छात्रों के अधिकारों पर CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान, बोले- कोर्ट आंखें नहीं मूंदेगा

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पटना में CJI सूर्यकांत ने छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर अहम बात कही। CJI सूर्यकांत ने चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) में छात्रों से सीधे संवाद के दौरान कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के इस अधिकार का उल्लंघन होता है, तो अदालतें आंखें नहीं मूंदेंगी।

सीजेआई ने यह बात किसी औपचारिक भाषण में नहीं, बल्कि छात्रों के सवाल-जवाब के दौरान कही। बातचीत में पुलिस कार्रवाई, कॉलेजियम की पारदर्शिता और कानून की पढ़ाई से जुड़े सुधार जैसे मुद्दे सामने आए।

पुलिस कार्रवाई और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर क्या बोले CJI?

CNLU की एक छात्रा ने छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़ा सवाल पूछा। सवाल दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों के संदर्भ में था।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना छात्रों का मौलिक अधिकार है और न्यायपालिका इस अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस कार्रवाई में कथित अतिरेक के मामलों को अदालतें नजरअंदाज नहीं करेंगी।

यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब NEET प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने भी आया था। जुलाई में CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि केवल आंदोलन होने के आधार पर पुलिस कार्रवाई या लाठीचार्ज को उचित नहीं माना जा सकता और पुलिस बल के कथित अतिरेक की स्वतंत्र जांच की जरूरत हो सकती है।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIRs को भी रद्द किया था। अदालत ने यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए दिया था।

कॉलेजियम की असहमति सार्वजनिक क्यों नहीं होती?

CNLU में बातचीत के दौरान एक छात्र ने कॉलेजियम व्यवस्था से जुड़ा सवाल भी पूछा। छात्र ने जानना चाहा कि कॉलेजियम के भीतर असहमति वाले विचार दर्ज किए जाते हैं, लेकिन उन्हें हमेशा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता।

इस पर CJI सूर्यकांत ने व्यक्तिगत गरिमा और पारदर्शिता के बीच संतुलन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि किसी विचाराधीन व्यक्ति के बारे में नकारात्मक टिप्पणी सार्वजनिक होने पर उसकी स्थिति असहज हो सकती है।

CJI के मुताबिक, यदि कॉलेजियम की कार्यवाही में किसी जज को लेकर नकारात्मक टिप्पणी सार्वजनिक हो जाए, तो इससे संबंधित न्यायाधीश के लिए आगे काम करना मुश्किल स्थिति पैदा कर सकता है।

उन्होंने संकेत दिया कि न्यायिक संस्थाओं में पारदर्शिता महत्वपूर्ण है, लेकिन व्यक्तिगत गरिमा और गोपनीयता से जुड़े कुछ पहलुओं की भी अपनी सीमाएं होती हैं।

CNLU पहुंचे CJI सूर्यकांत, चीफ जस्टिस भी रहे साथ

CJI सूर्यकांत ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव के साथ CNLU परिसर का दौरा किया। विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ हुई बातचीत सीधे सवाल-जवाब के प्रारूप में हुई।

इस दौरान छात्रों को न्यायपालिका के कामकाज, संवैधानिक अधिकारों और कानून की शिक्षा से जुड़े विषयों पर सवाल पूछने का अवसर मिला। CJI ने बिना औपचारिक भाषण के छात्रों के सवालों का जवाब दिया।

पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश CNLU के पदेन कुलाधिपति भी होते हैं। ऐसे में CJI और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का विश्वविद्यालय परिसर में साथ पहुंचना कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

5 साल की लॉ डिग्री पर भी हुई अहम चर्चा

CNLU के वाइस चांसलर और कानून विशेषज्ञ फैजान मुस्तफा के कानूनी शिक्षा से जुड़े प्रस्ताव की भी CJI सूर्यकांत ने सराहना की।

प्रस्ताव में पांच साल की लॉ डिग्री को चार साल की अकादमिक पढ़ाई और अंतिम वर्ष में अनिवार्य कोर्ट अप्रेंटिसशिप में बदलने की बात कही गई है।

इस मॉडल में छात्रों को पढ़ाई के साथ अदालतों के कामकाज का व्यावहारिक अनुभव देने पर जोर है। प्रस्ताव के समर्थक दृष्टिकोण के अनुसार, इससे कानून की पढ़ाई और वास्तविक न्यायिक प्रक्रिया के बीच की दूरी कम हो सकती है।

CJI सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था लागू होने पर न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए अलग से एक साल की प्रैक्टिस की आवश्यकता खत्म करने में मदद मिल सकती है।

कानूनी शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण का मुद्दा पहले भी चर्चा में रहा है। देश के कानून संस्थानों में पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और न्यायिक सेवा की तैयारी को लेकर समय-समय पर सुधार के सुझाव सामने आते रहे हैं।

छात्रों के लिए CJI की बातचीत क्यों अहम रही?

CNLU में हुई बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि छात्रों को सीधे देश के मुख्य न्यायाधीश से सवाल पूछने का मौका मिला।

शांतिपूर्ण विरोध, पुलिस कार्रवाई, कॉलेजियम की कार्यप्रणाली और कानूनी शिक्षा जैसे अलग-अलग मुद्दों पर सवालों ने न्याय व्यवस्था और कानून की पढ़ाई के बीच संबंध को भी सामने रखा।

CJI सूर्यकांत का संदेश यह था कि शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत विरोध के अधिकार की संवैधानिक सुरक्षा महत्वपूर्ण है। साथ ही, न्यायिक संस्थाओं में पारदर्शिता और व्यक्तिगत गरिमा के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।

इस बातचीत ने यह भी दिखाया कि कानून के विद्यार्थियों के लिए न्यायपालिका केवल अदालतों में होने वाली सुनवाई तक सीमित विषय नहीं है। संवैधानिक अधिकार, संस्थागत पारदर्शिता और व्यावहारिक कानूनी प्रशिक्षण भी उनकी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

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