राशन डीलर कम राशन दे तो MO (Marketing Officer) को लिखित शिकायत कैसे करें?
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नमस्कार दोस्तों! मैं आपका अपना लोकल पत्रकार। पटना से लेकर बिहार के सभी जिलों की खाक छानते हुए, जब भी मैं ग्रामीण इलाकों या शहरी स्लम बस्तियों की तरफ निकलता हूँ, तो एक समस्या मुझे हर जगह देखने को मिलती है। वह है राशन डीलरों (PDS Dealers) की मनमानी। सरकार ऊपर से गरीबों के लिए पूरा राशन भेजती है, लेकिन जब वह डीलर की दुकान पर पहुँचता है, तो प्रति यूनिट 5 किलो की जगह 4 किलो हो जाता है।
अक्सर मुझे लोगों के मैसेज आते हैं कि "भैया, डीलर अंगूठा लगवा लेता है और कहता है कि सर्वर डाउन है, कल आना" या फिर "कागज पर 20 किलो की रसीद देता है, लेकिन तौलकर 16 किलो ही अनाज थमाता है।" जब आप डीलर से इस बारे में सवाल करते हैं, तो वह सीधा कह देता है, "जहां जाना है जाओ, जिससे शिकायत करनी है कर दो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।"
ऐसी स्थिति में एक आम आदमी, एक गरीब परिवार खुद को बहुत बेबस महसूस करता है। लेकिन सच्चाई यह है कि नियम-कानून के सामने कोई डीलर बड़ा नहीं होता। आपको बस सही तरीका पता होना चाहिए। आज मैं आपको बिल्कुल आसान भाषा में बताने जा रहा हूँ कि अगर आपका राशन डीलर आपके साथ धांधली कर रहा है, तो आप अपने ब्लॉक के MO (Marketing Officer - प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी) को एक पक्की लिखित शिकायत (Written Complaint) कैसे दे सकते हैं, जिससे उस डीलर का लाइसेंस तक रद्द हो सकता है।
MO (Marketing Officer) कौन होता है और उसकी पावर क्या है?
शिकायत करने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि आखिर हम किसके पास जा रहे हैं। हर प्रखंड (Block) स्तर पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की तरफ से एक अधिकारी नियुक्त होता है, जिसे मार्केटिंग ऑफिसर (MO) या ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) कहा जाता है।
आपके ब्लॉक में जितने भी जन वितरण प्रणाली (PDS) के डीलर हैं, उन सब का बॉस यही MO होता है। डीलर सही समय पर दुकान खोल रहा है या नहीं, सही वजन दे रहा है या नहीं, पॉस (POS) मशीन का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं—यह सब चेक करने की जिम्मेदारी MO की होती है।
अगर MO को सही सबूत के साथ लिखित शिकायत मिल जाए, तो उसके पास इतनी पावर होती है कि वह डीलर की दुकान की जांच कर सकता है, कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है और गलती पकड़े जाने पर उसका डीलर लाइसेंस सस्पेंड या रद्द करने की सिफारिश SDO (Sub-Divisional Officer) को कर सकता है।
मौखिक (Verbal) नहीं, लिखित शिकायत (Written Complaint) क्यों जरूरी है?
हमारे समाज में एक बड़ी गलती यह होती है कि लोग ब्लॉक में जाकर MO साहब को मुंहजबानी बोल आते हैं कि "सर, फलना डीलर राशन कम दे रहा है।" अधिकारी भी हामी भर देते हैं और आप घर आ जाते हैं। इसके बाद कुछ नहीं होता।
सरकारी काम में जो चीज कागज पर नहीं है, वह मानी ही नहीं जाती। जब आप एक पन्ने पर लिखकर अपनी बात रखते हैं और उस पर ब्लॉक ऑफिस की रिसीविंग (Receiving) ले लेते हैं, तो वह कागज एक पक्का सरकारी दस्तावेज बन जाता है। अधिकारी उस कागज को कूड़े में नहीं फेंक सकता। उसे उस पर कार्रवाई करनी ही पड़ेगी, वरना आप उस रिसीविंग के आधार पर ऊपर के अधिकारियों (DM या SDO) के पास जा सकते हैं।
MO को शिकायत के लिए जरूरी सबूत (Evidences)
एप्लीकेशन लिखने से पहले आपके पास कुछ ठोस चीजें होनी चाहिए ताकि डीलर अपनी बात से मुकर न सके:
पॉस मशीन की रसीद: जब आप अंगूठा लगाते हैं, तो डीलर एक रसीद (Slip) निकाल कर देता है। उस पर लिखा होता है कि आपको कितना अनाज मिला है। अगर वह कम अनाज देता है, तो वह रसीद आपके पास होनी चाहिए।
राशन कार्ड की फोटोकॉपी: शिकायतकर्ता का राशन कार्ड होना जरूरी है।
वीडियो या ऑडियो (अगर हो सके): आजकल सबके पास स्मार्टफोन है। अगर डीलर बदतमीजी करता है या कम राशन तौलता है, तो दूर से उसका एक छोटा सा वीडियो बना लें।
अन्य कार्डधारकों का समर्थन: अगर डीलर एक के साथ बेईमानी कर रहा है, तो जाहिर है वह दूसरों के साथ भी कर रहा होगा। इसलिए मोहल्ले के 4-5 अन्य लोगों को भी अपने साथ जोड़ लें।
MO (Marketing Officer) को एप्लीकेशन कैसे लिखें? (पूरा फॉर्मेट)
