जल शक्ति मंत्रालय के शिखर सम्मेलन में आज पीएम मोदी देंगे बड़ा संदेश
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👉 WhatsApp से जुड़ेंप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्रालय के दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करेंगे। यह सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, सहकारी संघवाद और जल क्षेत्र से जुड़ी प्राथमिकताओं पर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री की परिकल्पना के तहत विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला की शुरुआत जल शक्ति मंत्रालय से हुई है। सम्मेलन का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत करना और राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केंद्र तथा राज्यों को एक साझा मंच पर लाना है।
दो दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत कल हुई थी। इसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र के अधिकारी एवं संबंधित हितधारक जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं। बातचीत के दौरान तय प्राथमिकताओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
जल क्षेत्र की चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर मंथन
जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय सम्मेलन में चार प्रमुख क्षेत्रों को केंद्र में रखा गया है। इनमें जल अवसंरचना परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन, ‘जल संचय जन भागीदारी–कैच द रेन’, पेयजल स्रोतों की स्थिरता और जल जीवन मिशन 2.0 शामिल हैं।
जल अवसंरचना परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करना सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। इसके साथ ही बारिश के पानी को बचाने और जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर भी चर्चा की जा रही है।
पेयजल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसके अलावा जल जीवन मिशन 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
इस सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य जल क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों को साझा जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाना है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर योजनाओं की प्राथमिकताएं तय करेंगी और उनके क्रियान्वयन के लिए समयबद्ध रणनीति बनाने पर जोर रहेगा।
सरकार का मानना है कि जल जैसी महत्वपूर्ण जरूरत से जुड़े कार्यक्रमों का प्रभाव केवल योजनाएं बनाने से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से दिखाई देगा। इसी वजह से सम्मेलन में चर्चा को वास्तविक परिणामों और सेवा वितरण में सुधार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
चर्चा को जमीन पर परिणाम में बदलने की कोशिश
सम्मेलन में हुई चर्चा का उद्देश्य केवल विचार-विमर्श तक सीमित रहना नहीं है। इसके जरिए ऐसी कार्ययोजनाएं तैयार करने पर ध्यान दिया जा रहा है, जिनके परिणामों को निर्धारित समयसीमा के भीतर मापा जा सके।
जल संरक्षण, पेयजल उपलब्धता और जल परियोजनाओं के बेहतर प्रबंधन जैसे मुद्दे सीधे आम लोगों से जुड़े हैं। ऐसे में केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत सहयोग से योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिल सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समापन संबोधन में जल क्षेत्र की इन प्राथमिकताओं को लेकर सरकार की दिशा और आगे की रणनीति पर संदेश मिलने की उम्मीद है। विभागीय शिखर सम्मेलन को केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
