पवन सिंह की कोर्ट में गैरहाजिरी पड़ी भारी, लगा ₹1 हजार जुर्माना
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भोजपुरी स्टार और बीजेपी एमएलसी पवन सिंह से जुड़े तलाक और गुजारा भत्ता मामले में कोर्ट ने उनकी गैरहाजिरी पर जुर्माना लगाया है। पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह की मेंटनेंस पिटिशन पर उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित पारिवारिक न्यायालय में सुनवाई हुई। ज्योति सिंह अपने अधिवक्ता के साथ अदालत पहुंचीं, जबकि पवन सिंह व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति पर अदालत ने 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। अब मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।
पवन सिंह की गैरहाजिरी पर कोर्ट ने लगाया जुर्माना
पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच तलाक और गुजारा भत्ता से जुड़ा मामला बलिया की पारिवारिक अदालत में चल रहा है। इसी मामले में ज्योति सिंह की ओर से दायर मेंटनेंस पिटिशन पर सुनवाई हो रही है।
सुनवाई के दौरान ज्योति सिंह अदालत में मौजूद रहीं। बताया गया कि इस तारीख पर पवन सिंह का बयान भी दर्ज होना था, लेकिन वह कोर्ट नहीं पहुंचे।
पवन सिंह के अधिवक्ता हरिवंश सिंह ने अदालत को उनकी अनुपस्थिति का कारण बताया। अधिवक्ता के अनुसार, पटना में बाढ़ की स्थिति के कारण पवन सिंह अदालत में उपस्थित नहीं हो सके।
वकील ने सुनवाई टालने के लिए दिया था प्रार्थना पत्र
पवन सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता ने सुनवाई स्थगित करने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र भी दिया था। हालांकि, अदालत ने सुनवाई के दौरान उनकी अनुपस्थिति को देखते हुए 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। आगे की सुनवाई में मामले से जुड़े पक्षों की दलील और आवश्यक न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच वैवाहिक विवाद काफी समय से अदालत में चल रहा है।
ज्योति सिंह के वकील ने पिछली गैरहाजिरी का भी किया जिक्र
सुनवाई के दौरान ज्योति सिंह के अधिवक्ता ने पवन सिंह की पिछली गैरहाजिरी का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, पवन सिंह इससे पहले 11 अगस्त को भी अपना पक्ष रखने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे।
वहीं, ज्योति सिंह अपने वकील के साथ उस तारीख पर अदालत पहुंची थीं। दोनों पक्षों की ओर से रखे गए तथ्यों के आधार पर अदालत मामले की आगे की प्रक्रिया कर रही है।
फिलहाल अदालत ने पवन सिंह पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना उनकी एक सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होने से जुड़ा है।
क्या है पवन सिंह और ज्योति सिंह का तलाक मामला?
पवन सिंह और ज्योति सिंह की शादी 6 मार्च 2018 को उत्तर प्रदेश के बलिया में हुई थी। यह पवन सिंह की दूसरी शादी थी।
इससे पहले पवन सिंह ने वर्ष 2014 में नीलम सिंह से शादी की थी। शादी के करीब एक साल बाद नीलम सिंह की मौत हो गई थी।
इसके बाद पवन सिंह ने ज्योति सिंह से विवाह किया। शादी के कुछ समय बाद दोनों के रिश्तों में विवाद की खबरें सामने आने लगीं।
ज्योति सिंह ने अपने आरोपों में मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का दावा किया था। उन्होंने गर्भपात से जुड़े गंभीर आरोप भी लगाए थे। दूसरी ओर, पवन सिंह ने इन आरोपों को खारिज किया था।
2022 में ज्योति सिंह ने दाखिल की थी तलाक की अर्जी
ज्योति सिंह ने अप्रैल 2022 में तलाक के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद पवन सिंह की ओर से भी आरा फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर की गई थी।
तलाक की कार्यवाही के साथ-साथ ज्योति सिंह की ओर से गुजारा भत्ता यानी मेंटनेंस को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
गुजारा भत्ता से जुड़े मामले में पत्नी की ओर से अदालत के सामने अपनी मांग और परिस्थितियां रखी जाती हैं। इसके बाद अदालत उपलब्ध तथ्यों, दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करती है।
अब 5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
बलिया फैमिली कोर्ट में हुई ताजा सुनवाई के बाद अब अगली तारीख 5 अक्टूबर निर्धारित की गई है। इस मामले में आगे पवन सिंह का पक्ष और उनका बयान महत्वपूर्ण हो सकता है।
वहीं, ज्योति सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता मामले में अपनी दलीलें और पक्ष अदालत के सामने रख रहे हैं।
अदालत में चल रहे इस वैवाहिक विवाद के कारण पवन सिंह और ज्योति सिंह का मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है। हालांकि, मामले से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
पवन सिंह के लिए क्यों अहम है अगली तारीख?
अगली सुनवाई में मामले की दिशा पर नजर रहेगी। खास तौर पर पवन सिंह की व्यक्तिगत उपस्थिति, बयान और गुजारा भत्ता से जुड़ी कार्यवाही महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल अदालत ने गैरहाजिरी के मामले में 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। पवन सिंह के वकील ने उनकी अनुपस्थिति का कारण पटना में बाढ़ की स्थिति बताया है।
तलाक और गुजारा भत्ता दोनों अलग-अलग कानूनी पहलुओं से जुड़े मुद्दे हैं। इसलिए इस मामले में अंतिम फैसला आने तक किसी भी पक्ष के आरोप या दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।