चिराग की मांग पर तेजस्वी भी साथ, रामविलास-रघुवंश की प्रतिमा की उठी मांग
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार की राजनीति में अलग-अलग दलों के नेताओं के बीच सियासी मतभेद भले नजर आते हों, लेकिन चिराग पासवान की एक मांग पर चिराग पासवान और तेजस्वी यादव की बात एक दिशा में जाती दिखाई दे रही है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने पटना में स्वर्गीय रामविलास पासवान की आदमकद प्रतिमा लगाने की मांग बिहार सरकार के सामने रखी है। इसी मुद्दे पर तेजस्वी यादव भी पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह और रामविलास पासवान की प्रतिमा लगाने तथा उनकी जयंती या पुण्यतिथि को राजकीय समारोह घोषित करने की मांग कर चुके हैं।
यह मामला केवल प्रतिमा लगाने तक सीमित नहीं है। दोनों नेताओं के बयानों में बिहार के उन प्रमुख राजनीतिक चेहरों की विरासत और उनके सार्वजनिक जीवन के योगदान को सम्मान देने की बात सामने आती है, जिन्होंने लंबे समय तक राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाई।
चिराग पासवान ने पटना में प्रतिमा लगाने की मांग की
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि बिहार की धरती ने कई महान नेताओं और विभूतियों को जन्म दिया है। इन लोगों के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।
चिराग के मुताबिक, बिहार में ऐसे नेताओं के नाम पर स्थानों का नामकरण और उनकी प्रतिमाएं स्थापित करने पर विचार होना चाहिए, जिन्होंने प्रदेश के लिए लंबे समय तक काम किया।
उन्होंने खास तौर पर अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान की आदमकद प्रतिमा पटना में लगाने की मांग उठाई।
चिराग ने बताया कि बिहार के प्रभारी अरुण भारती और पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र विवेक ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रामविलास पासवान की आदमकद प्रतिमा लगाने की मांग रखी है।
उनका कहना है कि रामविलास पासवान जैसे नेताओं का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए यादगार है। ऐसे नामों को सम्मान देना केवल वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और कार्यों को भविष्य तक पहुंचाने का माध्यम भी है।
तेजस्वी यादव ने भी रखी ऐसी ही मांग
इस मुद्दे पर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मांग भी सामने आ चुकी है। तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रघुवंश प्रसाद सिंह और रामविलास पासवान की राज्य में आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग की थी।
तेजस्वी ने दोनों नेताओं की जयंती अथवा पुण्यतिथि को राजकीय समारोह के रूप में मनाने की मांग भी रखी थी।
रघुवंश प्रसाद सिंह और रामविलास पासवान दोनों ही बिहार की राजनीति के बड़े नाम रहे हैं। अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि और दलों से जुड़े होने के बावजूद दोनों नेताओं की राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण पहचान रही।
ऐसे में प्रतिमा और राजकीय समारोह की मांग को बिहार की राजनीतिक विरासत को सम्मान देने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत
रामविलास पासवान बिहार की राजनीति के उन नेताओं में शामिल रहे, जिनका प्रभाव राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी लंबे समय तक रहा।
उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। सामाजिक न्याय, दलित राजनीति और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी राजनीतिक पहचान बनी।
कई दशकों तक सक्रिय राजनीति में रहने के कारण अलग-अलग दौर में उनका संबंध विभिन्न राजनीतिक गठबंधनों से भी रहा। यही वजह है कि बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका को व्यापक रूप से याद किया जाता है।
चिराग पासवान का तर्क है कि ऐसे नेताओं की स्मृतियों को सार्वजनिक स्थानों पर संरक्षित करने से नई पीढ़ी उनके संघर्ष और योगदान के बारे में जान सकेगी।
रघुवंश प्रसाद सिंह भी बिहार की राजनीति का बड़ा नाम
रघुवंश प्रसाद सिंह की पहचान भी बिहार के प्रमुख समाजवादी नेताओं में रही। वे लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे और केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।
ग्रामीण विकास और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर उनकी राजनीतिक पहचान बनी। बिहार के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उनके योगदान को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता समय-समय पर उन्हें याद करते रहे हैं।
तेजस्वी यादव की ओर से उनकी प्रतिमा लगाने और जयंती या पुण्यतिथि को राजकीय समारोह के रूप में मनाने की मांग इसी राजनीतिक विरासत को सम्मान देने से जुड़ी है।
क्या इस मांग पर बिहार सरकार लेगी फैसला?
अब सवाल यह है कि चिराग पासवान और तेजस्वी यादव की ओर से सामने आई इन मांगों पर बिहार सरकार क्या कदम उठाती है।
राज्य में किसी प्रमुख राजनीतिक नेता की प्रतिमा स्थापित करने और जयंती या पुण्यतिथि को राजकीय समारोह घोषित करने का फैसला सरकार के स्तर पर लिया जाता है। इसके लिए स्थान, प्रशासनिक प्रक्रिया और संबंधित नियमों पर भी विचार किया जा सकता है।
फिलहाल राजनीतिक तौर पर इस मांग ने एक अलग संदेश जरूर दिया है। अलग-अलग दलों से आने वाले नेताओं ने बिहार की राजनीतिक विरासत से जुड़े दो प्रमुख चेहरों के सम्मान की बात उठाई है।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और यदि प्रतिमा लगाने की मंजूरी मिलती है तो पटना या राज्य में इसके लिए कौन-सा स्थान तय किया जाता है।
राजनीतिक मतभेदों से अलग दिखा सम्मान का मुद्दा
बिहार की राजनीति में चिराग पासवान और तेजस्वी यादव अलग-अलग राजनीतिक खेमों का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों के राजनीतिक मुद्दे और चुनावी रणनीतियां भी अलग रही हैं।
इसके बावजूद रामविलास पासवान और रघुवंश प्रसाद सिंह की स्मृति को सम्मान देने से जुड़ी मांग एक समान दिशा में दिखाई देती है।
इससे यह भी संकेत मिलता है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच नेताओं की सार्वजनिक विरासत और उनके योगदान को सम्मान देने के मुद्दे पर सहमति की गुंजाइश बनी रहती है।
आने वाले दिनों में यदि बिहार सरकार इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक निर्णय लेती है, तो यह राज्य की राजनीतिक स्मृतियों और सार्वजनिक स्थलों पर नेताओं की विरासत को प्रदर्शित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
