पटना में किसान महापंचायत, 17 सूत्री मांगों पर आंदोलन का ऐलान

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पटना में किसान महापंचायत के दौरान किसानों की समस्याओं को लेकर 17 सूत्री मांगें उठाई गईं। किसान महापंचायत का आयोजन किसान संघर्ष समिति के बैनर तले आईएमए हॉल में किया गया, जहां किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य, कर्जमाफी, खाद-बीज की उपलब्धता और जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दे उठाए।

कार्यक्रम से पहले गांधी मैदान स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके बाद किसानों और किसान संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने महापंचायत में अपनी समस्याएं रखीं।

किसानों ने 17 सूत्री मांगों पर की चर्चा

किसान महापंचायत में किसानों की ओर से अलग-अलग समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें कृषि लागत, फसल के उचित मूल्य, सिंचाई, खाद-बीज और किसानों की जमीन से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।

महापंचायत में शामिल प्रतिनिधियों ने कहा कि किसानों की समस्याओं को संबंधित स्तर तक पहुंचाने के लिए मांगों को एक साथ रखा गया है। आयोजन में महिला किसानों की भी भागीदारी रही।

किसानों ने जमीन से जुड़े मामलों में उनकी सहमति को महत्वपूर्ण बताते हुए अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे को लेकर भी सवाल उठाए। वहीं राजस्व विभाग से जुड़े कामकाज में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया गया।

एमएसपी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों पर जोर

महापंचायत में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को लेकर किसानों की मांग प्रमुख रही। आयोजकों ने कृषि उपज के लिए लागत के आधार पर अधिक लाभकारी मूल्य की व्यवस्था की मांग रखी।

कार्यक्रम में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने पर भी जोर दिया गया। एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय किसान आयोग ने 2004 से 2006 के बीच अपनी रिपोर्टें सरकार को सौंपी थीं। आयोग की सिफारिशों में किसानों की आय, कृषि लागत और फसल के लाभकारी मूल्य से जुड़े कई विषय शामिल थे।

एमएसपी और लागत से जुड़े फॉर्मूले को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक और किसान संगठनों के स्तर पर बहस होती रही है। इसलिए महापंचायत में इस मुद्दे को फिर प्रमुखता से उठाया गया।

खाद, बीज और सिंचाई सस्ती करने की मांग

किसानों ने खेती में इस्तेमाल होने वाले खाद, बीज और सिंचाई की लागत को कम करने की मांग की। उनका कहना है कि कृषि लागत बढ़ने का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है।

महापंचायत में किसानों के विभिन्न प्रकार के कर्ज माफ करने की मांग भी रखी गई। इसके साथ ही कृषि उत्पादन की लागत के मुकाबले अनाज का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने की बात कही गई।

आयोजन में किसानों से जुड़े स्थानीय प्रशासनिक कामकाज का मुद्दा भी उठा। राजस्व कर्मचारी और अंचलाधिकारी के स्तर पर कथित भ्रष्टाचार की शिकायतों को लेकर कार्रवाई की मांग की गई।

जमीन अधिग्रहण और मुआवजे का मुद्दा भी उठा

महापंचायत में किसानों की जमीन से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। किसानों की ओर से कहा गया कि जमीन अधिग्रहण उनकी सहमति और उचित प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।

अधिग्रहित जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे को लेकर भी मांग रखी गई। आयोजकों ने किसानों के जमीन संबंधी अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए इसे आंदोलन के प्रमुख विषयों में शामिल किया।

कार्यक्रम में सैटेलाइट योजना का विरोध करने की बात भी सामने आई। किसानों ने जमीन और कृषि से जुड़ी योजनाओं में उनकी भागीदारी तथा सहमति को महत्व देने की मांग की।

किसान नेताओं और प्रतिनिधियों ने लिया संघर्ष का संकल्प

कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष मंजय कुमार ने की। किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता किरण देव यादव ने मंच संचालन और विषय प्रवेश कराया।

महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े जवाहर निराला, अशोक प्रसाद सिंह, राम विनय सिंह, अपर्णा देवी, सिद्धनाथ कुमार, आरती सिंह, सुरेश प्रसाद, जयराम सिंह, वाल्मीकि राय समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बिंदेश्वरी सिंह, सुशांत कुमार, चिंटू कुमार, विनय, नवल किशोर, सतीश प्रसाद, जर्मन यादव, विजय सिंह, अरुण सिंह, सरजू प्रसाद सिंह, राजीव कुमार, तपेश्वर प्रसाद सिंह, उदय कुमार, रामचंद्र सिंह और आशुतोष सहित कई किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं।

गांधी, शास्त्री और भगत सिंह के नारों का संकल्प

महापंचायत में किसानों ने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रमुख नारों का उल्लेख करते हुए उन्हें बुलंद करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में लाल बहादुर शास्त्री के “जय जवान, जय किसान”, महात्मा गांधी के “करो या मरो” और भगत सिंह से जुड़े “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारों का उल्लेख किया गया।

आयोजकों ने इन नारों को किसानों के संघर्ष और अधिकारों की आवाज से जोड़ते हुए आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कही।

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा मांग पत्र

किसान संघर्ष समिति की ओर से कहा गया कि महापंचायत में उठाई गई मांगों को मांग पत्र के रूप में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री तक भेजा जाएगा।

मांग पत्र में एमएसपी, कर्जमाफी, सस्ती कृषि सामग्री, सिंचाई, जमीन अधिग्रहण, मुआवजा और राजस्व व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल किए जाने की बात कही गई।

आयोजकों ने इन मुद्दों को लेकर किसान आंदोलन तेज करने का ऐलान भी किया। हालांकि आगे आंदोलन का स्वरूप और कार्यक्रम क्या होगा, इसकी विस्तृत जानकारी आयोजकों की ओर से अलग से दी जा सकती है।

कार्यक्रम में नवीन कुमार ने स्वागत भाषण दिया, जबकि सिद्धनाथ कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। अंत में शामिल किसानों का माला पहनाकर अभिनंदन किया गया। 

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