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लव-कुश समाज पर सम्राट चौधरी का बड़ा बयान, 1994 से 2026 तक गिनाए कई मुद्दे

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बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लव-कुश प्रतिभा सम्मान समारोह में सामाजिक एकता और बिहार के विकास को लेकर कई बातें कहीं। लव-कुश समाज के संदर्भ में उन्होंने 1990 के दशक की सामाजिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 1994 में भी यह समाज एक था और 2026 में भी एक है। उन्होंने कहा कि यह एकता किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और बिहार की समृद्धि के उद्देश्य से होनी चाहिए।

समारोह में मुख्यमंत्री ने शिक्षा, पर्यटन, ऐतिहासिक विरासत, विकसित भारत और समृद्ध बिहार की चर्चा की। उन्होंने सीतामढ़ी के पुनौराधाम में भव्य मां सीता मंदिर को 31 दिसंबर 2028 तक पूरा करने की सरकार की समयसीमा का भी उल्लेख किया। इस समयसीमा की पुष्टि बिहार सरकार की आधिकारिक जानकारी में भी की गई है।

1994 के लव-कुश एकता का किया जिक्र

सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में 1992, 1993 और 1994 के दौर का जिक्र किया। उनके अनुसार, पहले कुर्मी चेतना रैली और फिर कुशवाहा सम्मेलन जैसे आयोजनों के बाद लव-कुश सम्मेलन की शुरुआत हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सामाजिक एकता को आगे बढ़ाने वाले नेताओं को याद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1994 के बाद लव-कुश एकता का राजनीतिक स्वरूप भी सामने आया और आगे चलकर इसने जनता दल यूनाइटेड की राजनीति को मजबूत करने में भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, “1994 में भी लव-कुश समाज एक था और 2026 में भी एक है।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समाज किसी के खिलाफ नहीं है और आगे भी किसी के खिलाफ होने का उद्देश्य नहीं है।

उनके मुताबिक सामाजिक एकता का मकसद न्याय के साथ आगे बढ़ना और बिहार की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति में योगदान देना होना चाहिए।

विकसित भारत और समृद्ध बिहार का रखा विजन

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विकसित भारत और समृद्ध बिहार की अवधारणा को भी जोड़ा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य और बिहार के विकास के संकल्प का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि समाज को अपने अधिकार और उचित हिस्सेदारी के विषय में जागरूक रहना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने भगवान श्रीराम और लव-कुश की कथा का उदाहरण देते हुए न्याय और कर्तव्य की बात रखी।

सम्राट चौधरी ने बिहार के ऐतिहासिक गौरव का उल्लेख करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि बिहार का अतीत ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण रहा है और इस विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की जरूरत है।

शिक्षा पर बोले सीएम, बिहार में ही तैयारी का दावा

मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले बिहार के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था।

उन्होंने बिहार में बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं विकसित करने और बाहर पढ़ाने वाले शिक्षकों को राज्य में वापस लाने की दिशा में काम करने की बात कही।

हाल के दिनों में राज्य सरकार ने ‘बिहार विद्या साथी’ डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किया है। सरकार के अनुसार, इसकी शुरुआत 700 मॉडल विद्यालयों में करीब तीन लाख विद्यार्थियों के लिए की गई है और विद्यार्थियों को ऑनलाइन शैक्षणिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।

सम्राट चौधरी ने मॉडल स्कूलों और डिजिटल शिक्षा को बिहार के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े।

पर्यटन और ऐतिहासिक विरासत पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने बिहार के पर्यटन की संभावनाओं पर भी बात की। उन्होंने वैशाली और बोधगया जैसे महत्वपूर्ण स्थलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर करने की जरूरत बताई।

उन्होंने बोधगया में कॉरिडोर विकसित करने और बिहार की बौद्ध, ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की बात कही।

सम्राट अशोक और पाटलिपुत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार की धरती से शांति, मानवता और ज्ञान से जुड़े संदेश दुनिया तक पहुंचे हैं। उन्होंने ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।

31 दिसंबर 2028 तक सीता मंदिर का लक्ष्य

सम्राट चौधरी ने सीतामढ़ी के पुनौराधाम को धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की बात भी दोहराई।

बिहार सरकार की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक पुनौराधाम में मां जानकी के भव्य मंदिर का निर्माण 31 दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रस्तावित परिसर में मंदिर के साथ परकोटा, यज्ञ मंडप, अनुष्ठान मंडप, संग्रहालय, ऑडिटोरियम और श्रद्धालुओं के लिए अन्य सुविधाओं की योजना शामिल है।

सरकार का कहना है कि पुनौराधाम के समग्र विकास से धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पुनौराधाम से मां सीता से जुड़े अन्य स्थलों को जोड़ने और क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के निर्देश भी दिए थे।

चुनावी आंकड़ों का भी किया उल्लेख

सम्राट चौधरी ने अपने भाषण में 2010, 2020 और 2025 के चुनावी आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने गठबंधन और राजनीतिक एकता के संदर्भ में इन चुनावों का उदाहरण दिया।

उन्होंने सहयोगी दलों और नेताओं के साथ मिलकर काम करने की बात कही। इसके लिए उन्होंने पांच उंगलियों का उदाहरण दिया कि सभी उंगलियां समान नहीं होतीं, लेकिन एक साथ मिलकर मुट्ठी बनाती हैं।

उनका संदेश सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर एकता के जरिए बिहार के विकास को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहा।

हालांकि चुनावी आंकड़ों और उनके राजनीतिक विश्लेषण को मुख्यमंत्री के भाषण के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। अलग-अलग चुनावों के परिणामों और गठबंधनों की तुलना करते समय निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़े अलग से देखना उचित होगा।

बिहार के विकास को सामाजिक भागीदारी से जोड़ने की बात

लव-कुश प्रतिभा सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने आयोजकों और प्रतिभागियों को बधाई दी। कार्यक्रम में विभिन्न नेताओं और प्रतिनिधियों की मौजूदगी को उन्होंने सामाजिक एकता का संकेत बताया।

सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की पुरानी शैक्षणिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को आधुनिक विकास के साथ जोड़ने की जरूरत है।

उनके भाषण में सामाजिक एकता, शिक्षा, पर्यटन और ऐतिहासिक विरासत चार प्रमुख विषय रहे। वहीं सीतामढ़ी में मंदिर निर्माण की 31 दिसंबर 2028 की समयसीमा सरकार की प्रमुख सांस्कृतिक-पर्यटन परियोजनाओं में से एक के रूप में सामने आई है।

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