बिहार में बाढ़ का कहर तेज, गंगा ने तोड़ा HFL रिकॉर्ड; 11 जिलों में 19.57 लाख प्रभावित

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बिहार में बिहार बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। बिहार बाढ़ के बीच गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से राज्य के 11 जिलों में 19.57 लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। पटना के गांधी घाट पर गंगा का पानी हाईएस्ट फ्लड लेवल (HFL) के पुराने रिकॉर्ड को पार कर चुका है। हालात को देखते हुए निचले इलाकों में प्रशासन ने अलर्ट बढ़ा दिया है और जलस्तर, तटबंधों तथा संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर से पटना में बढ़ी चिंता

पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर HFL के निशान से ऊपर पहुंच गया है। इससे नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

जल संसाधन विभाग के अनुसार, गांधी घाट से नीचे की ओर आने वाले इलाकों में जलस्तर की स्थिति गंभीर बनी हुई है। अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

हाथीदह में भी स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि वहां गंगा का जलस्तर पिछले HFL रिकॉर्ड को पार कर सकता है। अगले कुछ दिनों तक हाथीदह और इसके बाद के निचले इलाकों में स्थित गेज स्टेशनों पर जलस्तर गंभीर रहने की संभावना है।

11 जिलों में लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित

आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल समेत 11 जिलों में करीब 19.57 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

बाढ़ और जलभराव का असर कई प्रखंडों और ग्राम पंचायतों तक पहुंचा है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव व्यवस्था को मजबूत करने के साथ जरूरत के मुताबिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी रखी है।

खास तौर पर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार में नदी किनारे बसे क्षेत्रों को लेकर अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

गंडक, कोसी और सोन नदी का भी बढ़ा दबाव

बिहार में सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि गंडक, कोसी और सोन नदियों के जलस्तर और डिस्चार्ज पर भी प्रशासन की नजर है।

6 सितंबर तक वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक नदी का डिस्चार्ज करीब 1,29,000 क्यूसेक दर्ज किया गया, जो फिलहाल स्थिर बताया गया है। वहीं बीरपुर बैराज पर कोसी नदी का डिस्चार्ज 1,73,255 क्यूसेक रहा।

इंद्रपुरी बैराज पर सोन नदी का डिस्चार्ज 2,27,717 क्यूसेक दर्ज किया गया। हालांकि सोन के डिस्चार्ज में कमी का रुझान देखने को मिला है।

गंगा के साथ गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती जैसी नदियां भी कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इससे नदी किनारे और निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

NDRF और SDRF की टीमें राहत कार्य में जुटीं

बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रभावित जिलों में राहत-बचाव अभियान तेज किया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, NDRF की 10 और SDRF की 27 टीमें तैनात की गई हैं।

जल संसाधन विभाग ने अधिकारियों को तटबंधों, संवेदनशील स्थानों और निचले इलाकों की नियमित निगरानी करने को कहा है। किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए पहले से एहतियाती कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बाढ़ नियंत्रण से जुड़े संसाधनों और मशीनरी को तैयार रखने के लिए संबंधित विभागों और फील्ड इंजीनियरों को निर्देशित किया गया है।

110 सामुदायिक रसोई में लोगों को मिल रहा भोजन

बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं। फिलहाल 110 सामुदायिक रसोई चल रही हैं, जहां करीब 1.98 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है।

विस्थापित लोगों के लिए एक राहत शिविर भी बनाया गया है। यहां 326 बाढ़ प्रभावित लोगों के रहने, भोजन और चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा प्रभावित परिवारों के बीच करीब 55,500 पॉलीथीन शीट और 10,400 सूखे राशन के पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।

जलमग्न क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही और जरूरतमंदों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए 1,345 नावें संचालित की जा रही हैं।

अगले दो दिनों में बारिश से फिर बढ़ सकती है परेशानी

मौसम को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। राज्य में 1 जून से 6 सितंबर के बीच औसतन 590.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।

बिहार मौसम विज्ञान सेवा केंद्र ने अगले दो दिनों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है। कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना भी बताई गई है।

ऐसे में पहले से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बारिश होने पर जलस्तर और जलभराव की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया है।

तेजस्वी यादव ने की राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग

बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार से राज्य की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है।

उन्होंने बिहार के लिए 5,000 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता और राहत-बचाव कार्यों के लिए वायु सेना के हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने की मांग रखी है।

तेजस्वी यादव ने दावा किया कि राज्य का बड़ा हिस्सा बाढ़ से प्रभावित है और कई जिले गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेने तथा तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग भी की।

हालांकि, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित आवागमन, भोजन, चिकित्सा और लगातार बढ़ते जलस्तर से बचाव की है। प्रशासन की टीमें संवेदनशील इलाकों में निगरानी और राहत कार्य जारी रखे हुए हैं।

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