लौरिया CHC से रेफर जुड़वां नवजातों को निजी क्लीनिक ले जाने का आरोप
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार के पश्चिम चंपारण जिले के लौरिया में जुड़वां नवजातों को सरकारी अस्पताल से रेफर करने के बाद कथित तौर पर निजी क्लीनिक ले जाने का मामला सामने आया है। लौरिया CHC से रेफर किए गए दोनों नवजातों को लेकर शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग में मामला उठाया गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रौशन कुमार ने सिविल सर्जन, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और थानाध्यक्ष को आवेदन देकर जांच तथा कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मामले की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज भी सौंपा है। पुलिस का कहना है कि शिकायत की जांच की जा रही है।
7 अक्टूबर को जुड़वां बच्चों का हुआ था जन्म
शिकायत के मुताबिक, मटियरिया गांव की रहने वाली रूपा कुमारी ने 7 अक्टूबर को लौरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के बाद दोनों नवजातों का वजन कम होने की बात सामने आई।
बताया गया है कि बच्चों की स्थिति को देखते हुए चिकित्सक ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए बेतिया स्थित जीएमसीएच रेफर किया था। कम वजन वाले नवजातों को जरूरत के अनुसार विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता हो सकती है, इसलिए रेफर करने का उद्देश्य उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराना बताया गया।
हालांकि, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल से रेफर होने के दौरान दोनों बच्चों को निर्धारित अस्पताल ले जाने के बजाय निजी क्लीनिक पहुंचा दिया गया। इस मामले में निजी क्लीनिक से जुड़े दो कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
निजी क्लीनिक के दो कर्मचारियों पर क्या है आरोप?
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की ओर से दिए गए आवेदन के अनुसार, निजी क्लीनिक के दो कर्मचारी प्रसूता और उनके परिजनों को नवजात बच्चों के साथ अपने क्लीनिक ले गए।
इस घटनाक्रम को लेकर अस्पताल प्रशासन ने आपत्ति जताई है। शिकायत में संबंधित लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
फिलहाल, यह आरोप जांच के दायरे में है। उपलब्ध जानकारी में संबंधित निजी क्लीनिक का नाम, दोनों कर्मचारियों की पहचान और बच्चों को वहां ले जाने की पूरी परिस्थितियों का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
मामले की गंभीरता इस वजह से भी बढ़ जाती है कि दोनों बच्चे कम वजन के कारण उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किए गए थे। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उन्हें कहां ले जाया गया, किस उद्देश्य से ले जाया गया और रेफर किए गए अस्पताल तक पहुंचाने की प्रक्रिया में क्या हुआ।
जांच के लिए सौंपे गए CCTV फुटेज
डॉ. रौशन कुमार ने मामले की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की बात कही है। उन्होंने सिविल सर्जन, BDO और थानाध्यक्ष को आवेदन देकर संबंधित लोगों की पहचान करने तथा नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
सीसीटीवी फुटेज जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों की गतिविधियों और संबंधित समय की घटनाओं के बारे में जानकारी मिल सकती है। हालांकि, फुटेज में क्या दर्ज है और उससे आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
अस्पताल प्रभारी का कहना है कि निजी क्लीनिक संचालकों को पहले भी चेतावनी दी गई थी। उनके इस बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर निजी क्लीनिकों की गतिविधियों और रेफर किए गए मरीजों से जुड़े मामलों की निगरानी पर भी सवाल उठते हैं।
फिर भी, पहले चेतावनी दिए जाने और मौजूदा मामले के बीच क्या संबंध है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।
थानाध्यक्ष बोले- शिकायत की जांच जारी
लौरिया के थानाध्यक्ष इंद्रजीत पासवान ने बताया कि इस मामले में शिकायत मिली है और जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की जांच में शिकायत, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के बयान अहम हो सकते हैं। जांच के दौरान यह पता लगाना होगा कि नवजातों को निजी क्लीनिक ले जाने की घटना किस परिस्थिति में हुई और क्या इसमें किसी नियम या कानून का उल्लंघन हुआ।
मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी के खिलाफ आरोप साबित होने की बात नहीं कही जा सकती।
नवजातों के इलाज और रेफरल प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर किए जाने वाले मरीजों की आगे की व्यवस्था पर ध्यान खींचा है। खासकर नवजात बच्चों के मामले में समय पर उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचना महत्वपूर्ण होता है।
अस्पताल से रेफर किए जाने पर परिजनों को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि मरीज को किस अस्पताल में ले जाना है और वहां किस तरह की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। किसी निजी संस्थान की ओर से मरीज को ले जाने की स्थिति में भी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और परिजनों को पूरी जानकारी मिलनी चाहिए।
इस मामले में जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दोनों नवजातों को रेफर किए गए अस्पताल तक ले जाने के दौरान क्या हुआ और निजी क्लीनिक के कर्मचारियों की भूमिका क्या थी।
