समस्तीपुर में 55 घंटे बाद अधिवक्ता का अनशन खत्म, जानिए पूरा मामला
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समस्तीपुर के विभूतिपुर में अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे अधिवक्ता रंजीत कुमार ने 55 घंटे बाद बुधवार को अनशन समाप्त कर दिया। समस्तीपुर अधिवक्ता अनशन का मामला उस समय समाप्त हुआ, जब एसडीएम पूजा कुमारी ने उनकी शिकायत के संबंध में एसपी को पत्र भेजकर अवगत कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद एसडीएम ने अधिवक्ता को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।
अधिवक्ता रंजीत कुमार व्यवहार न्यायालय रोसड़ा में वकालत करते हैं। वह विभूतिपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित गांधी-अंबेडकर प्रतिमा के समीप अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे थे। उन्होंने विभूतिपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा और अन्य पुलिस अधिकारियों पर रंजिश के कारण झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
एसडीएम के आश्वासन के बाद खत्म हुआ अनशन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता रंजीत कुमार ने अपनी शिकायतों को लेकर एसडीएम पूजा कुमारी को आवेदन दिया था। वह मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए आमरण अनशन पर बैठ गए थे।
करीब 55 घंटे तक चले अनशन के बाद बुधवार को प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने पर उन्होंने इसे समाप्त करने का फैसला किया। एसडीएम ने कहा कि वह मामले से एसपी को पत्र के माध्यम से अवगत कराएंगी।
इसके बाद उन्होंने अनशन पर बैठे अधिवक्ता को जूस पिलाया। इस तरह फिलहाल अनशन समाप्त हो गया, लेकिन अधिवक्ता की ओर से उठाए गए सवालों और उनकी शिकायतों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
अधिवक्ता ने पुलिस अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
विभूतिपुर थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या 5 के निवासी रंजीत कुमार ने थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा और अन्य पुलिस अधिकारियों पर व्यक्तिगत रंजिश के कारण उन्हें मुकदमों में फंसाने का आरोप लगाया है।
अधिवक्ता ने अपने आवेदन में विभूतिपुर थाना में दर्ज दो मामलों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि परिवाद पत्र दाखिल करने और न्यायालय के आदेश के बाद उनके खिलाफ रंजिश के तहत मुकदमे दर्ज किए गए।
उन्होंने दोनों मामलों की जांच और पर्यवेक्षण की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। अधिवक्ता का आरोप है कि उनके पक्ष में मौजूद साक्ष्यों को नजरअंदाज किया गया और मामलों का गलत पर्यवेक्षण किया गया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र जांच रिपोर्ट या संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल इन दावों को अधिवक्ता की शिकायत के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
CID जांच और संपत्ति की जांच की भी मांग
अधिवक्ता रंजीत कुमार ने अपने आवेदन में कई मांगें रखी हैं। वह चाहते हैं कि दोनों मुकदमों की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) से कराई जाए, ताकि मामलों के तथ्यों और साक्ष्यों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल हो सके।
इसके अलावा उन्होंने विभूतिपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा तथा उनके परिवार और संबंधियों की संपत्ति की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग भी की है।
ये मांगें अधिवक्ता की ओर से उठाई गई हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में यह पुष्टि नहीं है कि सीआईडी या ईडी ने इन मामलों में जांच शुरू कर दी है अथवा संबंधित एजेंसियों को जांच का औपचारिक आदेश दिया गया है।
अब इस मामले में आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और शिकायत पर होने वाली कार्रवाई अहम होगी। एसडीएम के आश्वासन के बाद अधिवक्ता ने अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन उनकी सभी मांगों पर निर्णय होने की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
अब आगे क्या हो सकता है?
एसडीएम पूजा कुमारी के आश्वासन के अनुसार, मामले की जानकारी एसपी को पत्र के जरिए दी जाएगी। इसके बाद शिकायत पर पुलिस प्रशासन का रुख और संभावित कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
मामले में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी होगा कि अधिवक्ता की शिकायतों, दोनों मुकदमों से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की नियमानुसार समीक्षा की जाए। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित नियमों के तहत कदम उठाए जा सकते हैं।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि अधिवक्ता के आरोप साबित हो गए हैं या किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई तय हो गई है। अनशन समाप्त होना प्रशासनिक आश्वासन के बाद उठाया गया कदम है; शिकायतों पर अंतिम स्थिति आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगी।
समस्तीपुर के इस मामले में क्यों है आगे की कार्रवाई अहम?
यह मामला शिकायत निवारण, पुलिस जांच की निष्पक्षता और प्रशासन की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। जब कोई व्यक्ति न्यायिक या प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है, तो शिकायत की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना जरूरी होता है।
55 घंटे के अनशन के बाद अधिवक्ता रंजीत कुमार ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि एसपी को भेजे जाने वाले पत्र के बाद मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और अधिवक्ता की मांगों पर प्रशासन क्या निर्णय लेता है।
