मोतिहारी में वैष्णो देवी मंदिर जैसा पंडाल, 40 लाख की तैयारी
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मोतिहारी में वैष्णो देवी मंदिर जैसा पंडाल इस बार दुर्गा पूजा का बड़ा आकर्षण बनने जा रहा है। वैष्णो देवी मंदिर जैसा पंडाल पूर्वी चंपारण के पिपरा कोठी में करीब 35 से 40 लाख रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। मोतिहारी मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर दूर बन रहे इस पंडाल की चौड़ाई करीब 110 फीट और ऊंचाई लगभग 80 फीट रखी जा रही है।
पूजा समिति का कहना है कि पंडाल पूरा होने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को माता वैष्णो देवी के दरबार जैसा धार्मिक वातावरण देने की कोशिश की जाएगी। विशाल ढांचे के साथ इसकी सजावट और डिजाइन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर तैयार हो रहा पंडाल
पिपरा कोठी में इस वर्ष दुर्गा पूजा के लिए अलग धार्मिक थीम चुनी गई है। पंडाल की बाहरी बनावट और संरचना को माता वैष्णो देवी के मंदिर से प्रेरित स्वरूप देने की तैयारी है।
पंडाल की ऊंचाई करीब 80 फीट और चौड़ाई लगभग 110 फीट होगी। इतने बड़े ढांचे को तैयार करने के लिए कारीगर लगातार निर्माण कार्य में जुटे हैं।
समिति की योजना पंडाल को ऐसा स्वरूप देने की है, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के साथ एक अलग दृश्य और धार्मिक अनुभव मिल सके।
35 से 40 लाख रुपये का अनुमानित बजट
पंडाल निर्माण पर करीब 35 से 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। बड़े आकार और विशेष डिजाइन के कारण निर्माण में काफी मेहनत और समय लग रहा है।
पंडाल को अंतिम रूप देने से पहले इसकी संरचना, नाप-जोख और डिजाइन के अलग-अलग हिस्सों पर काम किया जा रहा है। निर्माण के दौरान छोटे से छोटे विवरण को भी थीम के अनुरूप रखने की कोशिश की जा रही है।
पिपरा कोठी में आकार ले रहे इस पंडाल को देखने के लिए आसपास के इलाकों के लोगों में अभी से उत्सुकता दिखाई दे रही है।
पश्चिम बंगाल के 14 कारीगर संभाल रहे जिम्मेदारी
पंडाल निर्माण की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल से आए अनुभवी कारीगरों की टीम को दी गई है। कलकत्ता के श्यामल सरकार उर्फ बिट्टू दादा के नेतृत्व में करीब 14 कारीगर लगातार काम कर रहे हैं।
कारीगर पंडाल के ढांचे से लेकर लकड़ी के काम और बारीक सजावट तक अलग-अलग हिस्सों पर काम कर रहे हैं। इतने बड़े ढांचे को धार्मिक मंदिर के स्वरूप में ढालना उनके लिए चुनौतीपूर्ण काम है।
कारीगरों के अनुसार, पंडाल की वास्तविक भव्यता निर्माण पूरा होने और सजावट के बाद सामने आएगी।
डिजाइन और नाप-जोख पर विशेष ध्यान
वैष्णो देवी मंदिर से प्रेरित पंडाल तैयार करने में डिजाइन सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कारीगरों को ढांचे की ऊंचाई, चौड़ाई और अलग-अलग हिस्सों के अनुपात का ध्यान रखना पड़ रहा है।
110 फीट चौड़े और 80 फीट ऊंचे ढांचे को स्थिर और आकर्षक स्वरूप देना भी निर्माण टीम के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।
पूजा समिति की ओर से निर्माण कार्य की निगरानी की जा रही है, ताकि पंडाल को तय समय पर श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया जा सके।
समिति ने बताया क्यों चुनी गई यह थीम?
पूजा समिति के सचिव धर्मेंद्र कुमार गुप्ता के अनुसार, इस वर्ष श्रद्धालुओं को कुछ अलग अनुभव देने के उद्देश्य से वैष्णो माता मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार करने का निर्णय लिया गया।
उनके मुताबिक, समिति चाहती है कि पंडाल सिर्फ पूजा-अर्चना का स्थान न रहे, बल्कि लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बने।
दुर्गा पूजा के दौरान अलग-अलग धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की थीम पर पंडाल तैयार करने की परंपरा बिहार सहित कई राज्यों में देखने को मिलती है। पिपरा कोठी की यह थीम भी इसी तरह श्रद्धालुओं का ध्यान खींचने की तैयारी में है।
रोशनी और सजावट बढ़ाएगी पंडाल की खूबसूरती
निर्माण पूरा होने के बाद पंडाल की सजावट और रोशनी इसकी खूबसूरती को और बढ़ाएगी। खासकर शाम के समय रोशनी के बीच मंदिरनुमा संरचना श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
समिति की ओर से पंडाल परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने की भी तैयारी है। आयोजन के दौरान भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए व्यवस्था को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जा रहा है।
स्थानीय लोगों में बढ़ी उत्सुकता
जैसे-जैसे पंडाल का ढांचा तैयार हो रहा है, स्थानीय लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ती जा रही है। आसपास से गुजरने वाले लोग निर्माण स्थल पर रुककर इसकी तैयारियों को देख रहे हैं।
लोगों की नजर अब इस बात पर है कि करीब 80 फीट ऊंचा यह पंडाल तैयार होने के बाद कैसा दिखाई देगा। 35 से 40 लाख रुपये के अनुमानित बजट और विशेष धार्मिक थीम ने इसकी चर्चा और बढ़ा दी है।
आस्था के साथ दिखेगी कारीगरी
पिपरा कोठी का यह पंडाल धार्मिक आस्था के साथ कारीगरों की कला और मेहनत को भी सामने लाने वाला है। पश्चिम बंगाल से आए कारीगर पारंपरिक तकनीक और आधुनिक डिजाइन के जरिए विशाल ढांचे को आकार दे रहे हैं।
एक तरफ यहां मां दुर्गा की पूजा होगी, तो दूसरी तरफ पंडाल की संरचना श्रद्धालुओं को वैष्णो माता मंदिर की याद दिलाने की कोशिश करेगी।
पंडाल की खास बातें
स्थान: पिपरा कोठी, पूर्वी चंपारण
थीम: वैष्णो देवी मंदिर से प्रेरित
अनुमानित लागत: 35–40 लाख रुपये
ऊंचाई: करीब 80 फीट
चौड़ाई: करीब 110 फीट
कारीगर: पश्चिम बंगाल से आए करीब 14 कारीगर
टीम का नेतृत्व: श्यामल सरकार उर्फ बिट्टू दादा
आयोजन: दुर्गा पूजा
पूजा समिति सचिव: धर्मेंद्र कुमार गुप्ता
फिलहाल पिपरा कोठी में पंडाल निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। अब निर्माण पूरा होने के बाद इसकी सजावट, रोशनी और अंतिम स्वरूप ही तय करेगा कि यह पंडाल श्रद्धालुओं के बीच कितना बड़ा आकर्षण बनता है।
