IRCTC केस पर मृत्युंजय तिवारी का बड़ा बयान, बोले- दोषी हैं तो सजा मिलेगी

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IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय होने के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है। IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश के बाद बीजेपी और राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। मामले में अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।

अदालत का आदेश आने के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे न्यायिक प्रक्रिया बताया, जबकि RJD ने कोर्ट के फैसले का सम्मान करने के साथ अपनी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रखने की बात कही है।

मृत्युंजय तिवारी बोले- कोर्ट के फैसले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए

IRCTC मामले पर बीजेपी नेता मृत्युंजय तिवारी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला आया है और इस मामले में राजनीतिक टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

उनके मुताबिक, अदालत ने मामले में जो कुछ देखा और समझा, उसी आधार पर आदेश दिया है। इसलिए किसी को न्यायिक प्रक्रिया पर आपत्ति नहीं करनी चाहिए।

मृत्युंजय तिवारी हाल ही में RJD छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं। लालू परिवार और राजद से लंबे समय तक जुड़े रहने के कारण उनकी टिप्पणी को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।

तिवारी ने कहा कि न्याय व्यवस्था में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे कानून के मुताबिक सजा मिलती है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में अदालत ने आरोप तय करने का आदेश दिया है और अंतिम दोषसिद्धि अभी बाकी है।

बीजेपी ने तेजस्वी यादव से मांगा जवाब

बीजेपी पैनलिस्ट नीरज कुमार ने मामले को लेकर लालू परिवार पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप तय होना राजनीति नहीं बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

नीरज कुमार ने लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे से जुड़े फैसलों और जमीन के कथित लेनदेन पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए लालू परिवार ने बिहार और रेलवे से जुड़े मामलों में अनियमितताएं कीं।

उन्होंने तेजस्वी यादव से भी कथित जमीन लेनदेन को लेकर जवाब देने की मांग की।

हालांकि, बीजेपी नेता के ये बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

RJD ने कहा- कोर्ट का सम्मान, लड़ाई जारी रहेगी

दूसरी ओर, RJD प्रवक्ता ऐज्या यादव ने अदालत के आदेश पर पार्टी का रुख स्पष्ट किया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल ने हमेशा न्यायालय के फैसले का सम्मान किया है। अदालत की ओर से जो आदेश आया है, उसे पार्टी स्वीकार करेगी, लेकिन अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

RJD प्रवक्ता के अनुसार, पार्टी गरीब और वंचित लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करती रही है। उन्होंने संकेत दिया कि मामले में आगे की रणनीति पार्टी के नेता बैठक करके तय करेंगे।

इस तरह अदालत के आदेश के बाद बीजेपी और RJD दोनों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, लेकिन दोनों दलों का नजरिया अलग-अलग है।

7 आरोपियों को मिली राहत

IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने कुल 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने इनमें से सात आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया है।

वहीं, नौ आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप तय करने का आदेश दिया गया है। इनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के अलावा लारा प्रोजेक्ट्स से जुड़े लोग, सरला गुप्ता और सुजाता होटल्स से जुड़े आरोपी शामिल हैं।

मामले में आरोप तय होना यह साबित नहीं करता कि सभी आरोपी दोषी हैं। अब न्यायालय में आगे की प्रक्रिया के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने पक्ष और साक्ष्य रखेंगे।

क्या है IRCTC होटल मामला?

यह मामला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान का बताया जाता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, 2004 से 2009 के बीच रांची और पुरी स्थित IRCTC के दो होटलों के संचालन और लीज से जुड़ी प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुई थीं।

CBI का आरोप है कि होटल संचालन का ठेका सुजाता होटल्स समूह से जुड़े विजय कोचर और विनय कोचर को मिला था। जांच में आरोप लगाया गया कि इस प्रक्रिया के बदले पटना में जमीन के कथित लेनदेन का फायदा लालू परिवार से जुड़े लोगों को मिला।

जांच एजेंसियों ने पटना की करीब तीन एकड़ जमीन से जुड़े कथित लेनदेन को मामले की अहम कड़ी माना है।

जमीन के कथित लेनदेन की भी हुई जांच

जांच एजेंसियों के मुताबिक, जमीन से जुड़े कुछ लेनदेन बेहद कम कीमत पर किए जाने का आरोप है। 2010 से 2014 के बीच लालू परिवार से जुड़ी कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स के नाम जमीन ट्रांसफर किए जाने की बात जांच में सामने आई थी।

आरोप है कि जमीन का वास्तविक मूल्य काफी अधिक था, जबकि कथित तौर पर इसे कम कीमत पर ट्रांसफर किया गया।

इसी तरह के लेनदेन को CBI और बाद में ED ने अपने-अपने मामलों की जांच का हिस्सा बनाया। ED ने आपराधिक आय से जुड़ी संपत्ति और उसके कथित इस्तेमाल की जांच मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत की।

2017 में दर्ज हुआ था CBI केस

मामला सामने आने के बाद जुलाई 2017 में CBI ने लालू यादव के परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

इसके बाद मामले के कथित वित्तीय पहलू की जांच ED ने की। CBI ने जहां टेंडर प्रक्रिया और कथित आपराधिक साजिश से जुड़े पहलुओं की जांच की, वहीं ED ने कथित अवैध धन और संपत्ति के लेनदेन को मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत देखा।

अब दिल्ली की अदालत द्वारा नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिए जाने के बाद मामले ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में चर्चा तेज कर दी है।

3 अक्टूबर को होगी अगली अहम सुनवाई

मामले में आरोपों की औपचारिक फ्रेमिंग 3 अक्टूबर को की जाएगी। इसके बाद केस की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

फिलहाल राजनीतिक दल इस आदेश को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। बीजेपी इसे न्यायिक प्रक्रिया और आरोपों की गंभीरता से जोड़ रही है, जबकि RJD अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कह रही है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में अंतिम फैसला आगे की सुनवाई, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर अदालत करेगी।

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