भीम अखाड़ा दंगल में जूही का दबदबा, लगातार पांचवीं बार बनीं चैंपियन
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बिहार के समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर स्थित ऐतिहासिक दैंता पोखर भीम अखाड़ा में आयोजित दंगल प्रतियोगिता में बेगूसराय की जूही ने एक बार फिर अपना दम दिखाया। भीम अखाड़ा दंगल के महिला वर्ग के फाइनल में जूही ने सोनीपत की ज्योति को हराकर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने लगातार पांचवें वर्ष चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। दो दिवसीय प्रतियोगिता का समापन रविवार को फाइनल मुकाबलों के साथ हुआ, जिसमें महिला और पुरुष पहलवानों ने अपने दांव-पेच दिखाए। मुकाबले देखने के लिए बड़ी संख्या में कुश्ती प्रेमी जुटे।
महिला फाइनल में जूही ने ज्योति को दी शिकस्त
विभूतिपुर प्रखंड के कल्याणपुर स्थित भीम अखाड़ा परिसर में सर्व कल्याणी मां दुर्गा पूजा के अवसर पर दो दिवसीय दंगल का आयोजन किया गया था। प्रतियोगिता के अंतिम दिन महिला वर्ग का फाइनल सबसे प्रमुख मुकाबलों में शामिल रहा।
इस मुकाबले में बेगूसराय की जूही और सोनीपत की ज्योति आमने-सामने थीं। दोनों पहलवानों ने जीत के लिए पूरा दम लगाया, लेकिन अंत में जूही ने ज्योति को पराजित कर महिला वर्ग का खिताब जीत लिया।
ज्योति को उपविजेता घोषित किया गया। वहीं, जूही की लगातार पांचवीं जीत ने इस प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन को खास बना दिया। लगातार पांच वर्षों तक खिताब जीतना उनकी निरंतरता और कुश्ती के प्रति मेहनत को दर्शाता है।
पुरुष वर्ग में आंचल और धर्मेंद्र संयुक्त विजेता
दंगल के पुरुष वर्ग में भी कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। आयोजकों ने गाजीपुर के आंचल और सोनभद्र के धर्मेंद्र को संयुक्त विजेता घोषित किया।
प्रतियोगिता में अलग-अलग स्थानों से आए पहलवानों ने हिस्सा लिया। कुल 37 जोड़ी महिला और पुरुष पहलवानों ने अखाड़े में अपने दांव-पेच आजमाए। मुकाबलों के दौरान पहलवानों की ताकत, तकनीक और संतुलन देखने के लिए दर्शक देर शाम तक परिसर में मौजूद रहे।
अंतिम मुकाबले को लेकर दर्शकों में खास उत्साह देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, दो पुरुष पहलवानों के बीच मुकाबला देखने के दौरान भीड़ बेकाबू होने लगी। स्थिति को देखते हुए मेला कमेटी ने दोनों पहलवानों को संयुक्त विजेता घोषित कर दिया।
दिनेश पहलवान की जीत, करण को आशीष ने हराया
प्रतियोगिता में अन्य पहलवानों के मुकाबले भी चर्चा में रहे। विभूतिपुर के भीम अखाड़ा में लगातार चार वर्षों से विजेता रहे बगहा के दिनेश पहलवान ने इस बार भी अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने देवरिया के संदेश को हराया।
वहीं, नंदीनगर के करण को आशीष ने शिकस्त दी। छपरा के मंटू पहलवान ने पश्चिम बंगाल के धमाका को पराजित किया। इन मुकाबलों ने प्रतियोगिता को और रोमांचक बनाया।
अलग-अलग क्षेत्रों से आए पहलवानों की भागीदारी ने दंगल को व्यापक स्वरूप दिया। स्थानीय दर्शकों के साथ कुश्ती प्रेमियों ने भी मुकाबलों का आनंद लिया। अखाड़ा परिसर में देर शाम तक उत्साह का माहौल बना रहा।
मां दुर्गा पूजा के अवसर पर हुआ आयोजन
भीम अखाड़ा परिसर में यह प्रतियोगिता सर्व कल्याणी मां दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित की गई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में दंगल जैसे आयोजन धार्मिक उत्सवों के साथ खेल और पारंपरिक संस्कृति को भी आगे बढ़ाते हैं।
कुश्ती भारतीय पारंपरिक खेलों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय पहलवानों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलता है। साथ ही, युवा खिलाड़ियों को खेल के प्रति प्रेरणा मिलती है और दर्शकों को अपनी पारंपरिक खेल संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।
इस प्रतियोगिता में महिला पहलवानों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। जूही की लगातार पांचवीं जीत ने महिला कुश्ती को लेकर दर्शकों की रुचि को और बढ़ाया।
निर्णायक मंडली और आयोजन समिति के सदस्य रहे मौजूद
दंगल के मुकाबलों के संचालन में कमलकांत पहलवान और रामप्रीत पहलवान निर्णायक मंडली में शामिल रहे। वहीं, अमर चौधरी ने दर्शकों को मुकाबलों का आंखों देखा हाल सुनाया।
कार्यक्रम के दौरान कमेटी के अध्यक्ष रामनाथ राय, सचिव सतीश झा, महासचिव ललन सिंह और कोषाध्यक्ष रंजीत राय मौजूद रहे। पूजा समिति के अध्यक्ष रामप्रवेश राय, भाजपा नेता अरविंद कुमार कुशवाहा और मिथिला मिल्क यूनियन के अध्यक्ष उमेश राय सहित कमेटी के अन्य सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
आयोजकों और सदस्यों की मौजूदगी में प्रतियोगिता का समापन हुआ। दंगल के दौरान पहलवानों के प्रदर्शन और दर्शकों के उत्साह ने पूरे अखाड़ा परिसर को जीवंत बनाए रखा।
जूही की लगातार पांचवीं जीत बनी आकर्षण का केंद्र
भीम अखाड़ा दंगल के इस संस्करण में महिला वर्ग का खिताब जूही के नाम रहा। सोनीपत की ज्योति को हराकर उन्होंने लगातार पांचवें वर्ष जीत दर्ज की, जबकि पुरुष वर्ग में आंचल और धर्मेंद्र संयुक्त विजेता बने।
कुल 37 जोड़ी पहलवानों की भागीदारी और विभिन्न क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों के मुकाबलों ने आयोजन को खास बनाया। स्थानीय स्तर पर ऐसे दंगल खेल प्रतिभाओं को मंच देने के साथ पारंपरिक कुश्ती की लोकप्रियता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