आपको किसी वकील या दलाल के पास जाने की जरूरत नहीं है। आप एक सादे पन्ने (A4 Size Paper) पर खुद यह एप्लीकेशन लिख सकते हैं। यहाँ मैं आपको एक बेहतरीन और असरदार एप्लीकेशन का फॉर्मेट दे रहा हूँ, जिसे आप ज्यों का त्यों इस्तेमाल कर सकते हैं:
सेवा में,
प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (MO / BSO)
[अपने ब्लॉक/प्रखंड का नाम लिखें]
[अपने जिले का नाम लिखें], बिहार
विषय: जन वितरण प्रणाली (PDS) डीलर [डीलर का पूरा नाम लिखें] द्वारा राशन कम देने और मनमानी करने के संबंध में लिखित शिकायत।
महाशय,
सविनय निवेदन है कि मैं [अपना पूरा नाम लिखें], पिता/पति का नाम [पिता/पति का नाम], ग्राम/वार्ड [अपने गांव या वार्ड का नाम], पंचायत [पंचायत का नाम] का एक स्थायी निवासी हूँ। मेरे राशन कार्ड का नंबर [अपना राशन कार्ड नंबर लिखें] है।
मैं आपका ध्यान हमारे पंचायत/वार्ड के राशन डीलर [डीलर का नाम और डीलर लाइसेंस नंबर अगर पता हो] की मनमानी और भ्रष्ट रवैये की ओर आकृष्ट कराना चाहता हूँ। पिछले कई महीनों से डीलर द्वारा हम कार्डधारकों को तय सीमा से कम राशन (प्रति यूनिट 5 किलो की जगह मात्र 4 किलो) दिया जा रहा है।
जब हम इसका विरोध करते हैं, तो डीलर द्वारा हमारे साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और धमकी दी जाती है कि "जाओ जहाँ शिकायत करनी है कर दो, मैं राशन नहीं दूंगा।" इसके अलावा, कई बार पीओएस (POS) मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद सर्वर डाउन का बहाना बनाकर राशन नहीं दिया जाता और बाद में हमारा राशन गबन कर लिया जाता है।
अतः श्रीमान से नम्र निवेदन है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उक्त डीलर के स्टॉक और वितरण रजिस्टर की तत्काल जांच की जाए और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए हमारा सही राशन दिलवाने की कृपा की जाए।
इस न्यायपूर्ण कार्य के लिए हम सभी कार्डधारक आपके सदा आभारी रहेंगे।
सधन्यवाद!
दिनांक: [आज की तारीख]
स्थान: [गांव/शहर का नाम]
शिकायतकर्ता का नाम: [अपना नाम]
मोबाइल नंबर: [अपना चालू मोबाइल नंबर]
हस्ताक्षर: [अपना साइन करें]
(नोट: इस एप्लीकेशन के नीचे मोहल्ले के 4-5 अन्य पीड़ित कार्डधारकों के नाम और हस्ताक्षर भी जरूर करवा लें।)
शिकायत दर्ज कराने की स्टेप-बाय-स्टेप (Step-by-Step) प्रक्रिया
अब जब आपका एप्लीकेशन तैयार हो गया है, तो इसे जमा करने की प्रक्रिया को ध्यान से समझें:
फोटोकॉपी कराएं: सबसे पहले अपने तैयार किए हुए ओरिजिनल एप्लीकेशन की 2 फोटोकॉपी करवा लें।
ब्लॉक ऑफिस जाएं: अपने ब्लॉक ऑफिस (प्रखंड कार्यालय) में जाएं। वहां आपूर्ति विभाग (Supply Department) का एक अलग कमरा होता है, जहां MO बैठते हैं।
आवेदन जमा करें: MO साहब या उनके क्लर्क को अपना ओरिजिनल आवेदन और राशन कार्ड की फोटोकॉपी सौंप दें।
रिसीविंग (Receiving) लेना न भूलें (सबसे महत्वपूर्ण कदम): जो फोटोकॉपी आप अपने पास रखेंगे, उस पर ब्लॉक ऑफिस की मुहर (Stamp), जमा करने की तारीख (Date) और अधिकारी का हस्ताक्षर (Sign) जरूर करवा लें। यही आपकी 'रिसीविंग' है। अगर अधिकारी मुहर लगाने से मना करे, तो साफ कह दें कि सरकारी नियम के अनुसार रिसीविंग देना अनिवार्य है।
फॉलो-अप (Follow-up): शिकायत देने के 7 से 10 दिन बाद फिर से ब्लॉक जाएं और अपनी रिसीविंग दिखाकर पूछें कि आपके आवेदन पर अब तक क्या कार्रवाई (Action) हुई है।
त्वरित जानकारी तालिका (Quick Information Table)
अगर आपके पास समय कम है, तो इस टेबल से पूरी प्रक्रिया एक नजर में समझ लें:
| विवरण (Details) | जानकारी (Information) |
| मुख्य अधिकारी | मार्केटिंग ऑफिसर (MO) / प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी |
| शिकायत का प्रकार | कम राशन देना, बदतमीजी करना, ज्यादा पैसे वसूलना |
| जरूरी दस्तावेज | राशन कार्ड की कॉपी, पॉस मशीन की रसीद, आधार कार्ड |
| शिकायत का तरीका | हाथ से लिखा हुआ लिखित आवेदन (Receiving के साथ) |
| अगर MO कार्रवाई न करे तो? | SDO (अनुमंडल पदाधिकारी) को रिसीविंग के साथ शिकायत करें |
| ऑनलाइन पोर्टल | epds.bihar.gov.in या sfc.bihar.gov.in (ग्रीवांस सेक्शन) |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल 1: अगर MO साहब शिकायत लेने से या रिसीविंग देने से मना कर दें, तो क्या करें?
