अनंत-नीरज विवाद में ललन सिंह की एंट्री, बोले- क्रिया होगी तो प्रतिक्रिया होगी
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में विधान परिषद चुनाव से पहले अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहा विवाद अब जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंच गया है। अनंत सिंह और नीरज कुमार के विवाद को शांत कराने के लिए केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने अनंत सिंह से बातचीत की। बातचीत के बाद ललन सिंह ने कहा कि अनंत सिंह अब नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक बयान नहीं देंगे, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि विवाद की पृष्ठभूमि में दोनों तरफ से घटनाक्रम रहा है।
ललन सिंह ने इसी संदर्भ में कहा, “क्रिया होगी तो प्रतिक्रिया भी होगी, ताली एक हाथ से नहीं बजती।” उनके बयान के बाद जेडीयू के अंदर चल रहे इस विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।
अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
पूरा मामला बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट से जुड़ा है। जेडीयू ने इस सीट से नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसी बीच मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ अपना रुख जाहिर किया था।
रिपोर्टों के अनुसार, अनंत सिंह ने नीरज कुमार के बजाय दूसरे उम्मीदवार का समर्थन किया था। इससे जेडीयू के भीतर राजनीतिक असहजता बढ़ी और वरिष्ठ नेताओं को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।
विवाद केवल मौजूदा एमएलसी चुनाव तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। ललन सिंह ने बातचीत के दौरान अनंत सिंह की पुरानी शिकायतों का भी जिक्र किया।
ललन सिंह ने अनंत सिंह से क्या कहा?
ललन सिंह के मुताबिक, उन्होंने अनंत सिंह से बातचीत की और उनकी शिकायतें सुनीं। इसके बाद उनसे कहा गया कि वह नीरज कुमार या पार्टी से जुड़े मुद्दे पर सार्वजनिक बयानबाजी न करें।
अनंत सिंह इस बात पर सहमत हो गए हैं। इसका मतलब यह है कि फिलहाल दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक टकराव को रोकने की कोशिश हुई है। हालांकि, इसे पूरी तरह राजनीतिक सुलह कहना जल्दबाजी होगी।
सबसे अहम बात यह है कि अनंत सिंह ने नीरज कुमार के लिए समर्थन देने पर सहमति नहीं जताई है। ललन सिंह ने कहा कि वह नीरज कुमार का समर्थन नहीं करेंगे, लेकिन उनके खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयान भी नहीं देंगे।
‘क्रिया होगी तो प्रतिक्रिया भी होगी’ पर क्या बोले ललन सिंह?
ललन सिंह ने मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह की शिकायतों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर किसी तरफ से कोई कार्रवाई या प्रतिक्रिया हुई है, तो उसका जवाब भी सामने आ सकता है।
उन्होंने कहा कि जब अनंत सिंह के खिलाफ चुनाव के दौरान प्रचार या विरोध की स्थिति बनी थी, तब पार्टी स्तर पर समय रहते पहल होनी चाहिए थी। उनके अनुसार, उस समय प्रदेश स्तर पर चूक हुई।
ललन सिंह ने यह भी बताया कि अनंत सिंह का कहना है कि उनके खिलाफ प्रचार के दौरान पार्टी ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। हालांकि, इन आरोपों को ललन सिंह ने अनंत सिंह की ओर से रखी गई शिकायत के तौर पर बताया है, न कि अपने स्वतंत्र आरोप के रूप में।
नीतीश कुमार भी पहुंचे थे ललन सिंह के घर
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार ने 5 अक्टूबर को ललन सिंह से मुलाकात की।
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब जेडीयू के भीतर अनंत सिंह के रुख और नीरज कुमार की उम्मीदवारी को लेकर चर्चा चल रही थी।
इसके बाद ललन सिंह ने अनंत सिंह से बातचीत की और विवाद को सार्वजनिक बयानबाजी से आगे नहीं बढ़ाने की कोशिश की।
क्या अनंत सिंह नीरज कुमार का समर्थन करेंगे?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल यही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अनंत सिंह नीरज कुमार के समर्थन में वोट मांगने के लिए तैयार नहीं हुए हैं।
हालांकि, उन्होंने नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक बयान नहीं देने पर सहमति जताई है। यानी पार्टी के अंदर मतभेद पूरी तरह समाप्त होने के बजाय फिलहाल सार्वजनिक टकराव को रोकने का रास्ता अपनाया गया है।
यह स्थिति पटना स्नातक सीट के आगामी चुनावी समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अनंत सिंह का राजनीतिक प्रभाव मुख्य रूप से मोकामा क्षेत्र से जुड़ा रहा है।
जेडीयू के लिए क्यों अहम है यह विवाद?
विधान परिषद चुनाव के दौरान किसी भी बड़े नेता का सार्वजनिक रूप से पार्टी प्रत्याशी से अलग रुख अपनाना संगठन के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है। यही वजह है कि विवाद को बातचीत के जरिए नियंत्रित करने की कोशिश हुई।
ललन सिंह के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर पुराने मतभेद और चुनावी घटनाक्रम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
फिलहाल तस्वीर यह है कि अनंत सिंह नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक बयान नहीं देंगे, लेकिन उनके समर्थन का सवाल अलग बना हुआ है। वहीं, ललन सिंह ने विवाद की वजहों को लेकर पार्टी स्तर पर हुई चूक का भी उल्लेख किया है।
आगे क्या होगा?
अब नजर पटना स्नातक सीट के चुनावी घटनाक्रम पर रहेगी। नीरज कुमार जेडीयू के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं, जबकि अनंत सिंह का रुख इस चुनाव में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ललन सिंह की बातचीत के बाद सार्वजनिक बयानबाजी पर विराम लगाने की कोशिश जरूर हुई है, लेकिन दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद पूरी तरह खत्म हुए हैं या नहीं, यह आने वाले चुनावी घटनाक्रम से स्पष्ट होगा।
फिलहाल जेडीयू के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि विवाद सड़क या सार्वजनिक मंचों के बजाय बातचीत के जरिए नियंत्रित रहे और पार्टी उम्मीदवार के चुनाव अभियान पर इसका कितना असर पड़ता है, यह आगे देखने वाली बात होगी।
