MLC चुनाव से पहले RJD में घमासान, रोहिणी के बयान से बढ़ी हलचल

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बिहार में RJD MLC चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। RJD MLC चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनता दल ने छह सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किए, लेकिन इसके तुरंत बाद रोहिणी आचार्या की टिप्पणी ने पार्टी के भीतर चर्चा बढ़ा दी है। लालू यादव की बेटी ने उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि लंबे समय से पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की जगह अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता दी गई है।

रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की। उनके बयान के बाद राजद के उम्मीदवार चयन, संगठन में आंतरिक लोकतंत्र और पार्टी की विचारधारा को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

छह विधान परिषद सीटों पर RJD ने घोषित किए उम्मीदवार

राजद ने 11 सितंबर को विधान परिषद की छह सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक किए। पार्टी की ओर से घोषित सूची में अलग-अलग शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

राजद के घोषित उम्मीदवारों की सूची इस प्रकार है:

निर्वाचन क्षेत्रRJD उम्मीदवार
पटना शिक्षक          डॉ. संजीव कुमार सिंह
पटना स्नातक          दिलीप कुमार
कोसी स्नातक          नितेश कुमार
दरभंगा स्नातक          अनिल कुमार झा
सारण शिक्षक          प्रो. जयराम यादव
तिरहुत स्नातक          डॉ. रश्मि विनायक गौतम

राजद ने अभी दो सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं। ऐसे में बाकी सीटों पर पार्टी के अगले फैसले को भी राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विधान परिषद की इन सीटों पर चुनावी मुकाबला इसलिए भी अहम है क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच राजनीतिक दलों की पकड़ की परीक्षा होती है।

रोहिणी आचार्या ने उम्मीदवार चयन पर क्या कहा?

उम्मीदवारों की घोषणा के बाद रोहिणी आचार्या ने टिकट बंटवारे के तरीके पर सवाल उठाया। उन्होंने अपने पोस्ट में वैचारिक निष्ठा और लंबे राजनीतिक संघर्ष को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

उनका कहना था कि चुनाव से ठीक पहले पार्टी में आने वाले अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता देना उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय है, जिन्होंने लंबे समय तक संगठन के लिए संघर्ष किया।

रोहिणी ने यह भी कहा कि दशकों तक पार्टी और संगठन को मजबूत करने वाले नेताओं को दरकिनार करना जमीनी कैडर के प्रति उदासीनता को दिखाता है।

उनके अनुसार, ऐसा फैसला केवल समर्पित कार्यकर्ताओं की नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पार्टी की विचारधारा और संगठन की मजबूती पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि, उम्मीदवार चयन को लेकर राजद नेतृत्व की ओर से रोहिणी आचार्या के बयान पर किसी विस्तृत प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।

चुनाव से पहले फिर सामने आया परिवार का मतभेद

रोहिणी आचार्या का ताजा बयान लालू परिवार और राजद के भीतर मतभेद की चर्चाओं के बीच आया है। इससे पहले भी वह पार्टी के कुछ फैसलों को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रख चुकी हैं।

पार्टी के संगठनात्मक फैसलों में तेजस्वी यादव की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चा होती रही है। मौजूदा दौर में राजद की चुनावी रणनीति और संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में तेजस्वी यादव की प्रमुख भूमिका मानी जाती है।

रोहिणी की ताजा टिप्पणी इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि यह सीधे उम्मीदवार चयन और पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं की भूमिका से जुड़ी है।

इससे पहले विधान परिषद चुनाव के दौरान भी उम्मीदवारों के चयन को लेकर उनके असंतोष की चर्चा हुई थी। 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद के प्रदर्शन और हार के कारणों को लेकर भी परिवार के भीतर मतभेद की खबरें सामने आई थीं।

हालांकि, इन राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। इसलिए पार्टी के आधिकारिक बयान और संबंधित नेताओं की पुष्टि को ही अंतिम आधार माना जाना चाहिए।

नवंबर में पूरा होगा आठ MLC का कार्यकाल

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल इसी साल नवंबर में पूरा होने वाला है। इनमें शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं।

इन सीटों पर वर्तमान में अलग-अलग राजनीतिक दलों और निर्दलीय सदस्यों का प्रतिनिधित्व है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पटना शिक्षक सीट से बीजेपी के नवल किशोर यादव, दरभंगा शिक्षक से कांग्रेस के मदन मोहन झा और सारण शिक्षक से निर्दलीय अफाक अहमद मौजूदा सदस्यों में शामिल हैं।

तिरहुत शिक्षक सीट पर सीपीआई के संजय कुमार सिंह हैं। वहीं पटना स्नातक से जदयू के नीरज कुमार, तिरहुत स्नातक से निर्दलीय वंशीधर ब्रजवासी, दरभंगा स्नातक से निर्दलीय सर्वेश कुमार और कोसी स्नातक से बीजेपी के एनके यादव का कार्यकाल भी पूरा होने वाला है।

इस तरह आठ सीटों का चुनाव विधान परिषद में दलों के समीकरण पर असर डाल सकता है।

RJD के लिए क्यों महत्वपूर्ण है MLC चुनाव?

विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता समूह सीमित और विशेष श्रेणियों से जुड़ा होता है।

ऐसे में उम्मीदवार का स्थानीय संपर्क, संगठन की सक्रियता और लंबे समय से क्षेत्र में काम करने की छवि चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।

राजद ने जिन छह सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं, वहां अब पार्टी के सामने संगठन को एकजुट रखने और उम्मीदवारों के पक्ष में प्रभावी चुनावी अभियान चलाने की चुनौती होगी।

रोहिणी आचार्या के बयान के बाद टिकट वितरण को लेकर पार्टी समर्थकों के बीच होने वाली चर्चा भी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

आगे क्या होगा?

अब निगाहें राजद की बाकी दो सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि रोहिणी आचार्या की आपत्ति का पार्टी के जमीनी संगठन और चुनावी अभियान पर कितना प्रभाव पड़ता है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि विधान परिषद चुनाव की तैयारी के बीच उम्मीदवार चयन ने राजद के भीतर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में अन्य दलों की सूची और चुनावी रणनीति सामने आने के साथ मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।

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