B.Pharma और नर्सिंग छात्रों का JDU कार्यालय पर प्रदर्शन, जानें मांगें
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👉 WhatsApp से जुड़ेंपटना में B.Pharma और नर्सिंग छात्रों के प्रदर्शन से बुधवार को राजनीतिक दल के प्रदेश कार्यालय के बाहर हलचल बढ़ गई। B.Pharma और नर्सिंग छात्रों ने अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर JDU प्रदेश कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। छात्रों के मुताबिक, वे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से मिलकर अपनी समस्याएं रखना चाहते थे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने भर्ती और शैक्षणिक सत्र में देरी से जुड़े मुद्दे उठाए।
छात्रों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, संबंधित विभागों और सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के समय उपलब्ध नहीं थी।
JDU कार्यालय के बाहर क्यों पहुंचे छात्र?
बुधवार को B.Pharma और नर्सिंग से जुड़े छात्र पटना स्थित JDU प्रदेश कार्यालय पहुंचे। छात्रों ने बताया कि वे जनता दरबार में अपनी समस्याएं रखने और स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करने की उम्मीद लेकर आए थे।
छात्रों के अनुसार, उनका उद्देश्य अपनी मांगों को सीधे सरकार के प्रतिनिधियों तक पहुंचाना था। लेकिन कार्यालय के बाहर उन्हें प्रवेश नहीं मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद छात्रों ने विरोध जताया।
छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी मांग सुनने के बजाय कार्यालय के दरवाजे बंद कर दिए गए। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं हुई है।
B.Pharma छात्रों की भर्ती को लेकर क्या शिकायत?
B.Pharma छात्रों ने सबसे प्रमुख मुद्दा सरकारी भर्ती से जुड़ा उठाया। उनका आरोप है कि 2018-19 बैच के बाद से B.Pharma योग्य अभ्यर्थियों के लिए लगातार वैकेंसी नहीं निकाली गई है।
छात्रों का कहना है कि दूसरी ओर D.Pharma के लिए भर्ती प्रक्रिया या वैकेंसी निकलती रही है, लेकिन B.Pharma छात्रों के लिए समान अवसर नहीं मिल रहा है।
यह मुद्दा उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जो डिग्री पूरी करने के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में रोजगार की उम्मीद रखते हैं। हालांकि, भर्ती की वास्तविक स्थिति और अलग-अलग पदों के लिए जारी अधिसूचनाओं की आधिकारिक जानकारी को संबंधित विभाग से मिलाना जरूरी होगा।
बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के उपलब्ध रिकॉर्ड में 2026 के दौरान B.Pharm और Nursing की परीक्षाओं से जुड़े कई कार्यक्रम और नोटिस दर्ज हैं। इससे यह स्पष्ट है कि इन पाठ्यक्रमों की शैक्षणिक गतिविधियां जारी हैं, लेकिन छात्रों द्वारा उठाई गई भर्ती संबंधी मांग अलग विषय है।
नर्सिंग छात्रों ने सत्र में देरी का मुद्दा उठाया
प्रदर्शन में नर्सिंग छात्र भी शामिल रहे। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनका शैक्षणिक सत्र समय पर आगे नहीं बढ़ रहा है और लगातार देरी से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
नर्सिंग छात्रों का कहना है कि सत्र में देरी का असर परीक्षा, परिणाम और आगे की पढ़ाई या नौकरी की तैयारी पर पड़ सकता है।
बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के रिकॉर्ड में अलग-अलग बैचों के लिए परीक्षा कार्यक्रम जारी होने की जानकारी मौजूद है। सितंबर 2026 में भी नर्सिंग से संबंधित परीक्षा और रजिस्ट्रेशन से जुड़े नोटिस जारी हुए हैं।
हालांकि, छात्रों का आरोप व्यापक सत्र-विलंब से जुड़ा है, इसलिए इसके समाधान के लिए बैचवार अकादमिक कैलेंडर और परीक्षा कार्यक्रम देखना जरूरी होगा।
गर्दनीबाग में भूख हड़ताल का भी दावा
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने यह भी दावा किया कि उनके कुछ साथी गर्दनीबाग में भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
छात्रों ने चिंता जताई कि लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने पर प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ सकती है। उन्होंने इस स्थिति में जिम्मेदारी और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठाए।
हालांकि, भूख हड़ताल में शामिल छात्रों की संख्या, अवधि और उनकी स्वास्थ्य स्थिति के संबंध में इस रिपोर्ट के समय विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
प्रदर्शन के दौरान सामने आई छात्रों की प्रमुख मांगों को इस तरह समझा जा सकता है:
- B.Pharma योग्य अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया और वैकेंसी को लेकर स्पष्टता।
- B.Pharma और D.Pharma भर्ती अवसरों में छात्रों द्वारा उठाए गए अंतर पर स्थिति स्पष्ट करना।
- नर्सिंग के लंबित या देरी से चल रहे शैक्षणिक सत्र को समय पर पूरा करना।
- परीक्षा और परिणाम प्रक्रिया में देरी कम करना।
- छात्रों को अपनी समस्याएं संबंधित मंत्री या अधिकारियों के सामने रखने का अवसर देना।
- प्रदर्शन कर रहे छात्रों की शिकायतों पर विभागीय स्तर पर बातचीत करना।
इन मांगों पर अंतिम स्थिति संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और भर्ती अधिसूचनाओं से ही स्पष्ट होगी।
छात्रों के प्रदर्शन के बाद आगे क्या?
B.Pharma और नर्सिंग छात्रों के प्रदर्शन ने भर्ती और शैक्षणिक सत्र से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल छात्रों की ओर से लगाए गए आरोप और मांगें सामने आई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग और संबंधित विश्वविद्यालय या भर्ती प्राधिकरण इन मुद्दों पर क्या आधिकारिक जवाब देते हैं।
छात्रों की समस्याओं का समाधान भर्ती की वास्तविक जरूरत, उपलब्ध पदों, पात्रता नियमों और शैक्षणिक कैलेंडर की स्थिति के आधार पर किया जा सकता है। किसी भी भर्ती को लेकर अंतिम जानकारी के लिए सरकारी अधिसूचना को ही आधार माना जाना चाहिए।
