बिहार की गाद नीति बनी चर्चा का विषय, गडकरी बोले- देश के लिए मॉडल

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बिहार की गाद नीति को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ी बात कही है। बिहार की गाद नीति के तहत नदी से निकली गाद यानी सिल्ट और मिट्टी के उपयोग को सड़क निर्माण समेत दूसरे विकास कार्यों में बढ़ावा देने की योजना है। गडकरी ने इसे पूरे देश के लिए मॉडल बनने की संभावना वाली नीति बताया। यह बात बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग और एनएचएआई की परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान सामने आई।

क्या है बिहार की गाद नीति?

बिहार में नदियों से निकलने वाली गाद और मिट्टी के बेहतर उपयोग को लेकर नीति तैयार की गई है। इसका उद्देश्य ऐसे प्राकृतिक संसाधनों को केवल हटाने के बजाय विकास कार्यों में उपयोग करना है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट 2026 में बताया था कि राज्य ने निकाली गई गाद और मिट्टी को सड़क निर्माण तथा अन्य परियोजनाओं में इस्तेमाल करने के लिए साइल्ट पॉलिसी तैयार की है।

नितिन गडकरी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बिहार का यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। इससे सड़क निर्माण में उपलब्ध स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ सकता है।

हालांकि, इस नीति का वास्तविक प्रभाव इसके तकनीकी मानकों, सामग्री की गुणवत्ता और अलग-अलग परियोजनाओं में व्यावहारिक उपयोग पर निर्भर करेगा।

गडकरी ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर दिया जोर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नितिन गडकरी ने 1 अक्टूबर को पटना में बिहार की राष्ट्रीय राजमार्ग और एनएचएआई परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

बैठक में गडकरी ने अधिकारियों को परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करने की बात कही।

परियोजनाओं की निगरानी में एआई तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई। निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

इसका मतलब यह है कि सड़क निर्माण में नई सामग्री या स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल के साथ गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना भी प्राथमिकता में रहेगा।

बिहार की किन बड़ी सड़क परियोजनाओं पर हुई चर्चा?

समीक्षा बैठक में बिहार की कई महत्वपूर्ण सड़क और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई।

इनमें पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे, मुजफ्फरपुर-बरौनी फोरलेनिंग, डुमरिया घाट पुल, दरभंगा-सुपौल हाईवे और खगड़िया-पूर्णिया सड़क परियोजना शामिल हैं।

इसके अलावा मुजफ्फरपुर-सोनबरसा, एनएच-22, एनएच-31 के अनीसाबाद-दीदारगंज हिस्से में सर्विस रोड के साथ छह लेन एलिवेटेड रोड, दानापुर-बिहटा कॉरिडोर और पटना रिंग रोड पर भी चर्चा हुई।

वाराणसी-रांची-कोलकाता हाईवे और अन्य महत्वपूर्ण कॉरिडोर की प्रगति भी समीक्षा के एजेंडे में रही।

NH-139 और NH-333 के लिए DPR का निर्देश

बैठक में सड़क संपर्क को और मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण हिस्सों को लेकर भी निर्देश दिए गए।

औरंगाबाद और अंबा बाईपास के साथ एनएच-139 को फोरलेन करने के लिए डीपीआर तैयार करने को कहा गया। इसके अलावा एनएच-333 के बरियारपुर-गंगटा-जमुई हिस्से को फोरलेन करने के लिए भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया।

डीपीआर यानी Detailed Project Report में परियोजना की तकनीकी, आर्थिक और निर्माण संबंधी विस्तृत जानकारी तैयार की जाती है। इसके आधार पर आगे की प्रक्रिया को गति दी जाती है।

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे से लेकर रक्सौल-हल्दिया तक फोकस

बिहार के सड़क ढांचे को लेकर गडकरी ने राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट 2026 में भी कई महत्वपूर्ण बातें रखीं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बिहार की सड़क परियोजनाओं में केंद्र सरकार की ओर से बड़े स्तर पर निवेश होगा। वहीं रामजानकी पथ और रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं को भी राज्य के भविष्य के कनेक्टिविटी नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, 440 किलोमीटर लंबे रामजानकी पथ का निर्माण चल रहा है और इसके नवंबर 2028 तक पूरा होने का लक्ष्य बताया गया है। रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे भी बिहार के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है।

अलग-अलग परियोजनाओं की लागत और समयसीमा परियोजना की स्वीकृति तथा आधिकारिक प्रगति के अनुसार बदल सकती है।

मुख्यमंत्री ने सड़क नेटवर्क को लेकर क्या कहा?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि निर्माणाधीन और स्वीकृत परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कनेक्टिविटी और आवागमन बेहतर होगा।

उन्होंने सड़क नेटवर्क को व्यापार, पर्यटन, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ते हुए कहा कि आधुनिक और सुरक्षित सड़क ढांचे से बिहार में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।

बिहार सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की सड़क परियोजनाओं को तेजी से पूरा कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नितिन गडकरी के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है गाद नीति?

बिहार में बड़ी संख्या में नदियां हैं और नदी से निकलने वाली गाद का प्रबंधन लंबे समय से एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। यदि तकनीकी मानकों के अनुरूप गाद और मिट्टी का उपयोग निर्माण कार्यों में किया जाता है, तो उपलब्ध सामग्री के उपयोग का एक नया रास्ता खुल सकता है।

गडकरी की टिप्पणी के बाद बिहार की यह नीति राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आई है। हालांकि, इसे बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले सामग्री की गुणवत्ता, पर्यावरणीय प्रभाव, परिवहन लागत और निर्माण मानकों जैसे पहलुओं का आकलन जरूरी होगा।

फिलहाल बिहार सरकार की गाद नीति को सड़क निर्माण में स्थानीय संसाधनों के उपयोग की दिशा में एक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इसका वास्तविक असर आने वाली परियोजनाओं में इसके इस्तेमाल और परिणामों से स्पष्ट होगा।

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