पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को जल्द मिलेगी कैबिनेट मंजूरी, बिहार में बिछेगा सड़कों का जाल
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बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को लेकर बड़ी घोषणा हुई है। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को केंद्रीय कैबिनेट से जल्द मंजूरी मिलने की बात केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कही है। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे करीब 245 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होगा। गडकरी के मुताबिक, इसके निर्माण पर लगभग 32 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह पूरी तरह नई सड़क होगी और इसके लिए केंद्र से वित्तीय मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। यह घोषणा 1 अक्टूबर 2026 को पटना में आयोजित Rising Bihar Investor Summit 2026 के दौरान हुई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह और पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र मौजूद रहे।
245 किलोमीटर लंबा होगा पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे
प्रस्तावित पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को बिहार के लिए महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इसका उद्देश्य पटना और सीमांचल क्षेत्र के बीच तेज सड़क संपर्क विकसित करना है। उपलब्ध सरकारी PPPAC रिकॉर्ड में पटना-पुर्णिया 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को NH(O) के तहत Hybrid Annuity Mode में दर्ज किया गया है। मार्च 2026 की PPPAC सूची में इसकी परियोजना लागत 16,782.77 करोड़ रुपये दर्ज है। वहीं, गडकरी ने 1 अक्टूबर के कार्यक्रम में पूरे निर्माण के लिए करीब 32 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े का उल्लेख किया। दोनों आंकड़े परियोजना के अलग-अलग लागत चरणों या आकलन से जुड़े हो सकते हैं। परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण और सर्वे की प्रक्रिया पर भी पहले से काम चलने की जानकारी सामने आती रही है। जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्णिया क्षेत्र में मौजा-वार सर्वे और भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी।
बिहार में 3 लाख करोड़ से ज्यादा के सड़क प्रोजेक्ट
गडकरी ने कहा कि आने वाले समय में केंद्र सरकार बिहार में हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की योजना पर काम कर रही है। 1 अक्टूबर को सामने आए आंकड़ों के अनुसार, बिहार में प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं का निवेश करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताया गया। इसके अलावा करीब 1,878 किलोमीटर लंबी परियोजनाओं पर लगभग 65,100 करोड़ रुपये का काम चल रहा है। इसका असर राज्य के अलग-अलग हिस्सों की कनेक्टिविटी पर पड़ सकता है। खासकर औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि बाजारों और प्रमुख शहरों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने से माल और यात्री परिवहन के लिए नए विकल्प विकसित होंगे। केंद्र सरकार के अनुसार बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जुड़ी कई परियोजनाओं की नियमित समीक्षा भी की जा रही है।
रामजानकी पथ से रक्सौल-हल्दिया तक कई बड़े प्रोजेक्ट
बिहार में सिर्फ पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि कई अन्य बड़े सड़क प्रोजेक्ट भी निर्माण या तैयारी के अलग-अलग चरणों में हैं। गडकरी ने रामजानकी पथ का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि करीब 440 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट का निर्माण तेजी से चल रहा है और इसके नवंबर 2028 तक पूरा होने की बात कही गई। इसी तरह रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे भी बिहार के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। गडकरी के कार्यक्रम में इसकी लागत करीब 45,190 करोड़ रुपये बताई गई और बिहार में इसके बड़े हिस्से के निर्माण की जानकारी दी गई। परियोजना से रक्सौल और पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत करने का लक्ष्य है। इसके अलावा वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण भी जारी है। बिहार में चल रही सड़क परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे सहित कई अन्य कॉरिडोर पर अधिकारियों के साथ चर्चा हुई।
2014 के मुकाबले बढ़ा राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क
गडकरी ने बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार का आंकड़ा भी साझा किया। उनके अनुसार 2014 में राज्य में नेशनल हाईवे की लंबाई करीब 4,615 किलोमीटर थी, जो अब लगभग 6,500 किलोमीटर तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार ने भी पिछले वर्षों में बिहार में सड़क बुनियादी ढांचे के विस्तार को रेखांकित किया है। आधिकारिक आंकड़ों में राज्य में चार लेन या उससे अधिक क्षमता वाली सड़कों के निर्माण में वृद्धि का उल्लेख किया गया है। सड़क नेटवर्क के विस्तार से सिर्फ यात्रा आसान होने की उम्मीद नहीं है, बल्कि लॉजिस्टिक्स, माल ढुलाई और औद्योगिक निवेश के लिए भी बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकती है।
E20 पेट्रोल विवाद पर भी बोले नितिन गडकरी
कार्यक्रम के दौरान E20 पेट्रोल को लेकर चल रही चर्चा पर भी गडकरी ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर बड़ी संख्या में चार पहिया और दो पहिया वाहन चल रहे हैं। गडकरी ने दावा किया कि इस वजह से वाहन क्षति की शिकायत को लेकर कोई भी व्यक्ति सामने आकर शिकायत कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों ने 100 प्रतिशत इथेनॉल पर वाहनों के संचालन को लेकर परीक्षण किए हैं। E20 को लेकर वाहन तकनीक, ईंधन दक्षता और उपभोक्ता हितों पर अलग-अलग चर्चाएं होती रही हैं। इसलिए इस मुद्दे पर गडकरी के बयान को उनके कार्यक्रम में दिए गए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बिहार की सड़क कनेक्टिविटी में क्या बदलेगा?
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे और दूसरे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पूरे होने पर बिहार के कई हिस्सों के बीच तेज सड़क संपर्क का नया नेटवर्क तैयार हो सकता है। पटना से पूर्णिया तक सीधा और तेज कॉरिडोर बनने से लंबी दूरी के यातायात के लिए मौजूदा मार्गों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं रक्सौल-हल्दिया और वाराणसी-कोलकाता जैसे कॉरिडोर राज्य को दूसरे राज्यों और व्यापारिक केंद्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि किसी भी बड़े एक्सप्रेसवे की वास्तविक उपयोगिता उसके अंतिम अलाइनमेंट, भूमि अधिग्रहण, निर्माण की गति, इंटरचेंज और पूरा होने के बाद यातायात व्यवस्था पर निर्भर करेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई गई है। मंजूरी के बाद परियोजना के निर्माण कार्यक्रम और आगे की आधिकारिक प्रक्रिया को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।