कटिहार में वेटिकन सिटी जैसा दुर्गा पंडाल, मुस्लिम अध्यक्ष की पहल चर्चा में
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बिहार के कटिहार में इस बार दुर्गा पूजा का एक ऐसा आयोजन चर्चा में है, जिसमें भव्य सजावट के साथ सामाजिक एकता का संदेश भी दिखाई देता है। शहर के जूट मिल क्षेत्र स्थित एलडब्ल्यूसी दुर्गा पूजा समिति ने वेटिकन सिटी थीम वाला दुर्गा पूजा पंडाल तैयार कराया है। करीब 20 लाख रुपये की लागत से बने इस पंडाल को देखने के लिए श्रद्धालुओं में उत्सुकता है। इसकी खास बात यह भी है कि समिति की अध्यक्षता मुस्लिम समुदाय से आने वाले कटिहार नगर निगम के उपमहापौर मंजूर खान कर रहे हैं।
समिति से जुड़े लोगों के अनुसार, हिंदू-मुस्लिम सहित विभिन्न सामाजिक वर्गों के सदस्य मिलकर पूजा की तैयारियों में योगदान देते हैं। पंडाल की भव्यता के साथ यहां की सामूहिक भागीदारी भी लोगों का ध्यान खींच रही है।
वेटिकन सिटी की स्थापत्य शैली से प्रेरित पंडाल
कटिहार के जूट मिल क्षेत्र में बने इस पंडाल को इटली के प्रसिद्ध वेटिकन सिटी की स्थापत्य शैली से प्रेरित होकर तैयार किया गया है। इसकी सजावट और बनावट को आकर्षक रूप देने के लिए कारीगरों ने लंबे समय तक मेहनत की।
समिति के मुताबिक, पंडाल के निर्माण पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इसे तैयार करने में करीब डेढ़ से दो महीने का समय लगा। पश्चिम बंगाल के नदिया क्षेत्र समेत अन्य जगहों से आए कारीगरों ने स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर निर्माण कार्य पूरा किया।
हर साल दुर्गा पूजा में अलग-अलग थीम पर पंडाल तैयार करने की परंपरा के कारण श्रद्धालुओं को कुछ नया देखने का अवसर मिलता है। इस बार वेटिकन सिटी से प्रेरित सजावट आयोजन का प्रमुख आकर्षण बनी हुई है।
मुस्लिम अध्यक्ष मंजूर खान के नेतृत्व में आयोजन
इस दुर्गा पूजा समिति की अध्यक्षता कटिहार नगर निगम के उपमहापौर मंजूर खान कर रहे हैं। वह मुस्लिम समुदाय से आते हैं। समिति में अलग-अलग जातियों और सामाजिक वर्गों के लोग विभिन्न जिम्मेदारियां संभालते हैं।
आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार, यहां पूजा की तैयारियों को किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रखा जाता। कोई पंडाल निर्माण में सहयोग करता है, कोई मेले की व्यवस्था संभालता है, तो कोई दूसरी जिम्मेदारी निभाता है।
समिति की यह कार्यशैली धार्मिक आयोजनों में सामूहिक भागीदारी और आपसी सहयोग की तस्वीर पेश करती है। स्थानीय स्तर पर ऐसे आयोजन लोगों को एक-दूसरे के करीब आने और मिलकर काम करने का अवसर देते हैं।
23 वर्षों से जारी है दुर्गा पूजा की परंपरा
एलडब्ल्यूसी का पूरा नाम लेबर वेलफेयर सेंटर बताया गया है। कटिहार के जूट मिल क्षेत्र में यह केंद्र लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। पहले यहां मजदूरों के लिए गीत-संगीत और बच्चों के लिए खेलकूद जैसी गतिविधियां आयोजित की जाती थीं।
समिति के अनुसार, यहां पिछले 23 वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है। हर साल नई थीम के साथ पंडाल तैयार करने का प्रयास किया जाता है, ताकि श्रद्धालुओं को अलग तरह की सजावट देखने को मिले।
समय के साथ यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक गतिविधियों का हिस्सा बन गया है। पूजा और मेले की तैयारियों में स्थानीय लोगों की भागीदारी इसकी निरंतरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
गुलदस्ते की तरह है समिति की एकजुटता
समिति के अध्यक्ष मंजूर खान ने सदस्यों की एकजुटता को फूलों के गुलदस्ते से जोड़कर समझाया। उनके अनुसार, गुलदस्ते में अलग-अलग फूल अपनी पहचान बनाए रखते हैं, लेकिन एक साथ मिलकर उसकी सुंदरता बढ़ाते हैं। इसी तरह अलग-अलग जातियों और समुदायों के लोग मिलकर समिति को मजबूत बनाते हैं।
यह विचार आयोजन की उस विशेषता को सामने लाता है, जिसमें लोगों की अलग-अलग पहचान के बावजूद साझा जिम्मेदारी को महत्व दिया जाता है। पूजा की व्यवस्था से लेकर मेले के प्रबंधन तक, सदस्यों का सहयोग आयोजन को आगे बढ़ाता है।
दुर्गा पूजा जैसे सार्वजनिक आयोजनों में लोगों की भागीदारी केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहती। इससे स्थानीय स्तर पर मेल-जोल, सहयोग और सांस्कृतिक सहभागिता को भी बढ़ावा मिल सकता है।
सचिव संजय कुमार महतो ने बताई आयोजन की खासियत
समिति के सचिव और नगर निगम पार्षद संजय कुमार महतो के मुताबिक, पंडाल को तैयार करने में बंगाल और स्थानीय कारीगरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आयोजन को जूट मिल क्षेत्र के लोगों की सामूहिक भागीदारी का उदाहरण बताया।
समिति में कोषाध्यक्ष परशुराम सिंह समेत अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के सदस्य जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। सभी का प्रयास है कि पूजा और मेले की व्यवस्थाएं मिलकर पूरी की जाएं।
समिति ने लोगों से एलडब्ल्यूसी क्लब पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन करने और मेले का आनंद लेने की अपील भी की है। पंडाल की सजावट, निर्माण में लगी मेहनत और आयोजन की लंबी परंपरा इसे इस वर्ष के प्रमुख आकर्षणों में शामिल कर रही है।
कटिहार के दुर्गा पूजा पंडाल से क्या मिलता है संदेश?
कटिहार का यह आयोजन दो वजहों से ध्यान आकर्षित करता है। पहली, वेटिकन सिटी की स्थापत्य शैली से प्रेरित पंडाल और उस पर किया गया खर्च। दूसरी, विभिन्न समुदायों के लोगों का एक साथ मिलकर पूजा की तैयारियों में भाग लेना।
करीब 20 लाख रुपये की लागत, डेढ़ से दो महीने की मेहनत और 23 वर्षों की परंपरा इस आयोजन की अहम विशेषताएं हैं। वहीं, मंजूर खान की अध्यक्षता और समिति के सदस्यों की सामूहिक भागीदारी सामाजिक सहयोग को सामने लाती है।
इस आयोजन का संदेश है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आपसी सम्मान और साझा जिम्मेदारी लोगों को साथ काम करने का अवसर देती है। कटिहार का एलडब्ल्यूसी दुर्गा पूजा पंडाल इसी सहभागिता और उत्सव की भावना के कारण चर्चा में है।
