पड़ोसी की एक सलाह से बदली जिंदगी, अब अभय सिंह ने जीता एशियन गेम्स सिल्वर

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एशियन गेम्स 2026 में अभय सिंह ने पुरुषों की स्क्वैश सिंगल्स स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर भारतीय खेल जगत में अपनी पहचान और मजबूत की है। अभय सिंह को फाइनल में मलेशिया के डिफेंडिंग चैंपियन एनजी इयन यो के खिलाफ 11-9, 11-5, 11-5 से हार मिली। इसके बावजूद उन्होंने एशियन गेम्स के पुरुष सिंगल्स में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले दूसरे खिलाड़ी बनने की उपलब्धि हासिल की। इससे पहले सौरव घोषाल ने 2022 हांगझोउ एशियन गेम्स में इस स्पर्धा में सिल्वर जीता था।

लेकिन अभय सिंह की कहानी सिर्फ इस सिल्वर मेडल तक सीमित नहीं है। करीब आठ साल की उम्र में जिस बच्चे ने संयोग से स्क्वैश का रैकेट थामा था, वही खिलाड़ी आगे चलकर भारत के शीर्ष स्क्वैश खिलाड़ियों में शामिल हुआ और अर्जुन अवॉर्ड तक पहुंचा।

टेनिस कैंप में नहीं मिला दाखिला, पड़ोसी ने दी स्क्वैश खेलने की सलाह

अभय सिंह का जन्म 3 सितंबर 1998 को चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ। उनका शुरुआती जुड़ाव स्क्वैश से किसी तय योजना के तहत नहीं हुआ था।

बचपन में अभय टेनिस कैंप में दाखिला लेना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां जगह नहीं मिली। इसके बाद उनके एक पड़ोसी ने उन्हें स्क्वैश खेलने की सलाह दी।

यही सलाह उनके जीवन का अहम मोड़ बन गई। अभय ने स्क्वैश खेलना शुरू किया और धीरे-धीरे इस खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ती चली गई।

चेन्नई में ही उन्होंने अपने खेल को आगे बढ़ाया। बाद में स्क्वैश उनके लिए सिर्फ शौक नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे अपना पेशेवर करियर बना लिया।

चेन्नई में पढ़ाई, परिवार की जड़ें उत्तर प्रदेश से जुड़ी

अभय सिंह ने चेन्नई के गुरु नानक कॉलेज, वेलाचेरी से पढ़ाई की और बीकॉम की डिग्री हासिल की।

उनके पिता का नाम गुरमीत सिंह है। उनका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश से जुड़ा है, लेकिन काम के सिलसिले में परिवार काफी समय पहले चेन्नई आकर बस गया था।

चेन्नई का माहौल अभय के खेल करियर के लिए भी महत्वपूर्ण रहा। यहीं उन्होंने प्रशिक्षण लिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाने की दिशा में आगे बढ़े।

आज उनका नाम भारतीय स्क्वैश के प्रमुख खिलाड़ियों में लिया जाता है। उपलब्ध रैंकिंग रिकॉर्ड में उनकी सर्वश्रेष्ठ विश्व रैंकिंग 22 दर्ज है।

2024 में मिला अर्जुन अवॉर्ड

अभय सिंह के करियर में 2024 एक महत्वपूर्ण साल रहा। उनके प्रदर्शन और उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन अवॉर्ड 2024 से सम्मानित किया।

राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक सूची के अनुसार, अभय ने 2023 एशियन गेम्स में पुरुष टीम में गोल्ड और मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। 2024 में एशियन स्क्वैश डबल्स चैंपियनशिप में उन्होंने पुरुष डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में गोल्ड मेडल भी हासिल किए।

अर्जुन अवॉर्ड ने उनके अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को मिली पहचान को और मजबूत किया।

एशियन गेम्स 2026 में फाइनल तक कैसे पहुंचे?

एशियन गेम्स 2026 में अभय सिंह ने पुरुष सिंगल्स में शानदार प्रदर्शन किया। सेमीफाइनल में उनका मुकाबला पाकिस्तान के मोहम्मद इरफान से हुआ।

अभय ने इस मुकाबले में सीधे तीन गेम में जीत दर्ज की। उन्होंने इरफान को 11-3, 12-10, 11-6 से हराकर फाइनल में जगह बनाई।

फाइनल में उनका सामना मलेशिया के एनजी इयन यो से हुआ। मलेशियाई खिलाड़ी ने पहला गेम 11-9 से जीता। दूसरे गेम में भी उन्होंने 11-5 से बढ़त बनाई।

तीसरे गेम में अभय ने 4-2 की बढ़त लेकर मुकाबले में वापसी की कोशिश की। स्कोर एक समय 5-4 तक पहुंचा, लेकिन इयन यो ने इसके बाद लगातार अंक हासिल किए और गेम 11-5 से जीत लिया।

इस तरह इयन यो ने मुकाबला 3-0 से अपने नाम किया और अभय को सिल्वर मेडल मिला।

पुरुष सिंगल्स में भारत का दूसरा एशियन गेम्स सिल्वर

अभय सिंह की इस उपलब्धि का एक खास रिकॉर्ड भी है। वह एशियन गेम्स के पुरुष सिंगल्स स्क्वैश में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले केवल दूसरे खिलाड़ी बने हैं।

उनसे पहले सौरव घोषाल ने हांगझोउ एशियन गेम्स में पुरुष सिंगल्स में सिल्वर मेडल जीता था।

इससे पहले अभय एशियन गेम्स में टीम स्पर्धा में गोल्ड जीत चुके हैं। इसलिए 2026 का सिंगल्स सिल्वर उनके व्यक्तिगत करियर की एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है।

वर्ल्ड कप में भी कर चुके हैं भारत की कप्तानी

अभय सिंह का अंतरराष्ट्रीय सफर केवल एशियन गेम्स तक सीमित नहीं रहा है। 2025 में चेन्नई में आयोजित स्क्वैश वर्ल्ड कप में उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी भी की।

भारत ने उस प्रतियोगिता के फाइनल में हांगकांग को हराकर पहली बार वर्ल्ड कप खिताब अपने नाम किया था। इससे पहले भी अभय अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं।

उनके करियर में PSA टूर पर कई खिताब और अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां भी शामिल हैं। 2026 एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल के साथ उनके करियर की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।

एक पड़ोसी की सलाह से शुरू हुआ सफर पहुंचा एशियन गेम्स तक

अभय सिंह की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि उनका स्क्वैश करियर किसी लंबे समय से तय लक्ष्य के साथ शुरू नहीं हुआ था।

टेनिस कैंप में जगह नहीं मिलने के बाद पड़ोसी की सलाह पर उन्होंने स्क्वैश खेलना शुरू किया। यही छोटा-सा फैसला आगे चलकर उनके पेशेवर जीवन की दिशा बदल गया।

आज अभय एशियन गेम्स के पदक विजेता और अर्जुन अवॉर्डी हैं। 2026 में पुरुष सिंगल्स का सिल्वर उनके उस सफर की एक और बड़ी उपलब्धि है, जिसकी शुरुआत बचपन में मिली एक साधारण-सी सलाह से हुई थी।

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