समस्तीपुर : स्कूल में अचानक पहुंचे SDO, कुर्सी छोड़ बने शिक्षक और बच्चों को पढ़ाया भूगोल

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें


 

समस्तीपुर में स्कूल निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारी का ऐसा अंदाज देखने को मिला, जिसने बच्चों के साथ शिक्षकों को भी प्रभावित किया। सदर एसडीओ राकेश कुमार अचानक कचहरी रोड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय पहुंचे। स्कूल निरीक्षण के दौरान उन्होंने सिर्फ उपस्थिति और व्यवस्था की जांच नहीं की, बल्कि कक्षा 8 में शिक्षक की भूमिका भी निभाई और ब्लैकबोर्ड पर बच्चों को भूगोल पढ़ाया।

एसडीओ ने छात्रों से सवाल पूछकर उनकी समझ परखी और सरल तरीके से विषय की जानकारी दी। बच्चों ने भी बिना झिझक उनके सवालों के जवाब दिए। अधिकारी के इस प्रयास को शिक्षा व्यवस्था को करीब से समझने और बच्चों का मनोबल बढ़ाने की पहल के तौर पर देखा गया।

अचानक स्कूल पहुंचे सदर एसडीओ

कचहरी रोड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में सदर एसडीओ राकेश कुमार ने औचक निरीक्षण किया। उनके पहुंचते ही विद्यालय की शैक्षणिक और बुनियादी व्यवस्थाओं की जांच शुरू हुई।

उन्होंने सबसे पहले विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति और पठन-पाठन की स्थिति का जायजा लिया। कक्षा संचालन के साथ शिक्षकों की तैयारी और बच्चों के सीखने के माहौल को भी देखा गया।

एसडीओ ने शिक्षकों द्वारा तैयार की जाने वाली ‘पाठ टीका’ का भी अवलोकन किया। उन्होंने शिक्षकों को शिक्षण कार्य को प्रभावी बनाने और बच्चों तक विषय की समझ बेहतर तरीके से पहुंचाने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल में पढ़ाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। शिक्षक यह सुनिश्चित करें कि कक्षा में मौजूद प्रत्येक बच्चे को पाठ समझ में आए।

कक्षा 8 में खुद संभाला ब्लैकबोर्ड

निरीक्षण के दौरान एसडीओ कक्षा 8 में पहुंचे। यहां उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी के बजाय शिक्षक की भूमिका में बच्चों के साथ संवाद किया।

उन्होंने खुद ब्लैकबोर्ड संभाला और विद्यार्थियों को भूगोल पढ़ाना शुरू किया। उन्होंने विषय को सरल तरीके से समझाने के साथ बच्चों से सवाल भी पूछे।

बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ सवालों के जवाब दिए। कक्षा का यह माहौल सामान्य निरीक्षण से अलग नजर आया।

एसडीओ ने बच्चों की भागीदारी पर ध्यान दिया और यह समझने का प्रयास किया कि वे पढ़ाए जा रहे विषय को किस स्तर तक समझ पा रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करती है।

शिक्षकों को पढ़ाई बेहतर करने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान एसडीओ ने शिक्षकों से कहा कि कक्षा में बच्चों को केवल पाठ पूरा कराने के उद्देश्य से न पढ़ाया जाए।

शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चों में विषय की समझ विकसित करना होना चाहिए। इसके लिए शिक्षक सरल भाषा, उदाहरण और बच्चों की भागीदारी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

‘पाठ टीका’ की समीक्षा के जरिए एसडीओ ने शिक्षकों की तैयारी और पाठ संचालन की स्थिति को भी समझा।

विद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर करने के लिए उन्होंने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण का मुख्य फोकस बच्चों की पढ़ाई, शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालय के वातावरण को बेहतर बनाए रखना रहा।

मिड-डे मील की रसोई भी जांची

कक्षा में बच्चों को पढ़ाने के बाद एसडीओ ने विद्यालय की रसोई का भी निरीक्षण किया। उन्होंने मध्याह्न भोजन यानी मिड-डे मील की व्यवस्था को करीब से देखा।

रसोईघर में साफ-सफाई, खाद्य सामग्री और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी ली गई। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए।

एसडीओ ने कहा कि बच्चों को ताजा, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन मिलना जरूरी है। इसके लिए रसोईघर में साफ-सफाई की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा।

उन्होंने सरकार की ओर से निर्धारित मेन्यू का पालन सुनिश्चित करने को कहा। भोजन की गुणवत्ता में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

साफ-सफाई और पेयजल पर भी जोर

विद्यालय निरीक्षण के दौरान बच्चों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया।

एसडीओ ने स्कूल परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था को बेहतर रखने के निर्देश दिए। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।

स्कूल में साफ वातावरण और सुरक्षित पेयजल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए इन सुविधाओं की नियमित निगरानी की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

विद्यालय में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण मिलना भी शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

बच्चों से सीधे संवाद का मिला मौका

एसडीओ के कक्षा में जाकर पढ़ाने से बच्चों को प्रशासनिक अधिकारी से सीधे संवाद करने का अवसर मिला।

आमतौर पर अधिकारी स्कूल निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं की जांच करते हैं, लेकिन इस दौरान राकेश कुमार ने बच्चों के बीच बैठकर उनकी शैक्षणिक समझ को भी परखने की कोशिश की।

भूगोल पढ़ाते समय सवाल-जवाब के जरिए बच्चों को कक्षा में सक्रिय रखने का प्रयास किया गया। इससे विद्यार्थियों को भी अपने सवाल और जवाब खुलकर रखने का मौका मिला।

ऐसी गतिविधियां बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें यह संदेश भी देती हैं कि अधिकारी और शिक्षक उनकी शिक्षा को लेकर गंभीर हैं।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर प्रशासन का फोकस

समस्तीपुर में हुए इस निरीक्षण से यह संकेत मिलता है कि स्कूलों में केवल शिक्षक और छात्रों की उपस्थिति देखना ही पर्याप्त नहीं है।

कक्षा में वास्तविक पढ़ाई किस स्तर पर हो रही है, बच्चे विषय को कितना समझ रहे हैं, शिक्षक किस तरह पाठ की तैयारी करते हैं और स्कूल में बुनियादी सुविधाएं कैसी हैं—इन सभी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।

सदर एसडीओ के निरीक्षण में भी इन विभिन्न बिंदुओं को देखा गया। शिक्षकों की उपस्थिति से लेकर पाठ टीका, मिड-डे मील, पेयजल और स्वच्छता तक की व्यवस्था की समीक्षा की गई।

वहीं, कक्षा 8 में खुद भूगोल पढ़ाकर एसडीओ ने बच्चों की शैक्षणिक समझ को करीब से जानने की कोशिश की।

समस्तीपुर के इस स्कूल निरीक्षण की खास बात यही रही कि अधिकारी ने केवल व्यवस्थाओं की जांच तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने बच्चों के बीच जाकर पढ़ाया, सवाल पूछे और शिक्षकों को शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने का संदेश दिया।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1