पटना स्नातक सीट पर JDU में घमासान, अनंत सिंह के दांव से बढ़ी हलचल
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट पर चुनावी हलचल तेज हो गई है। पटना स्नातक सीट का मुकाबला इस बार सिर्फ सत्ता और विपक्ष के बीच नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ जेडीयू के भीतर सामने आए अलग-अलग राजनीतिक रुख के कारण भी चर्चा में है। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने मौजूदा जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार के बजाय डॉ. अनुज सिंह के समर्थन की बात कही है। उनके इस रुख के बाद पटना स्नातक सीट के चुनावी समीकरण और जेडीयू के अंदर की सियासी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को पूरा हो रहा है। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र हैं। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने लगी हैं।
पटना स्नातक सीट पर क्यों बढ़ी सियासी गर्मी?
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां मुकाबले में कई राजनीतिक दावेदारों के उतरने की संभावना है। मौजूदा जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार के सामने अब डॉ. अनुज सिंह का नाम चर्चा में है।
इस बीच अनंत सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह नीरज कुमार का समर्थन नहीं करेंगे और डॉ. अनुज सिंह के साथ खड़े रहेंगे। अनंत सिंह के अनुसार, पटना स्नातक क्षेत्र के 26 विधानसभा क्षेत्रों में उनके समर्थक अनुज सिंह के पक्ष में हैं।
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नीरज कुमार जेडीयू के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और इस सीट से लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में पार्टी से जुड़े एक प्रभावशाली विधायक का अलग उम्मीदवार के समर्थन में सामने आना चुनावी चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
नीरज कुमार के सामने क्या है चुनौती?
नीरज कुमार के पास पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में लंबा चुनावी अनुभव और स्थापित राजनीतिक नेटवर्क है। लगातार तीन चुनाव जीतने के कारण उनके पास मतदाताओं के बीच पहले से मजबूत आधार होने का दावा किया जाता है।
2020 के चुनाव में नीरज कुमार ने आरजेडी के आजाद गांधी को 8,252 वोटों के अंतर से हराया था। अब उनकी नजर लगातार चौथी जीत पर है।
हालांकि इस बार उनके सामने परिस्थितियां पहले जैसी नहीं दिख रही हैं। अनंत सिंह के समर्थन से डॉ. अनुज सिंह चुनावी मुकाबले में प्रभाव डालते हैं या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
इसके अलावा संभावित जन सुराज उम्मीदवार की मौजूदगी भी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है। अगर कई मजबूत उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं तो स्नातक मतदाताओं के बीच वोटों का बंटवारा चुनाव का परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अनंत सिंह के रुख का JDU पर क्या असर?
अनंत सिंह का खुला रुख जेडीयू के अंदरूनी समीकरणों को लेकर राजनीतिक बहस को हवा दे रहा है। हालांकि इसे पार्टी के आधिकारिक रुख के तौर पर नहीं देखा जा सकता। फिलहाल उपलब्ध जानकारी अनंत सिंह के व्यक्तिगत राजनीतिक समर्थन और उनके बयान पर आधारित है।
सवाल यह है कि क्या उनके समर्थक वास्तव में डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में एकजुट होते हैं? स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में विधानसभा चुनाव जैसी सामान्य राजनीतिक वोटिंग नहीं होती। यहां मतदाता और चुनावी प्रक्रिया अलग होती है, इसलिए किसी विधानसभा क्षेत्र में प्रभाव का सीधा असर विधान परिषद चुनाव में कितना पड़ेगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।
यही वजह है कि चुनाव की घोषणा और उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर सामने आने के बाद ही वास्तविक समीकरण का आकलन अधिक स्पष्ट तरीके से किया जा सकेगा।
जन सुराज की एंट्री से बदल सकता है गणित
पटना स्नातक सीट पर संभावित जन सुराज उम्मीदवार को लेकर भी राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं। अगर जन सुराज मजबूत उम्मीदवार उतारता है तो मुकाबले में एक और महत्वपूर्ण धुरी जुड़ सकती है।
ऐसी स्थिति में चुनाव त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है। अलग-अलग उम्मीदवारों के पास अपने सामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत नेटवर्क के आधार पर मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश होगी।
दूसरी ओर, अगर मुकाबला मुख्य रूप से नीरज कुमार और डॉ. अनुज सिंह के बीच सिमटता है तो चुनावी रणनीति अलग रूप ले सकती है। इसलिए उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आने तक किसी एक तस्वीर को निर्णायक मानना उचित नहीं होगा।
चुनाव कार्यक्रम का भी इंतजार
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव को लेकर चुनाव आयोग की घोषणा का इंतजार है। इन सीटों में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त होना है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया को लेकर जल्द आधिकारिक कार्यक्रम सामने आने की संभावना है।
कार्यक्रम जारी होने के बाद नामांकन, नाम वापसी और मतदान की तारीखों के साथ मुकाबले की तस्वीर भी साफ होगी। इसके बाद राजनीतिक दल और संभावित उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर अभियान तेज कर सकेंगे।
चौथी जीत की राह में नीरज कुमार की परीक्षा
नीरज कुमार के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि वह लगातार तीन बार पटना स्नातक सीट जीत चुके हैं। ऐसे में चौथी जीत हासिल करना उनके राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ की एक और परीक्षा होगी।
वहीं, अनंत सिंह द्वारा डॉ. अनुज सिंह को समर्थन देने की घोषणा ने मुकाबले में एक नया कोण जोड़ दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह समर्थन जमीन पर कितने वोटों में बदलता है।
आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की स्थिति, जेडीयू का आधिकारिक रुख, जन सुराज की रणनीति और मतदाताओं के बीच बनता माहौल पटना स्नातक सीट के परिणाम को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि विधान परिषद चुनाव की घोषणा से पहले ही पटना स्नातक सीट बिहार की चर्चित चुनावी सीटों में शामिल हो गई है। अब सबकी नजर चुनाव कार्यक्रम और मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों पर रहेगी।
