जमीन मापी के लिए अमीन बुलाने हेतु CO को आवेदन कैसे लिखें

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ज़मीन का विवाद चाहे एक इंच का हो या एक एकड़ का, यह रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी होता है। अक्सर देखा जाता है कि पड़ोसी धीरे-धीरे मेड़ (आरी) काटकर आपकी ज़मीन में घुसपैठ कर लेते हैं, या पुश्तैनी बंटवारे के बाद सही चौहद्दी का ज्ञान नहीं होने से परिवार में ही मनमुटाव शुरू हो जाता है। पटना और बिहार के सभी जिलों में ज़मीन से जुड़े ऐसे विवाद हर दिन अंचल कार्यालयों (Circle Offices) और थानों में पहुंचते हैं। लोग प्राइवेट अमीन बुलाकर नापी तो करवा लेते हैं, लेकिन जब दूसरा पक्ष उस नापी को मानने से इंकार कर देता है, तो सारा पैसा और समय बर्बाद हो जाता है।

कानूनी रूप से ज़मीन की हदबंदी (Boundary) तय करने और विवाद को जड़ से खत्म करने का इकलौता तरीका है सरकारी अमीन (Sarkari Amin) से मापी करवाना। सरकारी अमीन की रिपोर्ट कोर्ट से लेकर थाने तक हर जगह 100% मान्य होती है। लेकिन सरकारी अमीन आपके खेत या प्लॉट पर खुद चलकर नहीं आएगा; इसके लिए आपको अपने क्षेत्र के अंचलाधिकारी (Circle Officer - CO) को एक विधिवत आवेदन (Application) देना होता है। एक स्थानीय पत्रकार के तौर पर मैंने अनगिनत लोगों को सिर्फ एक सही ड्राफ्ट (आवेदन का प्रारूप) न होने के कारण ब्लॉकों के चक्कर काटते देखा है। आज मैं आपको वह सटीक तरीका और ड्राफ्ट बताऊंगा जिससे आपका आवेदन पहली बार में ही स्वीकार हो जाएगा।

सरकारी अमीन और प्राइवेट अमीन में क्या अंतर है?

आवेदन कैसे लिखें, यह जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि अंचल कार्यालय से ही अमीन क्यों बुलाना चाहिए:

  • कानूनी मान्यता: प्राइवेट अमीन की मापी को अगर आपका पड़ोसी कोर्ट में चुनौती दे दे, तो उसकी कोई खास कानूनी वैल्यू नहीं होती। वहीं, अंचलाधिकारी के आदेश पर आए सरकारी अमीन की रिपोर्ट एक ठोस कानूनी दस्तावेज़ है।

  • नोटिस की प्रक्रिया: सरकारी मापी से पहले अंचल कार्यालय आपके सभी चौहद्दीदारों (आस-पास के ज़मीन मालिकों) को सरकारी नोटिस भेजता है। इससे बाद में कोई यह नहीं कह सकता कि उसकी पीठ पीछे ज़मीन नाप ली गई।

  • पुलिस सुरक्षा (Magistrate Deployment): अगर आपको डर है कि मापी के दौरान पड़ोसी मारपीट कर सकता है, तो CO के माध्यम से आप मापी के दिन पुलिस बल (Police Force) की भी मांग कर सकते हैं। यह सुविधा प्राइवेट अमीन के साथ नहीं मिलती।

CO को आवेदन लिखने के लिए जरूरी दस्तावेज़

अंचलाधिकारी महोदय आपका आवेदन तभी स्वीकार करेंगे जब आप अपनी ज़मीन का मालिकाना हक साबित करने वाले कागज़ात आवेदन के साथ नत्थी (Attach) करेंगे। आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी होनी चाहिए:

  1. अद्यतन लगान रसीद (Current Rent Receipt): ज़मीन का करेंट साल का ऑनलाइन कटा हुआ रसीद।

  2. केवाला या खतियान की कॉपी: अगर ज़मीन खरीदी गई है तो रजिस्ट्री का डीड (Kewala), और पुश्तैनी है तो खतियान की प्रमाणित कॉपी।

  3. आवेदक का आधार कार्ड: आपकी पहचान के लिए।

  4. चौहद्दीदारों की सूची: ज़मीन के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में किनकी ज़मीन है, उनके नाम की एक सूची।

अंचलाधिकारी (CO) को अमीन बहाली हेतु आवेदन का सटीक फॉर्मेट

नीचे एक आदर्श और मानक आवेदन का प्रारूप दिया गया है। आप एक साफ सफेद A4 साइज के कागज़ पर नीले या काले पेन से बिल्कुल इसी तरह अपना आवेदन लिख सकते हैं।

