ऊर्जा सुरक्षा पर जितेंद्र सिंह का बड़ा बयान, आत्मनिर्भर ऊर्जा पर जोर

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक मजबूती से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने भारत को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर, स्वदेशी तकनीक आधारित, किफायती और आधुनिक समाधान विकसित करने की जरूरत बताई।

नई दिल्ली में आयोजित 6वें इंटरनेशनल क्लाइमेट समिट 2026 में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि भारत इस समय सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की ओर संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। इस बदलाव में स्वच्छ ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है, वैसे-वैसे उसे ऊर्जा क्षेत्र में दुनिया में हो रहे तकनीकी बदलावों और नए रुझानों के साथ कदम मिलाना होगा।

कई माध्यमों से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की रणनीति

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने के लिए किसी एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय कई रास्तों पर एक साथ काम कर रही है। इनमें परमाणु ऊर्जा को भी महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

मंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में जैव ईंधन और सर्कुलर इकोनॉमी को भी अहम बताया। उनके अनुसार, आने वाली औद्योगिक क्रांति में सर्कुलर इकोनॉमी और नई तकनीकों की बड़ी भूमिका होगी। जैव ईंधन, इथेनॉल और टिकाऊ ईंधन जैसे विकल्प इस बदलाव को गति दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरत लगातार बढ़ रही है। कृषि, स्वास्थ्य, सिंचाई, उर्वरक और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ऊर्जा की मांग को देखते हुए स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के विकास और इस्तेमाल की रफ्तार बढ़ाना जरूरी है।

तकनीक और आत्मनिर्भरता पर रहेगा फोकस

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का ऊर्जा संक्रमण केवल स्वच्छ ऊर्जा तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ तकनीकी विकास, आत्मनिर्भरता, किफायती ऊर्जा, निजी क्षेत्र की भागीदारी और नवाचार पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।

भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति बनाए रखने की आकांक्षा को देखते हुए स्वदेशी और उन्नत तकनीकी समाधान विकसित करना महत्वपूर्ण है। इससे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने के साथ वैश्विक ऊर्जा बदलाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने इस बदलाव में उद्योग और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी जरूरी बताया। सरकार, उद्योग और विशेषज्ञ संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय से नई तकनीकों को विकसित करने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने में मदद मिल सकती है।

2047 के लक्ष्य में उद्योग की भूमिका अहम

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री से सरकार और गैर-सरकारी क्षेत्र के बीच पुल और उत्प्रेरक की भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उद्योग और पेशेवर संस्थाएं दोनों पक्षों को साथ लाकर देश के विकास में योगदान दे सकती हैं।

मंत्री के मुताबिक, भारत की 2047 तक की विकास यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण आधार बनेगी। इसके लिए सरकारी प्रयासों के साथ निजी क्षेत्र, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी होगी।

ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक, स्वच्छ ईंधन, परमाणु ऊर्जा, जैव ईंधन और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे विकल्पों को बढ़ावा देकर भारत अपनी बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के साथ अधिक टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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