समस्तीपुर में गंगा का कहर! खतरे के निशान के पार पानी, नाव बनी सहारा
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समस्तीपुर गंगा जलस्तर लगातार बढ़ते हुए रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है। समस्तीपुर गंगा जलस्तर रविवार को 48.20 मीटर तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान से 2.70 मीटर ऊपर है। मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर प्रखंड के कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने से हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्रामीण सड़कों पर पानी बह रहा है और कई स्थानों पर आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
48.20 मीटर पहुंचा गंगा का जलस्तर
सरारी कैंप पर तैनात जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता मनीष कुमार गुप्ता के अनुसार, गंगा का जलस्तर 48.20 मीटर दर्ज किया गया है। खतरे का निशान 45.50 मीटर है। इस तरह नदी का पानी खतरे के निशान से 2.70 मीटर ऊपर पहुंच चुका है। अधिकारियों के मुताबिक जलस्तर में बढ़ोतरी अभी जारी है, जिससे तटवर्ती इलाकों में चिंता बनी हुई है। मोहिउद्दीननगर दक्षिणी और करीमनगर पंचायत समेत कई इलाकों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है। गंगा के साथ वाया नदी का पानी बढ़ने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है।
घरों में घुसा पानी, ऊंची जगहों पर पहुंचे लोग
पानी बढ़ने के बाद कई परिवार अपने मवेशियों के साथ बांध और अन्य ऊंचे स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के सामने पीने के पानी के साथ-साथ पशुओं के चारे की समस्या भी खड़ी हो गई है। कुछ इलाकों में सड़कें पानी में डूब गई हैं। ऐसे में सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है। जरूरत पड़ने पर लोगों को नाव के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। राहत और बचाव कार्यों को भी जरूरत के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है।
डुमरी बांध में रिसाव से मचा हड़कंप
मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र में डुमरी बांध में शनिवार देर रात रिसाव की सूचना मिलने के बाद प्रशासन और जल संसाधन विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। काफी प्रयास के बाद बांध के रिसाव को ठीक किया गया। मुख्य अभियंता ने मौके पर चल रहे कार्य की निगरानी की। धर्मपुर स्थित रिंग बांध पर भी पानी का दबाव बढ़ने की सूचना मिली। इसके बाद बांध के कमजोर हिस्से पर बैग डालकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। कार्रवाई के बाद आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
70 से ज्यादा स्कूल बंद, बच्चों की सुरक्षा पर जोर
बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए प्रभावित इलाकों के कई स्कूलों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। मोहिउद्दीननगर के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सृष्टि सागर के अनुसार, 45 स्कूल पूरी तरह बंद किए गए हैं, जबकि 15 स्कूलों को आंशिक रूप से बंद किया गया है। वहीं, मोहनपुर में भी गंगा से प्रभावित 20 से अधिक स्कूलों को बंद किया गया है। प्रशासन का प्राथमिक फोकस बच्चों को बाढ़ के पानी से सुरक्षित रखना है।
माइकिंग कर बच्चों को लेकर दी जा रही चेतावनी
गंगा और वाया नदी के बढ़ते पानी के बीच प्रशासन लोगों को लगातार सतर्क कर रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में माइकिंग के जरिए ग्रामीणों को जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की जा रही है। लोगों से खास तौर पर छोटे बच्चों को पानी वाले इलाकों में अकेले नहीं भेजने को कहा जा रहा है। पानी से भरे गड्ढों, नालों और डूबे हुए रास्तों के पास भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन की अपील है कि अभिभावक बच्चों पर लगातार नजर रखें और खतरे वाले स्थानों से उन्हें दूर रखें।
पशुपालकों के लिए 11 जगहों पर सामुदायिक किचन
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में केवल लोगों ही नहीं, बल्कि पशुपालकों के सामने भी बड़ी चुनौती है। सुरक्षित स्थानों पर रह रहे पशुपालकों के लिए सामुदायिक किचन की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों के मुताबिक मोहिउद्दीननगर में छह और मोहनपुर में पांच स्थानों पर सामुदायिक किचन चल रहे हैं। इससे प्रभावित पशुपालकों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा अलग-अलग स्थानों पर रहने वाले पशुपालकों के बीच सूखा चारा भी वितरित किया गया है। पशुपालन विभाग ने पशु चिकित्सा शिविर भी शुरू किए हैं।
149 नावों से हो रही लोगों की आवाजाही
बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में नावों का परिचालन किया जा रहा है। मोहिउद्दीननगर अंचल में फिलहाल 84 नावें चल रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि जहां नाव की ज्यादा जरूरत है, वहां प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य बाढ़ में फंसे लोगों को आवाजाही की सुविधा देना और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। मोहनपुर में भी 65 नावों का परिचालन किया जा रहा है। दोनों प्रखंडों में कुल 149 नावें लोगों की मदद में लगी हैं।
मेडिकल कैंप और पॉलीथिन शीट की भी व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए प्रशासन ने मेडिकल कैंप लगाने के साथ राहत सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर भी नजर रखी जा रही है। जरूरतमंद परिवारों को पॉलीथिन शीट बांटी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, पॉलीथिन शीट की कमी नहीं है और जरूरत के अनुसार लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। पशुओं के लिए चिकित्सा शिविर और चारे की व्यवस्था भी राहत अभियान का हिस्सा है। प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ के दौरान लोगों और पशुओं दोनों को जरूरी सहायता मिलती रहे।
प्रशासन की सक्रियता से लोगों को राहत की उम्मीद
लगातार बढ़ते गंगा जलस्तर ने समस्तीपुर के तटवर्ती इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। घरों में पानी घुसने, सड़कों के डूबने और बांधों पर दबाव बढ़ने से ग्रामीणों की परेशानी साफ दिखाई दे रही है। हालांकि, नावों के परिचालन, सामुदायिक किचन, मेडिकल कैंप, पशु चिकित्सा शिविर और बांधों की निगरानी जैसे कदमों से राहत अभियान को गति मिली है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती गंगा के बढ़ते जलस्तर पर नजर बनाए रखना और कमजोर बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रहने की स्थिति में प्रशासन को प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव व्यवस्था और मजबूत करनी पड़ सकती है।