सेवा में,

श्रीमान अंचलाधिकारी महोदय,

अंचल कार्यालय, [अपने अंचल/ब्लॉक का नाम लिखें],

जिला – [अपने जिले का नाम लिखें, जैसे- पटना]

विषय: ज़मीन की मापी (सीमांकन) हेतु सरकारी अमीन की प्रतिनियुक्ति के संबंध में।

महाशय,

सविनय निवेदन यह है कि मैं [आपका पूरा नाम], पिता/पति का नाम [पिता का नाम], ग्राम [गाँव का नाम], पंचायत [पंचायत का नाम], थाना [थाना का नाम], जिला [जिले का नाम] का एक स्थायी निवासी हूँ।

मैं आपके अंचल के अंतर्गत मौजा [मौजा का नाम], थाना नंबर [थाना नंबर] में स्थित अपनी रैयती/पुश्तैनी ज़मीन का असली मालिक हूँ और मेरे नाम से इसकी जमाबंदी कायम है। मैं इस ज़मीन का नियमित रूप से सरकार को लगान चुकाता आ रहा हूँ (अद्यतन रसीद संलग्न है)। मेरी उक्त ज़मीन का विवरण निम्नलिखित है:

  • मौजा (Village): [मौजे का नाम]

  • थाना नंबर (Thana No.): [नंबर लिखें]

  • खाता संख्या (Khata No.): [खाता नंबर लिखें]

  • खेसरा / प्लॉट संख्या (Khesra No.): [खेसरा नंबर लिखें]

  • कुल रकबा (Total Area): [ज़मीन का क्षेत्रफल, जैसे- 10 डिसमिल या 1 बीघा]

मापी का कारण:

वर्तमान में मेरी ज़मीन की सीमा (मेड़) अस्पष्ट हो गई है और आस-पड़ोस के ज़मीन मालिकों के साथ सीमा को लेकर अक्सर भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद या शांति भंग होने की आशंका से बचने के लिए, मैं अपनी ज़मीन का विधिवत सीमांकन (Demarcation) करवाना चाहता हूँ।

अतः श्रीमान से नम्र निवेदन है कि मेरे द्वारा जमा किए गए दस्तावेज़ों की जांच कर, सरकारी अमीन को मेरी ज़मीन की नापी करने का आदेश निर्गत करने की कृपा करें। मैं अमीन की मापी हेतु निर्धारित सरकारी शुल्क (नज़राना/चालान) जमा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हूँ।

इस कार्य के लिए मैं श्रीमान का सदा आभारी रहूँगा।

संलग्नक (Enclosures):

  1. अद्यतन लगान रसीद की छायाप्रति।

  2. ज़मीन के केवाला/खतियान की छायाप्रति।

  3. आवेदक का आधार कार्ड।

भवदीय,

(आपका हस्ताक्षर / अंगूठे का निशान)

नाम: [अपना नाम लिखें]

मोबाइल नंबर: [अपना चालू मोबाइल नंबर लिखें]

दिनांक: [आवेदन जमा करने की तारीख]

आवेदन जमा करने के बाद की पूरी प्रक्रिया (Step-by-Step)

आवेदन लिख लेना तो आधी जंग जीतना है; असली प्रक्रिया ब्लॉक में इसके बाद शुरू होती है। आप इसे सीधे अंचल कार्यालय के काउंटर पर या आज-कल कई जगहों पर RTPS काउंटर के माध्यम से भी जमा कर सकते हैं।

  1. आवेदन की जांच: आपका आवेदन CO साहब के पास जाता है। वहां से वे इसे संबंधित हल्का कर्मचारी (राजस्व कर्मचारी) को मार्क करते हैं।

  2. कर्मचारी की रिपोर्ट: हल्का कर्मचारी अपने रजिस्टर-2 (जमाबंदी पंजी) से आपके कागज़ात का मिलान करता है। अगर ज़मीन सच में आपके नाम पर दर्ज है, तो वह मापी के पक्ष में अपनी रिपोर्ट CO को सौंप देता है।

  3. शुल्क (Challan) जमा करना: कर्मचारी की पॉजिटिव रिपोर्ट के बाद आपको सरकारी खजाने में अमीन की मापी का शुल्क जमा करना होता है। यह शुल्क बैंक चालान के माध्यम से जमा होता है। यह फीस बहुत मामूली होती है (प्रति प्लॉट के हिसाब से)।

  4. नोटिस जारी होना (Notice Generation): चालान जमा होने के बाद CO कार्यालय से एक मापी की तिथि तय की जाती है और आपके चारों तरफ के ज़मीन मालिकों (चौहद्दीदारों) को सरकारी नोटिस भेजा जाता है कि अमुक तारीख को मापी होगी, आप उपस्थित रहें।

