तेज प्रताप के फैन अविनाश की पिटाई का वीडियो वायरल, 'मोतीलाल भइया, मत मारिए'
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बिहार की राजनीति से जुड़े एक पुराने विवाद ने एक कथित वीडियो सामने आने के बाद फिर चर्चा पकड़ ली है। मामला तेज प्रताप यादव के समर्थक बताए जाने वाले अविनाश से जुड़ा है। तेज प्रताप यादव के लिए सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो बनाने वाले अविनाश की पिटाई का कथित वीडियो अब कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग एक युवक की पिटाई करते दिखाई दे रहे हैं, जबकि युवक खुद को छोड़ने की गुहार लगाता सुनाई देता है। वीडियो में वह बार-बार ‘मोतीलाल भइया’ कहता नजर आता है।
हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए वीडियो में दिख रहे लोगों और घटना की परिस्थितियों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
वायरल वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है?
सामने आए कथित वीडियो में एक युवक को कुछ लोग घेरकर पीटते दिखाई देते हैं। वीडियो में मारपीट के दौरान युवक मदद की गुहार लगाता है और एक व्यक्ति को नाम लेकर पुकारता है।
वीडियो में युवक की आवाज सुनाई देती है, जिसमें वह बार-बार ‘मोतीलाल भइया’ कह रहा है। इसी दौरान मारपीट की आवाजें भी सुनाई देती हैं।
बताया जा रहा है कि पिटाई के दौरान युवक वहां मौजूद एक लैम्प से भी टकराता है। पीछे से किसी व्यक्ति की आवाज आती सुनाई देती है, जो उससे पूछता है कि क्या बोलना है।
यही हिस्सा वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में है। हालांकि, वीडियो किस स्थान का है, इसमें मौजूद सभी लोग कौन हैं और इसे किस परिस्थिति में रिकॉर्ड किया गया था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
कौन है अविनाश और मामला कब का है?
यह पूरा विवाद दिसंबर 2025 के शुरुआती दिनों से जुड़ा बताया जा रहा है। उस समय अविनाश उर्फ सौरभ ने तेज प्रताप यादव से जुड़े कुछ गंभीर आरोप लगाए थे।
अविनाश को तेज प्रताप यादव का समर्थक और प्रशंसक बताया जाता रहा है। तेज प्रताप की चुनावी गतिविधियों के दौरान उसने सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में कई वीडियो भी बनाए थे।
2025 में तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी जन शक्ति जनता दल के जरिए बिहार विधानसभा चुनाव की राजनीति में अलग तरीके से प्रवेश किया था। इसी दौरान अविनाश के कई वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आए थे।
बाद में चुनावी नतीजों के बाद अविनाश कुछ वीडियो में फटे कपड़ों में दिखाई दिया और उसने अपने साथ मारपीट किए जाने का दावा किया था।
तेज प्रताप के आवास को लेकर क्या था आरोप?
अविनाश ने दिसंबर 2025 में दावा किया था कि वह पटना में एक रिसेप्शन कार्यक्रम में गया था। उसके मुताबिक, इसी दौरान उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया।
उसने आरोप लगाया था कि मोबाइल वापस लेने के लिए उसे तेज प्रताप यादव के तत्कालीन सरकारी आवास पर बुलाया गया था।
अविनाश के अनुसार, वहां पहुंचने के बाद कई लोगों ने उसे घेर लिया और उसके साथ मारपीट की। उसने यह भी दावा किया था कि इस दौरान उसके कपड़े फाड़ दिए गए।
उस समय अविनाश ने यह आरोप भी लगाया था कि उस पर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया गया था।
इन आरोपों के संबंध में उपलब्ध जानकारी में अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए किसी भी आरोप को अंतिम तथ्य मानने के बजाय उसे संबंधित व्यक्ति के दावे के रूप में देखना जरूरी है।
‘मोतीलाल भइया’ का नाम क्यों आया?
वायरल बताए जा रहे वीडियो में अविनाश जिस व्यक्ति को बार-बार ‘मोतीलाल भइया’ कहकर पुकार रहा है, उस नाम का संबंध पहले सामने आए विवाद से भी जोड़ा जा रहा है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मोतीलाल का नाम इससे पहले तेज प्रताप यादव से जुड़े एक अलग विवाद में सामने आया था। तेज प्रताप के तत्कालीन ड्राइवर अनिल यादव की ओर से मोतीलाल राय और आकाश यादव के खिलाफ शिकायत किए जाने की खबर भी सामने आई थी।
इसके बाद मोतीलाल का नाम तेज प्रताप यादव की ओर से लगाए गए कुछ आरोपों और कथित साजिश के संदर्भ में भी सामने आया था।
हालांकि, वायरल वीडियो में ‘मोतीलाल भइया’ कहे जाने से यह अपने आप साबित नहीं होता कि वीडियो में मौजूद व्यक्ति वही मोतीलाल है या घटना में उनकी क्या भूमिका थी। इसकी पुष्टि जांच या आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
चुनाव के बाद फिर चर्चा में क्यों आया मामला?
तेज प्रताप यादव ने 2025 में अपनी अलग राजनीतिक राह अपनाते हुए जन शक्ति जनता दल के माध्यम से चुनाव लड़ा था। चुनावी गतिविधियों के दौरान उनके समर्थकों और विरोधियों से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे।
अविनाश भी इसी दौरान तेज प्रताप के समर्थन में बनाए गए वीडियो के कारण सोशल मीडिया पर पहचाना जाने लगा था।
चुनाव परिणाम आने के बाद उसके साथ कथित मारपीट को लेकर आरोप सामने आए। उस समय उसके वीडियो और बयानों ने भी सोशल मीडिया पर काफी ध्यान खींचा था।
अब उसी घटना से जुड़ा बताया जा रहा एक कथित वीडियो सामने आने के बाद पुराना विवाद दोबारा चर्चा में आ गया है।
वीडियो की पुष्टि को लेकर क्या स्थिति है?
किसी भी वायरल वीडियो को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल उसकी प्रामाणिकता और संदर्भ का होता है। इस मामले में भी वीडियो की तारीख, स्थान, रिकॉर्डिंग की परिस्थितियों और उसमें दिखाई देने वाले लोगों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार वीडियो को दिसंबर 2025 में हुई कथित घटना से जोड़ा जा रहा है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए फिलहाल इसे ‘कथित पिटाई का वायरल वीडियो’ कहना ही उचित है। वीडियो सामने आने से पुराने आरोपों की चर्चा जरूर तेज हुई है, लेकिन केवल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका या आरोपों की सत्यता पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि इस वीडियो को लेकर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या पुलिस अथवा किसी अन्य जांच एजेंसी की ओर से इस संबंध में कोई जानकारी सामने आती है।
