राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ पर बड़ा आरोप, BJP-RSS और EC पर निशाना

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कथित वोट चोरी को लेकर BJP, RSS और निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने वोट चोरी को भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में न्याय होगा।

राहुल गांधी की यह टिप्पणी द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद सामने आई, जिसमें निर्वाचन आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दों का उल्लेख है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि वोट चोरी भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध है और संविधान पर सीधा हमला है।

उन्होंने BJP, RSS और निर्वाचन आयोग पर इसे अंजाम देने का आरोप लगाते हुए इसे ‘देशद्रोह’ का कृत्य बताया और कहा कि न्याय किया जाएगा। उनके पोस्ट के साथ एक वीडियो भी साझा किया गया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को भी संबोधित किया और कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ‘वोट चोरी’ और ‘देशद्रोह’ को लेकर राहुल गांधी की बातें राजनीतिक आरोप और उनका बयान हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों को किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।

क्या है चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियों का मामला?

द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर 2026 की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आपत्तियां एक ही दिन में कई मामलों को लेकर दर्ज की गई थीं।

इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने, नाम बहाल करने की प्रक्रिया और चुनावी डेटा तक अधिकारियों की पहुंच जैसे मुद्दों से बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कुछ कदमों को ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ बताया। हालांकि, ये शब्द उन दोनों आयुक्तों की आपत्तियों में इस्तेमाल किए गए थे, न कि इस खबर में किसी स्वतंत्र न्यायिक निष्कर्ष के रूप में।

Form 6 में बदलाव को लेकर क्या विवाद है?

रिपोर्ट में नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलाव का भी उल्लेख है।

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, Form 6 में एक नया सवाल जोड़ा गया था, जिसमें आवेदक से पुराने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की मतदाता सूची में अपने या माता-पिता/दादा-दादी के नाम से संबंधित जानकारी मांगी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि वैधानिक Form 6 में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी होगा। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगस्त में संधू ने इस बदलाव को ‘अनधिकृत और अवैध’ बताते हुए इसे हटाने की बात कही थी।

मतदाता डेटा के केंद्रीकरण पर भी उठे सवाल

चुनाव आयोग के भीतर उठाई गई दूसरी बड़ी चिंता मतदाता सूची के डिजिटल डेटा तक पहुंच से जुड़ी बताई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटा के केंद्रीकरण को लेकर सवाल उठाए और चिंता जताई कि राज्यों के जमीनी स्तर के अधिकारियों की डिजिटल पहुंच प्रभावित हो सकती है।

भारतीय चुनाव व्यवस्था में Electoral Registration Officer यानी ERO की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ये अधिकारी मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और दावों-आपत्तियों पर निर्णय जैसी प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ मामलों में सॉफ्टवेयर व्यवस्था ने जमीनी अधिकारियों के लिए अपने फैसलों को सिस्टम में दर्ज करना मुश्किल बनाया। गोवा का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट ने 97 ऐसे मतदाताओं का उल्लेख किया, जिन्हें ERO स्तर पर योग्य पाया गया था, लेकिन सॉफ्टवेयर संबंधी समस्या के कारण उनके फैसले दर्ज नहीं हो सके।

चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर चुनाव आयोग को 21 सितंबर को प्रश्न भेजे गए थे। रिपोर्ट के प्रकाशन तक आयोग की ओर से इन सवालों का जवाब नहीं मिला था। दोनों चुनाव आयुक्तों से भी उनकी आपत्तियों और 9 सितंबर की बैठक से जुड़े सवाल पूछे गए थे।

इसलिए पूरे मामले में अलग-अलग पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और BJP-RSS पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं, जबकि द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट मुख्य रूप से चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों और प्रक्रियागत विवादों पर आधारित है।

अब आगे क्या होगा?

इस विवाद के आगे बढ़ने के साथ मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनावी सॉफ्टवेयर की भूमिका और निर्वाचन आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर चर्चा बढ़ सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही रहेगा कि चुनाव आयोग की ओर से इन आंतरिक आपत्तियों और रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया जाता है।

फिलहाल राहुल गांधी के आरोपों को राजनीतिक बयान के रूप में देखना चाहिए और चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को अलग तथ्यात्मक घटनाक्रम के रूप में समझना चाहिए। दोनों को एक ही स्तर का निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।

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