  5. मापी का दिन: तय तारीख पर सरकारी अमीन अपने ज़रीब (Chain), नक्शा और औजार लेकर आपके प्लॉट पर आते हैं। सबकी मौजूदगी में ज़मीन नापी जाती है और सीमा तय करके खूंटा गड़वा दिया जाता है। बाद में अमीन इसकी लिखित रिपोर्ट CO को सौंप देते हैं।

त्वरित जानकारी सारांश (Quick Info Summary Table)

विवरण (Details)जानकारी (Information)
आवेदन किसे देना है?अंचलाधिकारी (CO), अंचल कार्यालय
मुख्य उद्देश्यसरकारी अमीन से ज़मीन की आधिकारिक मापी करवाना
जरूरी दस्तावेज़करंट लगान रसीद, खतियान/केवाला, आधार कार्ड
फीस / चालानसरकारी नियमानुसार बैंक चालान (अंचल कार्यालय से निर्धारित)
प्रक्रिया की अवधिआमतौर पर 30 से 60 कार्य दिवस (नोटिस और मापी सहित)
कानूनी महत्वरिपोर्ट न्यायालय और पुलिस प्रशासन द्वारा पूर्णतः मान्य

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: क्या मैं बिना लगान रसीद के अमीन बुलाने के लिए आवेदन कर सकता हूँ?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। सरकारी अमीन केवल उसी ज़मीन की मापी करता है जिसका लगान (टैक्स) सरकार को दिया जा रहा हो और जिसकी जमाबंदी पोर्टल पर दर्ज हो। आपको पहले अपनी रसीद अप-टू-डेट करानी होगी।

प्रश्न 2: अगर मापी के दिन पड़ोसी आकर झगड़ा करने लगे, तो क्या होगा?

उत्तर: अगर आपको पहले से अंदेशा है कि विवाद हो सकता है, तो CO को दिए गए आवेदन में ही आप मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की मांग कर सकते हैं। अगर अचानक झगड़ा होता है, तो अमीन मापी रोककर CO को रिपोर्ट कर देता है, जिसके बाद पुलिस की मौजूदगी में अगली तारीख तय होती है।

प्रश्न 3: अमीन का सरकारी चालान कितने रुपये का कटता है?

उत्तर: यह ज़मीन के रकबे (Area) और प्लॉट की संख्या पर निर्भर करता है। आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में यह शुल्क बहुत मामूली (कुछ सौ रुपये प्रति प्लॉट) होता है, जो ट्रेजरी चालान के माध्यम से बैंक में जमा होता है। किसी भी कर्मचारी को नकद घूस देने से बचें।

प्रश्न 4: क्या हम बिहार भूमि पोर्टल से अमीन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं?

उत्तर: फिलहाल अमीन प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया ज्यादातर अंचल कार्यालयों में ऑफलाइन ही संचालित होती है, जिसमें आपको हार्ड कॉपी में आवेदन और दस्तावेज़ जमा करने होते हैं। कुछ जगहों पर RTPS के जरिए सेवा शुरू की जा रही है, पर CO ऑफिस जाकर मिलना सबसे प्रभावी तरीका है।

प्रश्न 5: अगर CO मेरे आवेदन पर कोई कार्रवाई न करे तो क्या करें?

उत्तर: अगर अंचल कार्यालय से महीनों तक कोई सुनवाई नहीं होती है, तो आप अपने अनुमंडल के भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR - Deputy Collector Land Reforms) के न्यायालय में अपील कर सकते हैं। वे CO को मापी करवाने का सीधा आदेश जारी कर सकते हैं।

ज़मीन से जुड़े काम में सबसे ज़्यादा ज़रूरत धैर्य और सही जानकारी की होती है। बिना सही कागज़ात और सही प्रक्रिया के आप अपना समय और पैसा दोनों बर्बाद करते हैं। अब जब आपके पास आवेदन लिखने का सटीक फॉर्मेट और पूरी प्रक्रिया की जानकारी है, तो विवादों को पंचायत की बैठकों या आपसी तू-तू मैं-मैं में उलझाने के बजाय सीधे प्रशासनिक मार्ग अपनाएं। अपना आवेदन तैयार करें, जरूरी दस्तावेज़ लगाएं और अपने अंचल कार्यालय में पूरे आत्मविश्वास के साथ जमा करें। आपकी ज़मीन का एक-एक इंच सुरक्षित रहेगा, अगर आपके पास सरकारी रिकॉर्ड और प्रशासन का ठोस साथ होगा।

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