UCC पर JDU का बड़ा बयान, प्रावधान देखकर ही तय होगा पार्टी का रुख
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👉 WhatsApp से जुड़ेंसमान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। UCC के प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं होने के कारण जनता दल (यूनाइटेड) ने फिलहाल अपना अंतिम रुख तय नहीं किया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बिल के प्रावधान सामने आने के बाद पार्टी उनके बारे में विस्तार से विचार-विमर्श करेगी। अगर किसी प्रावधान को लेकर विवाद की स्थिति बनती है, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की जाएगी।
यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा की ओर से 2029 से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही गई है। इसके बाद बिहार में जदयू के नेताओं के अलग-अलग बयानों से इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा और बढ़ गई है।
UCC पर विजय चौधरी ने क्या कहा?
जदयू के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने मंगलवार को पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में यूसीसी को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि अभी यूसीसी बिल के प्रावधान सार्वजनिक नहीं हुए हैं। ऐसे में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। प्रावधान सामने आने के बाद पार्टी उनका अध्ययन करेगी और उसके बाद इस विषय पर विमर्श किया जाएगा।
विजय कुमार चौधरी ने यह भी संकेत दिया कि यदि बिल के किसी प्रावधान को लेकर विवाद या असहमति की स्थिति बनती है, तो पार्टी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करेगी।
इस बयान से साफ है कि जदयू फिलहाल यूसीसी पर जल्दबाजी में कोई अंतिम फैसला लेने के पक्ष में नहीं है। पार्टी पहले प्रस्तावित प्रावधानों को देखना चाहती है।
अमित शाह के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
यूसीसी को लेकर राजनीतिक बहस उस समय तेज हुई जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाले राजग की 21 राज्य सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू करेंगी।
इस बयान का असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ा। बिहार में भाजपा और जदयू सत्ता गठबंधन के प्रमुख घटक हैं। ऐसे में यूसीसी को लेकर दोनों दलों के बीच संभावित समन्वय और पार्टी के रुख पर चर्चा स्वाभाविक रूप से बढ़ गई।
अमित शाह के बयान के बाद जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे। इसके बाद पार्टी अपना रुख तय करेगी।
संजय झा के बयान से भी यह संकेत मिला था कि जदयू यूसीसी के प्रस्ताव को पहले समझना चाहती है और उसके बाद आगे की रणनीति पर निर्णय लेगी।
श्याम रजक ने कही थी अलग बात
यूसीसी को लेकर जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक का बयान भी सामने आया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी ने संसद में यूसीसी से जुड़े विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है।
श्याम रजक ने यह भी कहा था कि जदयू के सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार इस विषय पर पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं।
उनके बयान के बाद यह सवाल उठने लगा कि बिहार में जदयू यूसीसी को लेकर आखिर किस नीति पर आगे बढ़ेगी। अब विजय कुमार चौधरी के बयान से पार्टी की मौजूदा रणनीति कुछ हद तक स्पष्ट हुई है कि अंतिम निर्णय प्रस्तावित कानून के प्रावधानों को देखने के बाद ही किया जाएगा।
नीतीश कुमार पहले भी जता चुके हैं आपत्ति
समान नागरिक संहिता को लेकर जदयू का रुख नया नहीं है। नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री रहते हुए जनवरी 2017 में विधि आयोग को पत्र लिखा था।
इसमें उन्होंने विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच आम सहमति की आवश्यकता पर जोर दिया था। उनका तर्क था कि स्पष्ट रूपरेखा और व्यापक सहमति के बिना यूसीसी को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाना चाहिए।
इसी वजह से जदयू के मौजूदा रुख को पार्टी की पहले की स्थिति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में पार्टी केंद्र और भाजपा के साथ गठबंधन में है, इसलिए यूसीसी पर आगे की बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
'जनता दल नीतीश' नाम पर भी आया जवाब
प्रेसवार्ता के दौरान जदयू के नाम को बदलकर 'जनता दल नीतीश' किए जाने से जुड़े सवाल पर भी विजय कुमार चौधरी ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में फैसला जदयू की राष्ट्रीय परिषद करेगी। यानी पार्टी के नाम में बदलाव को लेकर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
यह मुद्दा भी जदयू की आंतरिक राजनीति और संगठनात्मक फैसलों से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में इस पर आगे निर्णय होने की संभावना है।
बिहार की बाढ़ पर भी बोले विजय चौधरी
प्रेसवार्ता के दौरान बिहार में बाढ़ से हुई क्षति का मुद्दा भी उठा। विजय कुमार चौधरी ने बताया कि बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम बिहार आने वाली है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार राज्य को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगी। बिहार में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और नुकसान के आकलन को लेकर राज्य सरकार की ओर से केंद्र से सहयोग की अपेक्षा की जा रही है।
नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे नेता
यूसीसी को लेकर राजनीतिक चर्चा के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर कई नेताओं के पहुंचने की खबर भी सामने आई। केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह समेत अन्य नेताओं ने उनसे मुलाकात की।
हालांकि इन मुलाकातों और यूसीसी के मुद्दे के बीच सीधे संबंध को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल जदयू का रुख स्पष्ट रूप से यह है कि यूसीसी के वास्तविक प्रावधान सामने आने के बाद ही पार्टी विस्तृत चर्चा करेगी। यदि किसी प्रावधान को लेकर मतभेद या विवाद सामने आता है, तो केंद्रीय स्तर पर बातचीत का रास्ता अपनाया जाएगा।
इससे संकेत मिलता है कि जदयू यूसीसी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना चाहती है। आने वाले समय में केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित प्रावधान और भाजपा-जदयू के बीच होने वाली बातचीत इस मुद्दे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
