‘एक हैं तो सेफ हैं’ पर घमासान, उपेंद्र कुशवाहा के बयान से गरमाई सियासत
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
पटना में आयोजित ‘लव कुश सम्मान समारोह’ के दौरान उपेंद्र कुशवाहा के ‘एक हैं तो सेफ हैं’ वाले बयान के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई। उपेंद्र कुशवाहा ने समाज में एकजुटता की अपील करते हुए कहा कि आपस में मतभेद होने पर बातचीत से समाधान निकालना चाहिए। उनके बयान पर NDA नेताओं ने गठबंधन की एकता पर जोर दिया, जबकि RJD और कांग्रेस नेताओं ने इसे लेकर अलग-अलग सवाल उठाए।
कार्यक्रम पटना के बापू सभागार में आयोजित किया गया था। इसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और RLM के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा समेत कई नेता मौजूद रहे।
क्या बोले उपेंद्र कुशवाहा?
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि समाज के लोगों को एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने ‘एक हैं तो सेफ हैं’ और ‘बटिएगा तो कटिएगा’ जैसे नारों का इस्तेमाल करते हुए एकता का संदेश दिया।
कुशवाहा ने कहा कि कुछ लोग समाज के लोगों को आपस में लड़ाने की कोशिश करते हैं। उनके मुताबिक ऐसी परिस्थितियों से बचना चाहिए और किसी भी तरह की समस्या या मतभेद होने पर बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
उन्होंने अपने बयान को सकारात्मक संदर्भ में लेते हुए कहा कि लोगों को मजबूती के साथ एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आज की पीढ़ी 12वीं नहीं, बल्कि 21वीं सदी की है और उसे परिस्थितियों को समझकर आगे बढ़ना चाहिए।
NDA नेताओं ने क्या कहा?
कुशवाहा के बयान के बाद NDA नेताओं ने गठबंधन में एकजुटता का दावा किया। बीजेपी नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि NDA के घटक दल एक साथ हैं और विपक्ष की ओर से गठबंधन में फूट की बात करना वास्तविकता से अलग है।
उन्होंने कहा कि NDA मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में विकसित और समृद्ध बिहार के लक्ष्य पर काम कर रहा है। मृत्युंजय तिवारी ने विपक्षी दलों पर भी राजनीतिक टिप्पणी की और महागठबंधन की स्थिति को लेकर सवाल उठाए।
हालांकि ये टिप्पणियां संबंधित नेताओं के राजनीतिक बयान हैं। गठबंधन की आंतरिक स्थिति को लेकर अलग-अलग दलों की अपनी राजनीतिक व्याख्याएं हैं।
JDU ने भी एकता पर दिया जोर
JDU प्रवक्ता पूजा पैट्रिक ने भी NDA की एकजुटता को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बिहार के मतदाताओं के सामने गठबंधन की एकता दिखाई दी थी।
पूजा पैट्रिक ने कहा कि NDA के घटक दल साथ हैं और उनकी एकता को कोई आसानी से नहीं तोड़ सकता। उन्होंने गठबंधन के सहयोगी दलों की तुलना पांच पांडवों से करते हुए कहा कि सभी एक साथ हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सहयोगी दलों के बीच मनभेद हो सकता है, लेकिन मतभेद नहीं है। इस बयान के जरिए JDU ने गठबंधन के भीतर समन्वय और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की।
RJD ने कुशवाहा के बयान पर उठाए सवाल
RJD प्रवक्ता एजाज अहमद ने उपेंद्र कुशवाहा के बयान की अलग व्याख्या की। उन्होंने सवाल उठाया कि समाज के नाम पर राजनीति करने वाले नेताओं ने समाज और उसके लोगों के लिए क्या किया है।
एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि इस तरह के नारों के पीछे राजनीतिक और पारिवारिक हितों को मजबूत करने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों के जरिए लोगों को भ्रमित करने और राजनीतिक भूमिका मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।
RJD की ओर से लगाए गए ये आरोप राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इनके समर्थन में इस रिपोर्ट में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
कांग्रेस ने NDA के भीतर खींचतान का दावा किया
कांग्रेस प्रवक्ता स्नेहाशीष वर्धन ने कुशवाहा के बयान को NDA के भीतर संभावित खींचतान से जोड़कर देखा।
उन्होंने दावा किया कि कुशवाहा अपने गठबंधन के सहयोगियों को एकजुट रहने का संदेश दे रहे हैं। कांग्रेस नेता ने इसे NDA के भीतर अस्थिरता की चिंता से जोड़ते हुए गठबंधन की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए।
कांग्रेस की ओर से यह भी दावा किया गया कि जनता NDA से नाराज है और विपक्ष के सामने गठबंधन कमजोर स्थिति में है। ये कांग्रेस नेता द्वारा व्यक्त राजनीतिक दावे हैं, जिन्हें स्वतंत्र तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
बयान के बाद क्या है सियासी मायने?
उपेंद्र कुशवाहा का बयान ऐसे समय आया है जब बिहार की राजनीति में गठबंधन और सामाजिक समीकरणों को लेकर राजनीतिक दल लगातार अपने-अपने संदेश दे रहे हैं।
‘एक हैं तो सेफ हैं’ जैसी अपील को कुशवाहा ने सामाजिक एकता के संदर्भ में रखा। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे NDA के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देखा।
इस पूरे घटनाक्रम में एक बात स्पष्ट है कि एक ही बयान की राजनीतिक व्याख्या अलग-अलग दल अपने नजरिए से कर रहे हैं। NDA नेता जहां इसे एकजुटता के संदेश के तौर पर पेश कर रहे हैं, वहीं RJD और कांग्रेस नेता इससे अलग राजनीतिक अर्थ निकाल रहे हैं।
आने वाले दिनों में इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया और तेज हो सकती है। खास तौर पर बिहार में सामाजिक एकता, गठबंधन की राजनीति और अलग-अलग दलों के बीच समन्वय जैसे मुद्दे चर्चा में बने रह सकते हैं।