जवाब: अगर ब्लॉक में आपकी शिकायत नहीं ली जा रही है, तो आप उसी एप्लीकेशन को अपने अनुमंडल के SDO (Sub-Divisional Officer) के ऑफिस में जाकर जमा कर सकते हैं। आप उस एप्लीकेशन को स्पीड पोस्ट (Speed Post) के जरिए भी MO के ऑफिस भेज सकते हैं। स्पीड पोस्ट की रसीद ही आपका सबसे बड़ा सबूत बन जाएगी।
सवाल 2: क्या एक अकेले व्यक्ति की शिकायत पर डीलर पर कार्रवाई हो सकती है?
जवाब: हाँ, बिल्कुल हो सकती है। लेकिन अगर आप अपने साथ 5-10 और कार्डधारकों के हस्ताक्षर (Sign) एप्लीकेशन पर करवा लेते हैं, तो शिकायत का वजन बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और अधिकारी इसे गंभीरता से लेते हैं।
सवाल 3: ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने का कोई तरीका है क्या?
जवाब: हाँ। आप बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की वेबसाइट (epds.bihar.gov.in) पर जाकर 'Grievance' वाले लिंक पर अपनी शिकायत ऑनलाइन भी रजिस्टर कर सकते हैं। वहाँ भी आपको एक ट्रैकिंग नंबर मिलता है।
सवाल 4: डीलर कहता है कि ऊपर ऑफिस में पैसा देना पड़ता है, इसलिए राशन काटते हैं। क्या यह सच है?
जवाब: यह डीलर का सबसे पुराना बहाना है। नियम के अनुसार कार्डधारक को पूरा राशन मिलना चाहिए। अंदरखाने का कोई भी भ्रष्टाचार आम जनता का राशन काटने का कारण नहीं बन सकता। आप इसकी परवाह किए बिना निडर होकर अपनी शिकायत दर्ज करें।
सवाल 5: शिकायत करने के बाद क्या डीलर मेरा राशन कार्ड रद्द कर सकता है?
जवाब: बिल्कुल नहीं! डीलर के पास किसी का भी राशन कार्ड रद्द करने या नाम काटने की कोई पावर नहीं होती है। यह पावर सिर्फ MO और SDO के पास होती है। इसलिए डीलर की ऐसी खोखली धमकियों से बिल्कुल न डरें।
आखिरी बात
पटना हो या बिहार का कोई अन्य जिला, भ्रष्टाचार तभी तक पनपता है, जब तक आम इंसान खामोश रहता है। जब आप अपने हक के लिए कागज और कलम उठा लेते हैं, तो सिस्टम को भी झुकना पड़ता है। डीलर आपको जो राशन बांटता है, वह उसके घर से नहीं आता, बल्कि आपके टैक्स के पैसों से सरकार खरीद कर भेजती है।
अगर आपको या आपके आस-पड़ोस में किसी को भी PDS राशन से जुड़ी कोई समस्या आ रही है, तो आज ही इस तरीके को अपनाएं। अपनी चुप्पी तोड़ें और ब्लॉक ऑफिस में जाकर एक मजबूत लिखित शिकायत दें।
मुझे उम्मीद है कि यह जानकारी आपके बहुत काम आएगी। आपसे एक छोटी सी गुजारिश है—इस अहम जानकारी को सिर्फ अपने तक सीमित न रखें। इसे अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और गांव वालों के साथ अपने फेसबुक ग्रुप्स (Facebook Groups) और व्हाट्सएप्प चैनल्स (WhatsApp Channels) पर जरूर शेयर करें। हो सकता है आपका एक शेयर किसी गरीब परिवार को उसका पूरा हक दिलवाने में मदद कर दे।
अगर शिकायत का एप्लीकेशन लिखने या फॉर्म जमा करने में कोई भी दिक्कत आए, तो आप बेझिझक नीचे कमेंट करके मुझसे पूछ सकते हैं। मैं आपकी पूरी मदद करूंगा। अपना हक मांगिए, क्योंकि यह आपका अधिकार है!
