दिशा सालियान केस में फिर उठे सवाल, पूर्व DGP ने जांच पर रखी अपनी बात

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मुंबई: दिशा सालियान केस एक बार फिर चर्चा में है। दिशा सालियान केस को लेकर पूर्व IPS अधिकारी और उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP डॉ. विक्रम सिंह ने एक इंटरव्यू में पुलिस जांच, पोस्टमार्टम, फोरेंसिक प्रक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से जुड़े कई सवाल उठाए हैं।

हालांकि, इन दावों को जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। महत्वपूर्ण बात यह है कि 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिशा सालियन की मौत के मामले में CBI से FIR दर्ज कर जांच करने को कहा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाना चाहिए।

दिशा सालियन की मौत का मामला क्या है?

दिशा सालियन की मौत 8-9 जून 2020 की रात मुंबई के मलाड इलाके में हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं।

इसके कुछ ही दिन बाद 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत की मौत हुई। दोनों घटनाओं के बीच कम अंतर होने के कारण लंबे समय से सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस में दोनों मामलों को जोड़कर कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं।

हालांकि, किसी भी संभावित संबंध को स्थापित करने के लिए जांच एजेंसियों के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण हैं। केवल समय का अंतर अपने आप में दोनों घटनाओं के बीच आपराधिक संबंध साबित नहीं करता।

पूर्व DGP विक्रम सिंह ने क्या सवाल उठाए?

State Mirror के साथ बातचीत में डॉ. विक्रम सिंह ने दिशा सालियन की मौत से जुड़े कई जांच बिंदुओं पर सवाल उठाए। उन्होंने पोस्टमार्टम प्रक्रिया, कथित फोरेंसिक सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और शुरुआती पुलिस जांच को लेकर विस्तृत जांच की जरूरत बताई।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मामले में आरोप या संदेह को अंतिम सत्य मानने के बजाय उपलब्ध सबूतों की वैज्ञानिक तरीके से जांच होनी चाहिए।

उनके इंटरव्यू में कई गंभीर संभावनाओं और पुराने दावों का जिक्र हुआ। हालांकि, इन बातों को डॉ. विक्रम सिंह के विचार और सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि किसी न्यायिक निष्कर्ष के तौर पर।

पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच पर भी चर्चा

पूर्व DGP ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और फोरेंसिक साक्ष्यों से जुड़े सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि मौत के बाद उपलब्ध मेडिकल और वैज्ञानिक साक्ष्यों को किस तरह सुरक्षित किया गया और उनकी जांच कितनी विस्तृत थी।

उन्होंने कथित मेडिकल सैंपल और शरीर पर चोटों से जुड़े दावों की भी चर्चा की। उनके अनुसार, ऐसे सभी पहलुओं की वैज्ञानिक जांच से ही यह स्पष्ट हो सकता है कि घटना की परिस्थितियां क्या थीं।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने 2 सितंबर 2026 के आदेश में कहा कि अदालत इस स्तर पर किसी तथ्य का अंतिम निष्कर्ष नहीं दे रही है। अदालत का उद्देश्य केवल यह तय करना था कि मामले में नियमित आपराधिक जांच की आवश्यकता है या नहीं।

हाई कोर्ट ने CBI जांच का रास्ता क्यों खोला?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को दिशा सालियन के पिता सतीश सालियन की याचिका पर महत्वपूर्ण आदेश दिया।

अदालत ने कहा कि पहले की जांच मुख्य रूप से CrPC की धारा 174 के तहत ADR यानी Accident Death Report की प्रक्रिया तक सीमित रही थी। अदालत ने माना कि इस मामले में संज्ञेय अपराध की आशंका से जुड़े पहलुओं की पर्याप्त जांच के लिए नियमित आपराधिक जांच जरूरी है।

इसके बाद अदालत ने मुंबई क्षेत्र के CBI प्रभारी अधिकारी को एक अनुभवी वरिष्ठ अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया।

CBI अधिकारी को शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करने और FIR दर्ज करने का भी निर्देश दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि दिशा की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाए।

हाई कोर्ट ने किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना

इस मामले में अदालत की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी को समझना जरूरी है।

2 सितंबर के आदेश में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान किसी व्यक्ति को तब तक आरोपी नहीं माना जाना चाहिए, जब तक जांच अधिकारी के पास उसके खिलाफ उचित संदेह पैदा करने वाला पर्याप्त आधार न हो।

इसका मतलब है कि सार्वजनिक चर्चा में जिन लोगों के नाम सामने आते रहे हैं, उनके नाम का उल्लेख मात्र किसी अपराध में उनकी संलिप्तता साबित नहीं करता।

जांच एजेंसी को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय करनी होगी।

पहले की जांच में क्या निष्कर्ष आया था?

हाई कोर्ट के 2 सितंबर 2026 के आदेश में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक, दिशा सालियन की मौत को लेकर पहले जांच की गई थी और बाद में दिसंबर 2023 में उनके पिता की ओर से विस्तृत जांच की मांग के बाद जांच दोबारा हुई।

रिकॉर्ड के अनुसार, आगे की जांच की रिपोर्ट 14 अप्रैल 2026 को प्रस्तुत हुई और उसमें भी पहले वाले निष्कर्ष को बरकरार रखा गया। रिपोर्ट में दिशा की मौत को आत्महत्या बताया गया और किसी नए साक्ष्य के सामने नहीं आने की बात दर्ज थी। 6 मई 2026 को संबंधित प्राधिकारी ने उस निष्कर्ष को स्वीकार किया था।

इसके बावजूद हाई कोर्ट ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में नियमित आपराधिक जांच आवश्यक है।

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल सबूतों पर सवाल

पूर्व DGP ने इंटरव्यू में दिशा सालियन और सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को लेकर भी सवाल उठाए।

उन्होंने डिजिटल डिवाइस, डेटा रिकवरी और फोरेंसिक जांच की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उपलब्ध डिजिटल सामग्री की वैज्ञानिक जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

आज के आपराधिक मामलों में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल डेटा जांच के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं। लेकिन किसी डिवाइस से संबंधित दावा तभी प्रमाणित माना जा सकता है, जब जांच एजेंसी उसके रिकॉर्ड और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर निष्कर्ष निकाले।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत से संबंध पर क्या स्थिति है?

दिशा सालियन और सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बीच संभावित संबंध को लेकर वर्षों से अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।

पूर्व DGP विक्रम सिंह ने भी अपने इंटरव्यू में दोनों घटनाओं की टाइमलाइन और कुछ कथित समानताओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी पहलू पर विश्वसनीय सबूत उपलब्ध हों तो उसकी जांच होनी चाहिए।

लेकिन अभी किसी भी दावे को दोनों मौतों के बीच आपराधिक संबंध का स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। CBI जांच का उद्देश्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना की परिस्थितियों और संभावित अपराध की जांच करना है।

अब आगे क्या होगा?

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच CBI की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़नी है।

जांच अधिकारी को संबंधित दस्तावेज और सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। जांच के बाद यदि अपराध बनता है तो सक्षम अदालत के सामने रिपोर्ट पेश की जाएगी। वहीं, यदि अपराध नहीं मिलता है तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत रिपोर्ट दाखिल की जा सकती है।

इसलिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूर्व DGP के सवाल और सार्वजनिक दावे अपनी जगह हैं, जबकि मामले का कानूनी निष्कर्ष CBI की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से सामने आएगा।

संक्षेप में: दिशा सालियन की मौत के मामले में पूर्व DGP विक्रम सिंह ने पुलिस जांच और फोरेंसिक प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल उठाए हैं। वहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को CBI को FIR दर्ज कर नियमित जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना है और अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

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