मुजफ्फरपुर में बागमती का रौद्र रूप, पीपा पुल डूबा, 14 पंचायतों की मुश्किल बढ़ी
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👉 WhatsApp से जुड़ेंमुजफ्फरपुर में Bihar Flood की स्थिति एक बार फिर चिंता बढ़ा रही है। Bihar Flood के बीच बागमती नदी का जलस्तर बढ़ने से कटरा क्षेत्र में बकुची घाट स्थित पीपा पुल का एप्रोच पथ पानी में डूब गया है। इससे 14 पंचायतों के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश और तेज हवा के कारण निचले इलाकों में पानी फैलने की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर करीब दो लाख की आबादी के सामने प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने की परेशानी बढ़ गई है। बागमती के बढ़ते जलस्तर और पीपा पुल के एप्रोच के डूबने की स्थिति की हालिया रिपोर्टिंग भी सामने आई है।
बागमती बढ़ी तो डूब गया पीपा पुल का रास्ता
मुजफ्फरपुर के कटरा क्षेत्र से गुजरने वाली बागमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में नदी के जलस्तर में करीब तीन फीट तक वृद्धि दर्ज की गई।
बकुची घाट पर बना पीपा पुल इस इलाके के लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। पुल के एप्रोच पथ पर पानी चढ़ने के बाद वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई है।
इससे कटरा उत्तरी क्षेत्र की कई पंचायतों के लोगों के सामने प्रखंड मुख्यालय पहुंचने की समस्या खड़ी हो गई है। पहले जिस दूरी को तय करने में कम समय लगता था, अब वैकल्पिक रास्ते से करीब 40 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ रहा है।
हालिया रिपोर्ट में भी बकुची पीपा पुल के एप्रोच पर पानी चढ़ने और चारपहिया वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की जानकारी सामने आई थी।
14 पंचायतों के लोगों की बढ़ी परेशानी
पीपा पुल के बंद होने से कटरा क्षेत्र की 14 पंचायतों के लोगों की दैनिक आवाजाही प्रभावित हुई है। ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
वैकल्पिक मार्ग के तौर पर बेनीवाद और जारंग होकर जाने की स्थिति में दूरी काफी बढ़ जाती है। इसका असर नौकरी, कारोबार, पढ़ाई, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ सकता है।
स्थानीय स्तर पर बताया गया है कि चौड़ का पानी भी निचले इलाकों की ओर फैल रहा है। इससे कई गांवों में जलजमाव और बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं।
बागमती के बढ़ते जलस्तर के कारण आने वाले समय में स्थिति और बदल सकती है। इसलिए नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।
नाव के सहारे नदी पार कर रहे लोग
पानी बढ़ने का असर कई संपर्क मार्गों पर दिखाई दे रहा है। बसघट्टा डायवर्सन में पानी भर जाने के कारण लोगों को नाव के सहारे रास्ता पार करना पड़ रहा है।
बरी तेहवारा के बीच सड़क क्षतिग्रस्त होने से भी नाव लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन बनी हुई है। ऐसे इलाकों में सड़क और पुल की स्थिति खराब होने से सामान्य परिवहन प्रभावित हुआ है।
गंगेवा, नवादा, अंदामा, पतांरी चंदौली, भवानीपुर, बसघट्टा और खंगुरा सहित कई क्षेत्रों में बाढ़ का पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। खासकर जरूरी सामान, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आवाजाही चुनौती बन रही है।
तीन दिनों की बारिश और तेज हवा से मुश्किल बढ़ी
स्थानीय जानकारी के अनुसार क्षेत्र में लगातार तीन दिनों से बारिश हो रही है। बारिश के साथ तेज हवा ने भी लोगों की परेशानी बढ़ाई है।
बिजली आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ा है। कुछ इलाकों में पिछले कई दिनों से बिजली बाधित रहने की बात सामने आई है, जिससे ग्रामीणों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है।
बकुची फीडर से बिजली आपूर्ति बाधित होने की जानकारी भी दी गई है। ऐसे में बाढ़ और जलजमाव के साथ बिजली संकट लोगों की परेशानी को और बढ़ा रहा है।
प्रशासन के लिए इस स्थिति में सड़क संपर्क, बिजली व्यवस्था और निचले इलाकों में जलस्तर की निगरानी अहम हो जाती है।
जमालपुर कोदई में कटाव से बढ़ी चिंता
बागमती का जलस्तर बढ़ने के साथ नदी किनारे कटाव की समस्या भी सामने आई है। जमालपुर कोदई और रामपट्टी गांव के आसपास कटाव को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है।
जमालपुर कोदई में कटाव के कारण पिरौंझा से जमालपुर कोदई जाने वाली सड़क पर भी खतरा बताया जा रहा है। यदि कटाव बढ़ता है तो ग्रामीण संपर्क मार्ग पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
बाढ़ की स्थिति में नदी के जलस्तर के साथ कटाव पर नजर रखना भी जरूरी होता है, क्योंकि इससे सड़क, खेत और आसपास के आबादी वाले क्षेत्रों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
गंडक नदी को लेकर भी प्रशासन सतर्क
मुजफ्फरपुर के साहेबगंज क्षेत्र में गंडक नदी का जलस्तर भी बढ़ने की संभावना बताई गई है। ऐसे में दियारा और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
स्थानीय प्रशासन की ओर से निचले इलाकों के लोगों से सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने की अपील किए जाने की जानकारी दी गई है।
बिहार के जल संसाधन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों में भी मुजफ्फरपुर क्षेत्र में बागमती के जलस्तर की निगरानी दर्ज है। 25 सितंबर के आंकड़ों में बेनीबाद में बागमती का जलस्तर 48.70 मीटर दर्ज किया गया था, जो निर्धारित खतरे के स्तर से मामूली ऊपर था।
बूढ़ी गंडक की स्थिति भी निगरानी में
मुजफ्फरपुर में बागमती और गंडक के अलावा बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में बूढ़ी गंडक का जलस्तर अपेक्षाकृत स्थिर बताया गया है।
ऐसे समय में अलग-अलग नदियों के जलस्तर में बदलाव का सीधा असर निचले इलाकों पर पड़ सकता है। इसलिए नदी किनारे रहने वाले लोगों को प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी स्थानीय सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
फिलहाल बागमती के बढ़ते जलस्तर के कारण कटरा क्षेत्र में पीपा पुल का एप्रोच जलमग्न होना सबसे बड़ी स्थानीय समस्या बनी हुई है। आवागमन बहाल करने और प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए आगे की स्थिति जलस्तर और बारिश पर निर्भर करेगी।
