इस्तीफे की मांग के बीच ज्ञानेश कुमार की बड़ी बैठक, SIR की डेडलाइन बढ़ी,कई फैसले

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नई दिल्ली में SIR 2026 को लेकर चुनाव आयोग ने कई अहम फैसले किए हैं। SIR 2026 के तहत दिल्ली में मतदाता सूची को लेकर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। आयोग ने नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया भी आसान करने की घोषणा की है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने शनिवार को निर्वाचन सदन में बैठक की। यह बैठक ऐसे समय हुई जब आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों को लेकर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई थीं। आयोग ने बैठक के बाद अपने फैसलों और आंतरिक कामकाज पर स्पष्टीकरण जारी किया।

दिल्ली में SIR की डेडलाइन 30 अक्टूबर तक बढ़ी

चुनाव आयोग ने दिल्ली में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी है। वहीं नोटिस, दावे और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख अब 30 नवंबर 2026 होगी।

इस बदलाव से उन मतदाताओं को अतिरिक्त समय मिलेगा जिनके नाम मतदाता सूची में पुराने रिकॉर्ड से मैप नहीं हो पाए हैं या जिनके रिकॉर्ड में तार्किक विसंगतियां सामने आई हैं।

आयोग ने साथ ही यह स्पष्ट किया कि नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि हर मतदाता को अनिवार्य रूप से ERO कार्यालय पहुंचकर व्यक्तिगत सुनवाई में शामिल होना पड़ेगा।

नोटिस वाले मतदाताओं के घर जाएंगे BLO

आयोग के नए प्रावधान के मुताबिक, जिन मतदाताओं को नाम मैप नहीं होने या तार्किक गड़बड़ी के कारण नोटिस मिला है, उनके मामलों में BLO घर जाकर दस्तावेज जुटाने में मदद करेंगे।

BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर संबंधित मतदाता से जरूरी दस्तावेज लेकर उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। इसके बाद चुनाव पंजीकरण अधिकारी यानी ERO दस्तावेजों के आधार पर मतदाता की पात्रता पर फैसला करेगा।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य नोटिस पाने वाले लोगों के लिए कार्यालयों के चक्कर कम करना है। सामान्य मामलों में उन्हें ERO या AERO के कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी।

हालांकि, आयोग ने यह भी कहा है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में व्यक्तिगत सुनवाई जरूरी हो सकती है। ऐसे मामलों में ऑनलाइन सुनवाई को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की जाएगी।

परिवार का वयस्क सदस्य भी कर सकेगा प्रतिनिधित्व

अगर किसी मामले में सुनवाई जरूरी होती है, तो मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से अधिकृत कर सकता है।

इसका मतलब है कि हर मामले में संबंधित मतदाता को खुद ERO या AERO कार्यालय पहुंचना जरूरी नहीं होगा। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा को भी मजबूत करने की बात कही है।

यह व्यवस्था खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जिन्हें काम, दूरी, उम्र या दूसरी व्यावहारिक परेशानियों के कारण सरकारी कार्यालय तक पहुंचने में कठिनाई होती है।

गरीब, मजदूर और बेघर लोगों के लिए हेल्प डेस्क

आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को रात में आश्रय स्थलों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क या विशेष शिविर लगाने के निर्देश से जुड़ी जानकारी भी दी है।

इसका उद्देश्य ऐसे मतदाताओं को SIR प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज और दावे-आपत्तियां दाखिल करने में सहायता देना है।

चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता सूची की प्रक्रिया में किसी पात्र व्यक्ति को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर मिलना चाहिए।

महाराष्ट्र में भी बदली गई समयसीमा

SIR को लेकर महाराष्ट्र में भी समयसीमा में बदलाव किया गया है। वहां दावे और आपत्तियां दाखिल करने की तारीख 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है।

वहीं नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।

इस तरह दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया के लिए अलग-अलग समयसीमा लागू होगी। मतदाताओं के लिए संबंधित राज्य की आधिकारिक चुनावी सूचना के अनुसार अपनी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा।

चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों पर क्या कहा?

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि इससे पहले रिपोर्टों में निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से SIR तथा आयोग के कुछ फैसलों पर आपत्तियां जताए जाने की बात सामने आई थी।

The Indian Express की रिपोर्ट में दोनों निर्वाचन आयुक्तों द्वारा पिछले 10 महीनों में कई मामलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया। रिपोर्ट में Form 6, मतदाता डेटाबेस तक पहुंच और SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर उनकी चिंताओं का उल्लेख है।

इसके विपरीत, चुनाव आयोग ने शनिवार को कहा कि SIR से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं। आयोग ने अपने आधिकारिक रुख में आंतरिक कामकाज और संबंधित पत्राचार को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया।

इसलिए फिलहाल दो अलग पहलू सामने हैं—कुछ मीडिया रिपोर्टों में आंतरिक आपत्तियों का उल्लेख है, जबकि आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताता है।

मतदाताओं के लिए अब क्या बदला?

SIR प्रक्रिया में बदलावों को आसान भाषा में समझें तो मुख्य बातें ये हैं:

  • दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 है।
  • नोटिस, दावे और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।
  • नोटिस पाने वाले हर व्यक्ति को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए ERO कार्यालय जाना जरूरी नहीं होगा।
  • जरूरत पड़ने पर BLO घर जाकर दस्तावेज जुटाने और ECINet पर अपलोड करने में मदद करेंगे।
  • विशेष मामलों में ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
  • मतदाता सुनवाई के लिए परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अधिकृत कर सकता है।
  • गरीबों, मजदूरों और बेघर लोगों के लिए हेल्प डेस्क या विशेष शिविर लगाए जाएंगे।

मतदाता सूची में नाम से जुड़ी किसी भी समस्या वाले लोगों के लिए अब सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपनी स्थिति की जांच करें और निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक दावा, आपत्ति या दस्तावेज जमा करें। चुनाव आयोग की आधिकारिक मतदाता सेवाओं के जरिए भी मतदाता संबंधी जानकारी देखी जा सकती है।

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