UCC पर NDA में बढ़ी हलचल, रामकृपाल यादव ने फैसले को बताया सही

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 बिहार में UCC यानी समान नागरिक संहिता को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। UCC पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद एनडीए के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आने लगी है। शाह ने वर्ष 2029 से पहले भाजपा और भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही है। इसके बाद बिहार में जदयू ने स्पष्ट किया कि राज्य में UCC लागू करने का सवाल ही नहीं उठता। इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव का बयान सामने आया है। उन्होंने केंद्र सरकार के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार UCC को लेकर प्रतिबद्ध है और इस संबंध में जो भी फैसला लिया जाएगा, वह सोच-विचार के बाद लिया जाएगा।

अमित शाह के बयान से बिहार की राजनीति गरमाई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के UCC को लेकर दिए गए बयान के बाद बिहार की राजनीति में इस मुद्दे ने नई जगह बना ली है। खास बात यह है कि विरोध की आवाज केवल विपक्ष की तरफ से नहीं, बल्कि एनडीए के घटक दलों की ओर से भी सुनाई दे रही है। बिहार में जदयू की ओर से कहा गया है कि पार्टी ने संसद में UCC का समर्थन किया था, लेकिन राज्य में इसे लागू नहीं होने देने की बात भी पहले स्पष्ट की जा चुकी है। ऐसे में भाजपा और जदयू के रुख में अंतर ने बिहार एनडीए के भीतर संभावित मतभेदों को लेकर राजनीतिक चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, अंतिम निर्णय से पहले घटक दलों के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है।

रामकृपाल यादव ने सरकार के फैसले को बताया सही

UCC को लेकर पूछे गए सवाल पर रामकृपाल यादव ने केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार समान नागरिक संहिता को लेकर प्रतिबद्ध है। रामकृपाल यादव के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगले तीन वर्षों में एनडीए शासित राज्यों में UCC लागू करने का निर्णय बताया है। उन्होंने सरकार के फैसले को सही बताते हुए कहा कि सरकार जो भी निर्णय लेती है, वह देशहित को ध्यान में रखकर लेती है। उनके इस बयान को बिहार में भाजपा के रुख के तौर पर भी देखा जा रहा है। वहीं, जदयू की अलग राय के कारण आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर एनडीए के भीतर चर्चा और तेज हो सकती है।

NDA के घटक दलों से बातचीत के बाद होगा फैसला

रामकृपाल यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि UCC जैसे महत्वपूर्ण विषय पर एनडीए के घटक दलों से बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार सभी सहयोगी दलों के साथ विचार-विमर्श करके सर्वसम्मति बनाने की कोशिश करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले में जल्दबाजी के बजाय सभी पक्षों की राय पर विचार किया जाएगा। इसके बाद जो फैसला बेहतर होगा, सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ेगी। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि बिहार में UCC को लेकर भाजपा और जदयू के बीच संवाद की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। जदयू पहले ही राज्य में UCC लागू करने के सवाल पर अपना रुख स्पष्ट कर चुका है।

तेजस्वी यादव के बयान पर भी रामकृपाल का पलटवार

UCC के अलावा रामकृपाल यादव ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के भाजपा को लेकर दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। पत्रकारों ने जब उनसे तेजस्वी यादव के भाजपा को देश विरोधी पार्टी बताने वाले बयान के बारे में पूछा, तो उन्होंने इस आरोप को खारिज किया। रामकृपाल यादव ने भाजपा को देशभक्त पार्टी बताते हुए कहा कि पार्टी ने देश के निर्माण में योगदान दिया है। उन्होंने भाजपा के कार्यकर्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी से जुड़े कई लोगों ने देश के लिए अपना जीवन तक समर्पित किया है। इस तरह उन्होंने तेजस्वी यादव के आरोप पर सीधा राजनीतिक पलटवार किया।

राजद पर परिवारवाद का आरोप

रामकृपाल यादव ने इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल पर भी निशाना साधा। उन्होंने राजद को परिवारवाद की राजनीति करने वाली पार्टी बताया। उन्होंने तेजस्वी यादव और राजद नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी परिवारवाद और राजनीतिक ढकोसले की राजनीति करती है। भाजपा नेता के इस बयान से बिहार में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं। बिहार की राजनीति में UCC का मुद्दा अब केवल भाजपा और विपक्ष के बीच बहस तक सीमित नहीं दिख रहा है। एनडीए के भीतर अलग-अलग घटक दलों की राय भी इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बना रही है।

बिहार में आगे क्या होगा?

फिलहाल बिहार में UCC को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि भाजपा और जदयू के अलग-अलग रुख के बीच एनडीए किस तरह सहमति बनाता है। रामकृपाल यादव ने घटक दलों के साथ बातचीत के बाद निर्णय लेने की बात कही है। ऐसे में आने वाले समय में एनडीए की बैठक और सहयोगी दलों की राय इस मुद्दे की दिशा तय कर सकती है। वहीं, जदयू के स्पष्ट विरोध के कारण बिहार में UCC को लागू करने का रास्ता राजनीतिक रूप से आसान नहीं माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि केंद्र और बिहार एनडीए के सहयोगी दल इस संवेदनशील मुद्दे पर किस तरह की सहमति बनाते हैं।

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