों की धोखाधड़ी
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👉 WhatsApp से जुड़ेंसमस्तीपुर में साइबर फ्रॉड के दो अलग-अलग मामलों ने लोगों और बैंकिंग व्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। साइबर फ्रॉड के एक मामले में दलसिंहसराय की महिला के बैंक खाते से यूपीआई के जरिए 3 लाख 99 हजार 597 रुपये निकाल लिए गए, जबकि दूसरे मामले में ठगों ने ग्राहक बनकर बैंक मैनेजर से 14.94 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए।
दोनों मामलों में संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस अब लेन-देन, मोबाइल नंबर, बैंक खातों और आरोपियों से जुड़े अन्य डिजिटल सुरागों की जांच कर रही है।
सिम बंद हुआ और खाते से निकल गए 3.99 लाख
पहला मामला दलसिंहसराय थाना क्षेत्र के मनोहर टोला से जुड़ा है। यहां रहने वाली कल्पना सिन्हा के मोबाइल का सिम 19 से 23 सितंबर के बीच बंद रहा।
इसी अवधि के आसपास उनके बैंक ऑफ इंडिया खाते से 20 से 24 सितंबर के बीच यूपीआई के माध्यम से कुल 3,99,597 रुपये की निकासी हुई।
जब खाते से पैसे निकलने की जानकारी मिली तो पीड़िता ने साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद साइबर थाने में आवेदन देकर राशि वापस कराने की मांग की गई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
बैंक मैनेजर को ग्राहक बनकर भेजे फर्जी ट्रांजेक्शन इंस्ट्रक्शन
दूसरा मामला मथुरापुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। हरपुर एलौथ स्थित बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजर अनिल कुमार सिन्हा से साइबर ठगों ने ग्राहक की पहचान का इस्तेमाल करके 14.94 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
शिकायत के अनुसार, 22 सितंबर को मैनेजर के मोबाइल पर ग्राहक विकास अरोड़ा के नाम से फोन आया। कॉल करने वाले ने व्हाट्सऐप के जरिए ट्रांजेक्शन इंस्ट्रक्शन भेजने की बात कही।
इसके बाद व्हाट्सऐप पर ऐसे वाउचर भेजे गए, जिन पर ग्राहक के हस्ताक्षर हूबहू मिलते दिखाई दिए। हस्ताक्षर का मिलान करने के बाद मैनेजर ने दोनों लेन-देन कर दिए।
दो खातों में भेजी गई 14.94 लाख की रकम
शिकायत के मुताबिक, पहला ट्रांजेक्शन 4.95 लाख रुपये का था, जिसे बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में भेजा गया।
दूसरा ट्रांजेक्शन 9.99 लाख रुपये का था, जिसे फेडरल बैंक के खाते में ट्रांसफर किया गया। इस तरह कुल 14.94 लाख रुपये अलग-अलग खातों में चले गए।
कुछ समय बाद वास्तविक ग्राहक ने बैंक मैनेजर से संपर्क किया और किसी भी ट्रांजेक्शन से इनकार कर दिया। इसके बाद मैनेजर को समझ आया कि फर्जी निर्देश देकर रकम ट्रांसफर कराई गई है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने साइबर थाने में आवेदन दिया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दोनों घटनाओं में सामने आया अलग तरीका
इन दोनों मामलों में साइबर ठगी का तरीका अलग-अलग दिखाई देता है।
पहले मामले में पीड़िता के मोबाइल सिम के बंद रहने की अवधि के दौरान यूपीआई से खाते से रकम निकली। पुलिस जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सिम बंद होने और बैंक खाते से निकासी के बीच क्या संबंध था।
दूसरे मामले में ठगों ने ग्राहक की पहचान का इस्तेमाल किया और व्हाट्सऐप के माध्यम से फर्जी ट्रांजेक्शन वाउचर भेजे। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, दस्तावेज पर ग्राहक के हस्ताक्षर भी वास्तविक हस्ताक्षर से मेल खाते दिखाई दिए।
पुलिस खंगाल रही बैंक और डिजिटल रिकॉर्ड
दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ रही है। जांच में बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी, संबंधित खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल संचार के रिकॉर्ड को देखा जा सकता है।
पहले मामले में पुलिस के लिए यह पता करना महत्वपूर्ण होगा कि सिम बंद रहने के दौरान खाते से यूपीआई लेन-देन किस माध्यम से हुआ।
दूसरे मामले में अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई रकम की कड़ी की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि रकम जिन खातों में गई, वे किन लोगों के नाम पर हैं और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ।
साइबर ठगी के बाद 1930 पर तुरंत करें शिकायत
भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करना भी महत्वपूर्ण है।
समस्तीपुर के इन मामलों से यह भी सामने आता है कि साइबर ठग अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर बैंक खातों तक पहुंच बनाने या बैंकिंग प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
किसी अनजान व्यक्ति के फोन, व्हाट्सऐप मैसेज, फर्जी दस्तावेज या संदिग्ध ट्रांजेक्शन निर्देश पर भरोसा करने से पहले संबंधित ग्राहक या बैंकिंग रिकॉर्ड से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना जरूरी है।
फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस की जांच जारी है। आरोपियों की पहचान और रकम की बरामदगी को लेकर आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
