‘गुजरात में था...’ JDU की बैठक से गैरमौजूदगी पर ललन सिंह की सफाई

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बिहार की राजनीति में ललन सिंह की 18 सितंबर की JDU बैठक से गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई। ललन सिंह ने अब इस पर सफाई देते हुए कहा है कि वह गुजरात में एक कार्यक्रम में शामिल होने के कारण पटना की बैठक में नहीं पहुंच सके। उन्होंने पार्टी के भीतर किसी तरह के विवाद या मतभेद की चर्चाओं को खारिज किया है।

जदयू की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम मुख्य रूप से विधायकों और विधान पार्षदों के लिए प्रबोधन एवं प्रशिक्षण से जुड़ा था। ललन सिंह की गैरमौजूदगी के बाद राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी कहा कि यह कार्यक्रम सांसदों के लिए नहीं था और ललन सिंह से उनकी बातचीत होती रहती है।

JDU की बैठक से क्यों गायब रहे ललन सिंह?

18 सितंबर 2026 को पटना में JDU का एक दिवसीय प्रबोधन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में पार्टी के विधायक और विधान पार्षद शामिल हुए। इसका उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को सदन की कार्यप्रणाली और विधायी प्रक्रियाओं से संबंधित जानकारी देना था।

इसी कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह मौजूद नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति पर कुछ विधायकों की ओर से सवाल उठाए जाने की खबरें सामने आईं। इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में पार्टी के अंदर संभावित मतभेद को लेकर अटकलें तेज हुईं।

ललन सिंह ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि उनका गुजरात में कार्यक्रम था। उनके अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को उनके कार्यक्रम की जानकारी थी और उनकी संजय झा समेत अन्य नेताओं से बातचीत भी हुई थी।

संजय झा ने भी दी गैरमौजूदगी पर सफाई

ललन सिंह की अनुपस्थिति को लेकर JDU की ओर से भी स्पष्टीकरण सामने आया। कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि 18 सितंबर का कार्यक्रम पार्टी के विधान मंडल दल के सदस्यों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम था।

संजय झा के मुताबिक, इस कार्यक्रम में किसी सांसद को आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि ललन सिंह से उनकी बातचीत होती रहती है और बैठक से पहले भी उनकी बातचीत हुई थी।

इस बयान के बाद JDU की बैठक में ललन सिंह की अनुपस्थिति को लेकर उठे सवालों का पार्टी की ओर से एक अलग संदर्भ सामने आया। यानी पार्टी ने इसे किसी अंदरूनी विवाद से जोड़ने के बजाय कार्यक्रम की प्रकृति से जोड़ा।

ललन सिंह बोले- JDU में 1994 से है आंतरिक लोकतंत्र

ललन सिंह ने पार्टी के काम करने के तरीके पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि JDU में लंबे समय से आंतरिक लोकतंत्र, आपसी सहमति और विचार-विमर्श की परंपरा रही है।

उनके अनुसार, पार्टी में फैसले आपसी चर्चा और सहमति के आधार पर लिए जाते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर किसी तरह का विवाद या मतभेद नहीं है।

ललन सिंह ने मीडिया में चल रही दूसरी चर्चाओं पर भी संबंधित नेताओं से बात करने की बात कही। उनका संदेश यही था कि पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर चल रही अटकलों को उनके बैठक में शामिल नहीं होने से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

बैठक के बाद क्यों बढ़ी राजनीतिक चर्चा?

JDU की बैठक ऐसे समय हुई जब बिहार की राजनीति में पार्टी के भविष्य और आंतरिक समीकरणों को लेकर पहले से चर्चाएं चल रही हैं। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने JDU के भविष्य को लेकर दावे किए हैं। वहीं, पार्टी के कुछ नेताओं के अलग-अलग मुद्दों पर सार्वजनिक बयान भी चर्चा में रहे हैं।

इसके अलावा, मोकामा विधायक अनंत सिंह और JDU नेता नीरज कुमार के बीच MLC चुनाव को लेकर सार्वजनिक मतभेद भी सामने आए हैं। अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ चुनावी विरोध की बात कही है।

हालांकि, इन अलग-अलग घटनाओं को सीधे ललन सिंह की गैरमौजूदगी से जोड़ना उचित नहीं होगा। ललन सिंह और संजय झा दोनों ने अपने बयानों में पार्टी के भीतर नियमित संवाद और संगठनात्मक प्रक्रिया पर जोर दिया है।

JDU की ओर से फिलहाल क्या संदेश?

18 सितंबर की बैठक और उसके बाद आए बयानों से फिलहाल दो बातें सामने आती हैं। पहली, JDU ने कार्यक्रम को मुख्य रूप से विधायकों और विधान पार्षदों के प्रशिक्षण एवं प्रबोधन से जुड़ा बताया। दूसरी, ललन सिंह ने अपनी गैरमौजूदगी का कारण गुजरात का कार्यक्रम बताया और पार्टी में मतभेद की चर्चाओं को खारिज किया।

राजनीतिक दलों में नेताओं के अलग-अलग कार्यक्रम और किसी बैठक में उनकी मौजूदगी या गैरमौजूदगी अपने आप में संगठनात्मक विवाद का प्रमाण नहीं होती। ऐसे मामलों में संबंधित नेताओं के आधिकारिक बयान और आगे के घटनाक्रम को देखना महत्वपूर्ण होता है।

फिलहाल JDU की ओर से सार्वजनिक रूप से यही संदेश दिया गया है कि ललन सिंह की बैठक में अनुपस्थिति को पार्टी के अंदर किसी विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में पार्टी के नेताओं के बयान और संगठन से जुड़े फैसले इस चर्चा की दिशा को और स्पष्ट कर सकते हैं।

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