शुभ दीपावली

रोशनी और खुशियों का यह पावन पर्व आपके जीवन को जगमगा दे!

बिहार बाढ़ पर तेजस्वी यादव का बड़ा हमला, केंद्र से पूछे ये सवाल

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें


 

बिहार में बाढ़ और कुछ इलाकों में सूखे की स्थिति को लेकर राजनीति तेज हो गई है। बिहार बाढ़ के मुद्दे पर राजद नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र और राज्य सरकार से कई सवाल पूछे हैं। पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने राज्य की स्थिति को गंभीर बताते हुए इसे ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की मांग दोहराई।

तेजस्वी यादव ने दावा किया कि करीब 45 लाख लोग बाढ़ और सूखे की स्थिति से प्रभावित हैं। हालिया रिपोर्टों में भी बिहार के 15 जिलों में लाखों लोगों के बाढ़ से प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग

तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार से बिहार की मौजूदा स्थिति को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की। इससे पहले भी वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ऐसी ही मांग कर चुके हैं।

7 सितंबर को लिखे पत्र में उन्होंने बिहार के लिए 5,000 करोड़ रुपये के तत्काल विशेष पैकेज की मांग की थी। उस समय सरकारी आंकड़ों के हवाले से 13 जिलों में करीब 27 लाख लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई थी।

अब ताजा प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने प्रभावित परिवारों को सीधे राहत देने की मांग भी रखी है।

तेजस्वी के मुताबिक बाढ़ और सूखे से प्रभावित प्रत्येक परिवार को 15 हजार रुपये की सहायता दी जानी चाहिए। यह उनकी ओर से रखी गई राजनीतिक मांग है, जबकि राहत राशि और आपदा प्रबंधन को लेकर अंतिम फैसला सरकार और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था के स्तर पर होगा।

‘गुजरात में नाले का पानी तो बिहार में बाढ़ क्यों नहीं?’

तेजस्वी यादव ने अपने बयान में गुजरात और बिहार की आपदा परिस्थितियों की तुलना की। उन्होंने सवाल उठाया कि गुजरात में बारिश और जलभराव की स्थिति पर केंद्र सक्रियता दिखाता है, जबकि बिहार में बड़े पैमाने पर लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।

उनका आरोप है कि बिहार के साथ राहत के मामले में समान रवैया नहीं अपनाया जा रहा है। उन्होंने केंद्र से पूछा कि बिहार के लिए अब तक कितनी अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई गई और प्रधानमंत्री राहत व्यवस्था को लेकर कब तक हस्तक्षेप करेंगे।

इससे पहले भी तेजस्वी ने गुजरात में भारी बारिश के दौरान केंद्र की सक्रियता का उदाहरण देते हुए बिहार के लिए भी केंद्रीय सहायता की मांग की थी।

हालांकि, गुजरात और बिहार की परिस्थितियों, नुकसान तथा केंद्र की ओर से दी गई सहायता की पूरी तुलना करने के लिए दोनों राज्यों के आधिकारिक आंकड़ों को साथ देखना जरूरी है।

राहत फंड और खर्च को लेकर उठाए सवाल

तेजस्वी यादव ने आपदा राहत के लिए उपलब्ध फंड को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आपदा से जुड़े फंड में उपलब्ध राशि कितनी थी और उसमें से अब तक कितना पैसा खर्च हुआ है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इमरजेंसी फंड की राशि पहले ही निकालकर दूसरे कामों में खर्च की जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से नहीं मिली है।

तेजस्वी ने सरकार से आपदा राहत में खर्च की गई राशि का सार्वजनिक हिसाब देने की मांग की। उनका कहना था कि सरकारी खजाने पर पहला अधिकार आपदा से प्रभावित लोगों का होना चाहिए।

दीया जलाने के खर्च पर भी सरकार को घेरा

राजद नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के आसपास हुए दीया-बाती कार्यक्रम को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे आयोजनों पर सरकारी धन खर्च किया गया, जबकि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत शिविरों और कम्युनिटी किचन को लेकर समस्याएं सामने आ रही हैं।

इससे पहले भी उन्होंने बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीये जलाने से जुड़े खर्च को लेकर सवाल उठाए थे।

इन खर्चों और आपदा राहत मद के बीच सीधा संबंध होने के दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक बजट या खर्च का रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

मुख्यमंत्री और बीजेपी नेताओं पर भी निशाना

प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यशैली की आलोचना की और कहा कि सरकार को प्रभावित लोगों तक ज्यादा प्रभावी राहत पहुंचानी चाहिए।

उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन से भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने की अपील की। तेजस्वी ने सवाल किया कि भाजपा के नेता प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को बिहार की स्थिति देखने के लिए क्यों नहीं बुला रहे हैं।

यह बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है। वहीं दूसरी ओर, सरकार और सत्तारूढ़ दलों की ओर से राहत कार्यों को लेकर अलग-अलग कदमों और सहायता की जानकारी भी सामने आई है।

सरकार की ओर से राहत कार्य जारी

बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं। 20 सितंबर की रिपोर्ट में करीब 48 लाख लोगों के प्रभावित होने और कई जिलों में राहत प्रयास तेज होने की जानकारी दी गई।

इस बीच राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से भी मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान की घोषणाएं हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा ने 51 लाख रुपये का योगदान दिया और नितिन नबीन ने तीन महीने का वेतन राहत कोष में देने की घोषणा की।

इससे स्पष्ट है कि बाढ़ राहत का मुद्दा प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी बड़ा विषय बना हुआ है।

तेजस्वी की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं?

तेजस्वी यादव के ताजा बयान को संक्षेप में देखें तो उनकी प्रमुख मांगें हैं:

  • बिहार की बाढ़ की स्थिति को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए।
  • प्रभावित परिवारों को 15 हजार रुपये की तत्काल राहत दी जाए।
  • बिहार को केंद्र से विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाए।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से राहत कार्यों में तेजी लाने तथा आपदा प्रभावित लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता देने की मांग की है।

बिहार में बाढ़ का संकट अभी भी कई इलाकों में गंभीर बना हुआ है। ऐसे में आगे राहत, नुकसान का आकलन और केंद्र से मिलने वाली सहायता पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1